national youth day : इन युवाओं ने हार नहीं मानी, कुछ कर गुजरने की ठानी, जानिए ऐसे ही युवाओं की Success Story

Reshu Jain

Publish: Jan, 12 2018 03:14:50 (IST)

Sagar, Madhya Pradesh, India
national youth day : इन युवाओं ने हार नहीं मानी, कुछ कर गुजरने की ठानी, जानिए ऐसे ही युवाओं की Success Story

हम मिलवा रहे हैं कुछ ऐसे ही होनहार युवाओं से अपने क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहे हैं

सागर. एक विचार लो, उस विचार को अपना जीवन बना लो। उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार को जीयो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो और बाकी सभी विचारों को किनारे रख दो। सफल होने का बस यही तरीका है। स्वामी विवेकानंद की इन पंक्तियों को यदि हर युवा आत्मसात कर ले तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। आज युवा दिवस पर हम मिलवा रहे हैं कुछ ऐसे ही होनहार युवाओं से अपने क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। बुलंद इरादों वाले ये युवा अपने शहर, माता-पिता का नाम रोशन कर रहे हैं।

ये पर्यावरण से लेकर गरीबों तक... सबके लिए वकील हैं
कुछ कर गुजरने की चाह रखने वाले एडवोकेट दीपक पौराणिक जब ११वीं में थे, तब से ही सामाजिक कार्यों में जुड़े हैं। विवि से बीए व एएलबी करने के बाद वे जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहे हैं। दीपक अब तक पर्यावरण, जल संरक्षण, किसान, आदिवासी उत्थान और नशामुक्तिके लिए दर्जनों जागरूकता अभियान चला चुके हैं। इसके लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर श्रेष्ठ वकील, यूथ आईकॉन, समाजसेवी, पर्यावरण रक्षा से जुड़े सम्मान मिल चुके हैं। वे धार्मिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक अनुष्ठान और कथा वाचन भी करते हैं।
-दीपक पौराणिक, एडवोकेट

राजपथ पर कर चुके परेड, अब आर्मी अफसर बनने का सपना
राजपथ पर पिछले साथ गणतंत्र दिवस के मौके पर परेड में शामिल होने वाले एनसीसी राहुल लुहार बचपन से ही प्रतिभाशाली हैं। गांव के स्कूल में एनसीसी न ले पाने के कारण शुरू में निराश हुए राहुल ने कॉलेज में एनसीसी ले ही ली। वे आट्र्स एंड कॉलेज में एनसीसी के थर्ड ईयर छात्र हैं। वाटर स्पोट्र्स में रूझान रखने वाले राहुल स्टेट लेवल पर खेल चुके हैं। वे रीवा, भोपाल, चित्रकूट सहित सागर में एनसीसी के दर्जनों कैंप किए हैं। वे कहते हैं कि आरडीसी कैंप में कठिन ट्रेनिंग होती है। मैंने राजपथ के लिए दिनरात मेहनत की और आखिरकार बीते साल मेहनत रंग लाई।
-राहुल लुहार, कैडेट्स, एनसीसी


किसानों के लिए आकाश सी सोच, मिल चुके 11 अवॉर्ड
कृषि प्रधान देश में खेती-बाड़ी से युवाओं का एकाएक मुंह मोडऩा बेहद चिंता की बात है, लेकिन तिली निवासी आकाश चौरसिया युवाओं को इसके प्रति जागरूक कर रहे हैं। 2011 से जैविक खेती कर रहे आकाश ने आर्गेनिक फोर लेयर फॉर्म में खेती व गोबर से अर्क एकत्रीकरण कर मिट्टी के बहाव को रोकने के लिए एक सिस्टम बनाना है। वे देशी बीज बैंक भी बना रहे हैं। साथ ही वे युवाओं को खेती के प्रति आकर्षित करने के लिए कई मॉडल बना चुके हैं। आकाश किसानों को प्रशिक्षण भी देते हैं। उन्हें अब तक 11 राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चके हैं।
-आकाश चौरसिया कृषि

ये मुफ्त में जरूरतमंदों को देते हैं परामर्श, छात्र हित में आगे
गढ़ाकोटा के छुल्ला गांव में एक किसान परिवार में जन्मे डॉ. उमेश यादव आज सरकारी सेवा के साथ गरीबों को मुफ्त परामर्श दे रहे हैं। वे बताते हैं कि पिता के देहांत के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां सिर पर आ गई थीं, इसलिए डॉक्टर बनने की ठानी और तब तक हार नहीं मानी जब तक सफल नहीं हुए। पहले कोटा ? से तैयारी की और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के प्रथम बैच से एमबीबीएस किया। छात्र और कॉलेज हित में कॉलेज की मान्यता से लेकर कई कार्य किए, जिसके बाद कॉलेज ने बेस्ट स्टूडेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया। वे अभी वर्तमान छात्रों को मार्गदर्शन भी दे रहे हैं।
-डॉ. उमेश यादव, रेलवे डॉक्टर

