जानें गांव पर क्यों बनी कहावत, 52 कुआं 53 तला फिर भी बसाहरी में पानी का काल

गांव का एक कुंड बुझाता है प्यास

By: anuj hazari

Published: 07 Sep 2020, 09:00 AM IST

बीना. शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित बसाहरी गांव की पहचान तलाब के नाम से की जाती है। जहां पर किसी समय में करीब 52 कुआं 53 तालाब थे, लेकिन उन में एक समय पर पानी की खत्म हो जाता था। वहीं गांव में स्थित एक कुंड पूरे गांव की प्यास बुझाता है। गांव के जागरूक युवा हिमांशु तिवारी ने बताया कि गांव की पहचान जलस्रोत कुआं और तालाब से है। जिसे आज भी बुजूर्ग लोग तालाबों से जानते हंै। यहां पर नया ताल, धना ताल आज भी अस्तित्व में हैं इसके पहले के तालाब कई वर्ष पहले अस्तित्व खो चुके हैं, लेकिन लोगों का मानना है कि भगवान भोले की कृपा से यहां पर हजारियां मंदिर के पास स्थित एक कुंड चमत्कारिक है जो पूरे गांव में पानी खत्म हो जाने के बाद भी नहीं सूखता है। इस कुंड की गहराई महज पांच फीट है, जिसमें लोगों ने दस हॉर्स पावर का मोटर पंप लगाकर भी फसलों की सिंचाई की, लेकिन कुंड का पानी कभी खत्म नहीं हुआ। लगातार पानी निकालने पर एक से डेढ़ फीट नीचे पानी पहुंच जाता है और उससे नीचे पानी कभी नहीं जाता है। वहीं पूरे वर्ष यहां पर स्थित दो तालाब लोगों की प्यास बुझाते हैं।
तालाब की सुरंग से राजाओं ने किया राज
यहां स्थित तालाब से सुरंग के द्वारा एक रास्ता सीधा खिमलासा किला तक जाता है जिसे खिमलासा किला में बसाहरी दरवाजा के नाम से जाना जाता है। राजा अपने सैनिकों के साथ अंदर ही अंदर खिमलासा से बसाहरी तक आते जाते थे। तालाब की इन्हीं खासियत के कारण इसकी पहचान तालाब के नाम से है।
गांव की आबादी - 9000
मतदाता - 4800

anuj hazari Reporting
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