इस आश्रम की बेटी काेई जज है ताे काेई आर्यिका

इस आश्रम की बेटी काेई जज है ताे काेई आर्यिका

 बड़ा बाजार स्थित 78 वर्ष पुराने दिगम्बर जैन महिला आश्रम में बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ की कल्पना साकार हो रही है। आश्रम में अंधयारा, लार, अरोरा, नेकोरा और कुसमी आदि ग्रामीण क्षेत्रों से आकर लड़कियां पढ़ाई कर रही हैं। 

रेशु जैन@सागर.अंधयारा गांव। जैसा नाम वैसे ही इस गांव के हालात हैं। शिक्षा के नाम पर पूरी तरह अंधियारा छाया है। गांव की बेटियों को पढऩे के लिए यहां स्कूल नहीं है। कम उम्र में ही बेटियों की शादी कर दी जाती है। निरक्षरता की इस काल कोठरी से निकालकर इन बेटियों के जीवन में उजियारा फैलाने के लिए दिगंबर जैन महिला आश्रम ने पहल की है। आश्रम ने उस क्षेत्र की लड़कियों को शिक्षा देने का बीड़ा उठाया है, जहां स्कूल नहीं है। बड़ा बाजार स्थित 78 वर्ष पुराने दिगम्बर जैन महिला आश्रम में बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ की कल्पना साकार हो रही है। आश्रम में अंधयारा, लार, अरोरा, नेकोरा और कुसमी आदि ग्रामीण क्षेत्रों से आकर लड़कियां पढ़ाई कर रही हैं। इन गांवों की कई बेटियां अब पढ़-लिखकर सफलता की नई इबारत लिख रही हैं। 
मेरे गांव में पढ़ाई के लिए कोई साधन नहीं है। पढऩे के लिए शहर जाना होता है, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से शहर नहीं जा सकते। ऐसे में सबसे बड़ा सहारा हमारे लिए आश्रम है। यह कहना है नेकोरा ग्राम की वैशाली जैन का। ललितपुर के पास स्थित नेकोरा ग्राम में 8वीं के बाद स्कूल नही हैं। वैशाली ने बताया कि बहन विभा भी यहां साथ पढ़ाई करती है। 

1939 में हुई थी स्थापना 
आश्रम की स्थापना 1939 में की गई थी। स्थापना गणेश प्रसाद वर्णी ने कराई थी। प्रेरणास्त्रोत धर्ममाता चिरोंजाबाई थी। जिनकी प्रेरणा से लड़कियों को यहां शिक्षा दी जा रही है। आश्रम के कोषाध्यक्ष अरुण कुमार जैन ने बताया कि गणेश प्रसाद के कहने पर दादा कुंदनलाल ने आश्रम के लिए केवल 22 हजार रुपए की जमीन खरीदी थी। जहां आज भविष्य के बीज बोए जा रहे हैं। 

रहने और खाने का इंतजाम 
दिगम्बर जैन महिला आश्रम के अध्यक्ष कैलाश सिंघई ने बताया कि आश्रम में बेटियों की शिक्षा के साथ-साथ उनके रहने और खाने का भी इंतजाम है। यहां छात्राओं के लिए नि:शुल्क खाने और रहने के इंतजाम हैं। आश्रम में 8 बड़े कमरे और एक हॉल है। हॉल में 30 छात्राएं एक साथ रहती हैं। छात्राओं को दोनों टाइम का खाना, नाश्ता और रात में दूध दिया जाता है। 6वीं से 12वीं तक की छात्राएं यहां रहती हैं। प्रति छात्रा केवल 600 रुपए लिए जाते हैं।शिक्षा के लिए कोई फीस इन छात्राओं से नहीं ली जाती है।  

स्कूल में सभी समाज की छात्राओं को दाखिला 
आश्रम के मंत्री सुभाष चौधरी ने बताया कि आश्रम में केवल जैन छात्राएं रहती हैं, लेकिन स्कूल में सभी समाज की बेटियों को दाखिला दिया जाता है। गरीब घरों की बेटियों को नि:शुल्क शिक्षा मिलती है। जिन छात्राओं की आर्थिक स्थिति सही है, उनके केवल 500 से 1000 रुपए सालभर के लिए जाते हैं। स्कूल में सभी समाज की लड़कियां एक साथ पढ़ाई करती हैं। उनके लिए तमाम सुविधाएं हैं। स्कूल में कुल 450 छात्राएं पढ़ाई करती हैं।


ये हैं सुविधाएं 
छात्राओं को डिजिटल युग से जोडऩे के लिए कम्प्यूटर लैब।  
शिक्षा के साथ धर्म से छात्राएं जुड़ें इसके लिए परिसर में मंदिर।  
बिजली गुल होने पर भी पढ़ाई प्रभावित न हो इसलिए जनरेटर का इंतजाम।  
शुद्ध जल के लिए आरओ सिस्टम लगाया गया है।  
छात्रावास में रहने के लिए सभी लड़कियों को स्टील की अलमारी में रैक दिए गए हैं।
खाने के लिए मैस बनाई गई है, जहां एक साथ लड़कियां खाना खाती हैं।  
स्कूल में खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। 

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