एक सरकारी ट्यूबवेल के भरोसे पांच हजार की आबादी, टैंकर पहुंचते ही लग जाती हैं कतारें : देखें वीडियो

Madan Gopal Tiwari

Publish: May, 18 2019 09:00:00 AM (IST)

Sagar, Sagar, Madhya Pradesh, India

सागर. गर्मी शुरू होते ही नगर पालिका क्षेत्र में जलसंकट के हालात नजर आने लगे हैं। यहां सबसे ज्यादा समस्या कोरेगांव व बड़तूमा में देखने को मिल रही है। चार से पांच हजार की आबादी वाले इन गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। कोरेगांव में कहने के लिए राजघाट की पानी लाइन तो बिछ गई, लेकिन लोगों का कहना है कि पानी प्रेशर से आने के कारण कोई फायदा ही नहीं मिल रहा। फिलहाल लोगों के लिए एक सरकार ट्यूबवेल सहारा बना हुआ है, इसके अलावा गांव में जैसे ही टैंकर पहुंचता है तो लोगों की कतारे लग जात हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक एक-एक बूंद पानी के लिए संघर्ष करते नजर आए। इसके अलावा नपा के उन वार्डों में भी पानी की समस्या हो चुकी है जहां पर राजघाट से जलापूर्ति की जाती है, क्योंकि कई कॉलोनियों में चार दिन के अंतराल से पानी की सप्लाई की जा रही है। इतना ही नहीं नपा के बड़तूमा में तो अभी से लोग पानी खरीदकर पीने के लिए मजबूर हैं।

गंदगी के बीच से भर रहे पानी
कोरेगांव में यह स्थिति शुरू से देखने को मिली है कि जहां पर भी जलस्त्रोत थे वे गंदगी से घिरे हुए थे, और सालों से चली आ रही यह स्थिति आज भी जस की तस है। गांव के शासकीय स्कूल के पास स्थित सरकार ट्यूबवेल के आसपास नालियां बन गई हैं जिनमें मवेशी बैठे रहते हैं, पास में लगा हैंडपंप भी गंदगी के बीच ही लगा हुआ है, लेकिन पानी की कोई अन्य व्यवस्था न होने के कारण मजबूरी में लोग गंदगी के बीच से पानी ले रहे हैं।

बड़तूमा में भी हाल-बेहाल
नगर पालिका के वार्ड नंबर-18 बड़तूमा में भी करीब तीन दशक से पानी एक बड़ी समस्या है। यहां के लोगों का कहना है कि गांव की आबादी करीब चार से पांच हजार है, लेकिन पेयजल के नाम पर गांव में महज तीन हैंडपंप हैं। कुआं सूख चुके हैं तो आधे गांव में पेयजल सप्लाई करने वाले नलजल योजना भी परेशान कर देती है। ग्रामीणों ने बताया कि चुनावी दौर में यहां नेता बड़े-बड़े वादे करके जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद कभी लौटकर वापस नहीं आए। यही कारण है कि यहां कुछ परिवार तो टैंकर से पानी खरीद लेते हैं, लेकिन आर्थिक कमजोर लोगों के लिए या तो आर्मी के आेवरफ्लो का सहारा होता है या फिर गांव के आसपास लगे खेतों से पानी का परिवहन करना पड़ता है।

लोग बोले पुरानी समस्या

गांव में पेयजल की स्थिति नहीं सुधर सकी है। पानी एक बड़ी समस्या है। पथरीली जमीन के कारण ट्यूबवेल और हैंडपंप भी सफल नहीं है, इसलिए हमें तो साल भर टैंकर का ही सहारा लेना पड़ता है। बाकी गांव के कुछ लोग एक से दो किलोमीटर दूर से पानी परिवहन करने मजबूर हैं।
मनीष पांडे, बड़तूमा


गांव में वैसे तो दो-तीन और शासकीय हैंडपंप हैं, लेकिन गर्मी शुरू होते ही उनमें पानी नहीं निकलता है। अब यही एक शासकीय ट्यूबवेल सहारा है, जिस पर सुबह से लेकर शाम तक लाइनें लगीं रहती हैं।

मोहम्मद असलम, कोरेगांव

गांव में पानी की समस्या से शुरू से ही है। राजघाट की लाइन बिछाकर कनेक्शन तो हो गए, लेकिन उनमें पानी प्रेशर से नहीं आ रहा है। एक शासकीय ट्यूबवेल व टैंकर के सहारे ही गांव में पानी का काम चल रहा है।
तुलसीराम यादव, कोरेगांव

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