सिर्फ नाम का है स्टेडियम, आज तक नहीं मिला खिलाड़ियों को लाभ

गड्ढों में तब्दील हो गया है खेल मैदान

By: sachendra tiwari

Published: 30 Jun 2020, 09:15 AM IST

बीना. हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में 42 लाख रुपए की लागत से स्टेडियम का निर्माण कराया गया है, जिससे खेल प्रतिभाओं को परेशान न होना पड़े। इसका उद्घाटन वर्ष 2016 में हो चुका है और उद्घाटन के समय स्टेडियम अधूरा था जो आज तक पूरा नहीं हो पाया है, जिससे वहां एक भी खेल का आयोजन नहीं हो पाया है। मैदान में जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं और बारिश में पूरा मैदान कीचड़ में तब्दील हो जाता है।
स्टेडियम का निर्माण खेल युवा कल्याण विभाग सागर द्वारा कराया गया है। स्टेडियम बनने के बाद शहर के खिलाड़ियों को इसका लाभ नहीं मिला है। जबकि स्टेडियम बनने से खेल प्रतिभाएं खुश थी कि उन्हें एक व्यवस्थित जगह अभ्यास के लिए मिलेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं हुआ। यहां स्टेडियम के नाम पर सिर्फ बाउंड्रीवॉल ही बनाई गई है और पूरा खेल मैदान गड्ढों में तब्दील हो चुका है। न तो अभी तक मैदान को समतल किया गया है और न ही यहां बैठने के लिए कोई व्यवस्था बनाई गई है। खिलाड़ियों की सुविधा के लिए स्टेडियम में घास भी लगाई जानी थी, लेकिन अभी तक घास नहीं लगाई गई है। यदि यहां सभी सुविधाएं हो जाती तो शहर का सबसे अच्छा स्टेडियम होता। खाली पड़े स्टेडियम में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बना रहता है। स्टेडियम में जगह-जगह शराब की खाली बोतले डली हुई हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। कुछ माह पूर्व बीओरआएल के माध्यम से स्टेडियम में काम होना था, लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो पाई है।
आसपास के लोग फेंकने लगा कचरा
स्टेडियम खेलने लायक न होने के कारण आसपास के लोग यहां कचरा फेंकने लगे हैं। जगह-जगह मैदान में गंदगी फैली हुई है। इसपर रोक लगाने वाला भी वहां कोई नहीं है।
नहीं हैं शहर में खेल मैदान
आरपीएफ ग्राउंड के अलावा शहर की खेल प्रतिभाओं को प्रेक्टिस के लिए व्यवस्थित खेल मैदान उपलब्ध नहीं है। जबकि यहां से पहले हॉकी, क्रिकेट सहित अन्य खेलों में कई प्रतिभाएं सामने आ चुकी हैं। यदि अच्छी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं तो प्रदेश और देश में प्रतिभाएं नगर का नाम रोशन करेंगी।
लॉकडाउन के कारण रुक गया प्रोजेक्ट
बीओआरएल और खेल युवा कल्याण विभाग के डायरेक्टर के बीच प्रोजेक्ट संबंधी बात चल रही थी, लेकिन बीच में लॉकडाउन होने के कारण यह प्रोजेक्ट लंबित है। भोपाल स्तर से प्रोजेक्ट बन रहा था, जिससे ज्यादा जानकारी नहीं है।
प्रदीप अबिद्रा, जिला अधिकारी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग

sachendra tiwari Reporting
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