साहित्यकारों की खान है सागर, जानिए किसने कही यह बड़ी बात

संभागीय साहित्यकार सम्मेलन

By: manish Dubesy

Published: 30 Dec 2018, 02:33 PM IST

कवि सम्मेलन में श्रोता हुए मंत्रमुग्ध, छात्रों की बौद्धिक प्रतियोगिताएं हुई
सागर. बुन्देलखँड हिन्दी साहित्य-संस्कृति मंच के तत्वावधान में दो दिवसीय संभागीय साहित्यकार सम्मेलन की शुरुआत शनिवार को बीएस जैन धर्मशाला बड़ा बाजार के सभागार में शुकदेवप्रसाद तिवारी की अध्यक्षता और केके सिलाकारी के मुख्य आतिथ्य में हुई। मंचीय अतिथियों जेपी पाण्डेय, निर्मल चन्द निर्मल, मधुसूदन सिलाकारी, पूरन सिंह राजपूत और मंच के कार्यकारी अध्यक्ष केके बख्शी के वक्तव्य हुए। संस्था के महामंत्री मणीकांत चौबे ने स्वागत भाषण दिया। संचालन राजेन्द्र दुबे कलाकार ने किया।
मंच के कार्यकारी अध्यक्ष केके बख्शी ने कहा कि सागर साहित्यकारों की खान है। जि तरह से सागर में साहित्यक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं उतनी अन्य जगह कहीं नहीं मिलती हैं। यहां की सांस्कृतिक और साहित्यक संस्थाएं सक्रिय होकर काम कर रही हैं। द्वितीय सत्र में श्यामलम् अध्यक्ष उमाकान्त मिश्र के संचालन व संयोजन में शालेय तथा महाविद्यालयीन स्तर के छात्र-छात्राओं के मध्य स्वरचित काव्य पाठ, समूह गान वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अंग्रेजी की अनिवार्यता के बीच हिन्दी की स्थिति विषय पर भाषण प्रतियोगिता हुई। जिसमें विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के लगभग 45 प्रतिभागियों ने भाग लिया। तृतीय सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़ और छतरपुर आए कवियों ने काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर लक्ष्मीनारायण चौरसिया, डॉ. एसएम सीरोठिया, डॉ. गजाधर सागर, राधाकृष्ण व्यास, कुन्दन पाराशर, हरी शुक्ला, मुकेश तिवारी, हरीसिंह ठाकुर, शरद जैन गुड्डू, डॉ. दिनेश पटेरिया, पुष्पदन्त हितकर, जीएल छत्रसाल, अमित आठिया, सीताराम भावुक, देवकीनंदन रावत, बिहारी सागर, सुनीला सराफ, शैलेष दुबे सिरदर्द, सुशील खरे वैभव पन्ना, रमेश दुबे, जीआर साक्षी उपस्थित थे।

manish Dubesy Desk
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