 

पहले जूडो, फिर रेसलिंग की, हार मिली पर निराश नहीं हुईं
2009 से राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर खेल रही रागिनी श्रीवास्तव गोल्ड मेडलिस्ट हैं। वे स्कूल के समय में जूडो खेलती थीं, लेकिन सपना रेसलिंग का था। फिर क्या तैयारी की और तब तक करती रहीं जब तक की गोल्ड मेडल न पा लिया। वे अब तक नई दिल्ली, इंदौर, सीहोर और जबलपुर में राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर खेल चुकी हैं। रागिनी बताती हैं कि छठी से जूडो खेलना शुरू कर दिया था। कॉलेज में आकर रेसलिंग शुरू कर दी। शुरुआत में हार मिलने से निराश हो गई थी लेकिन हिम्मत नहीं हारी। माता-पिता और अच्छे कोच के सहयोग एक मुकाम हासिल किया है।
रागिनी श्रीवास्तव

धर्म की गंगा बहा रहीं जयेश्वरी
तीन साल की उम्र से कथा करने वाली जयेश्वरी देवी की अगली कथा सितंबर में बद्रीनाथ में होगी। कर्रापुर निवासी जयश्वेरी नेशनल धार्मिक चैनल पर लाइव दिखेंगी। उन्होंने बताया कि 17 साल से विभिन्न स्थानों पर कथा का वाचन कर रहीं हैं। 10 साल की उम्र में वृन्दावन जाने का मौका मिला और फिर उदयपुर में नारायण सेवा संस्थान ट्रस्ट में दिव्यांगों के लिए कथा की।

बेटी ने समझा बेटियों का दर्द, तलाशने में निभाया अहम रोल
रायसेन के बरेली में जन्मी वर्षा धाकड़ 2015 से केंट थाने में एसआई हैं। बचपन से ही उनका सपना पुलिस में नौकरी कर समाज सेवा करना था। मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली वर्षा बताती हैं कि 9वीं से ही उन्होंने पढ़ाई का खर्च उठाया। गांव के स्कूल में पढ़ाकर, जो कुछ राशि मिलती थी, उससे पढ़ाई की। इसके बाद एसआई की तैयारी की, शुरू में आर्थिक तंगी हुई लेकिन लक्ष्य तो तय था, इसलिए पीछे नहीं हटी। वे अब तक अपहृत हुईं 9 लड़कियों को तलाशने में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। वे समाजसेवा के काम ? में भी पीछे नहीं रहती हैं।
-वर्षा धाकड़, एसआई


राजनीति: 9 हजार विद्यार्थियों का प्रतिनिधित्व

ए क्सीलेंस कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष नेहा जैन ने छात्रों के हित में काम करना शुरू कर दिए हैं। नेहा एमकॉम की स्टूडेंट हैं और अपने कॉलेज में वे 9 हजार छात्राओं का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। छात्रसंघ के चुनाव में उन्हें अच्छे बहुमत से जीत हासिल हुई थी। जिसके बाद उन्होंने कॉलेज में स्वच्छता अभियान पर भी काम किया। उनका अगला लक्ष्य कॉलेज के बाहर लग रही दुकानों को हटवाना है, ताकि पान और चाट के ठेले पर खड़े होने वाले युवक, लड़कियों के साथ छेड़छाड़ न कर सकें।

नृत्य: 700 बच्चों को सिखा चुकीं बारीकी
20 साल की उम्र में ही लोक कला को बढ़ावा देने वाली रजनी दुबे एक अकादमी का संचालन कर रही हैं। वे अब तक 700 बच्चों को डांस का प्रशिक्षण ने चुकी हैं। रजनी के अनुसार वे लोक कला, क्लासिकल, गायन, वादन और नाट्य के क्षेत्र में 2008 से काम कर रही हैं। एक्सीलेंस गल्र्स कॉलेज का प्रदेश स्तर युवा उत्सव में लगातार दो सालों प्रतिनिधित्व किया। ओडिशा, हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, बंगाल और बिहार आदि राज्यों में बुंदेलखण्ड की लोकनृत्य पर प्रस्तुति दे चुकी हैं।

कला: पहले घबराई, फिर दिखाया साहस
06 साल की उम्र से कवि सम्मेलनों में प्रस्तुति देने वाली ऐश्वर्या दुबे की बाल कवियों में अलग पहचान है। ऐश्वर्या अभी कक्षा आठवीं में पढ़ती हैं। कवि सम्मेलन में प्रस्तुति देने की रुचि घर में ही बढ़ी। बड़े पापा से कविताओं को पढऩा सीखा और धीरे-धीरे मंच पर कविता पाठ करना शुरू कर दिया। अब तक एमपी, यूपी, झारखंड और राजस्थान में कवि सम्मेलन में हिस्सा ले चुकी हैं। शुरू में घबराती थी लेकिन ठाना तो सबकुछ आसान हो गया। उन्हें पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

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