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ख्वाब लोगों को न्याय दिलाने का पर कानूनी तालीम ही कागजों में उलझी

कानून की पोथी पढ़कर लाचारों को न्याय दिलाने का ख्वाब पाले बैठे विद्यार्थियों की हसरत सरकारी कागजों में दम तोड़ती नजर आ रही हैं। 

जयपुर

Published: September 20, 2015 09:13:17 am

कानून की पोथी पढ़कर लाचारों को न्याय दिलाने का ख्वाब पाले बैठे विद्यार्थियों की हसरत सरकारी कागजों में दम तोड़ती नजर आ रही हैं। 

कानूनी तालीम हासिल करने के लिए स्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थी विधि महाविद्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक मान्यता नहीं मिलने के कारण उन्हें कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। मान्यता की दरकार में महाविद्यालय की कुल 60 सीटें अभी तक रिक्त हैं।

प्रदेश में वर्ष 2012 से बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने विधि महाविद्यालयों को हर वर्ष मान्यता लेने के लिए कहा है। अब प्रति वर्ष कॉलेजों को प्रवेश से पहले हर वर्ष मान्यता लेनी पड़ती है। इसके बाद भी कक्षाएं शुरू होती हैं। 

अब सितम्बर का आधा से ज्यादा माह बीत गया है, लेकिन अभी तक मान्यता का कहीं अता-पता नहीं है। धौलपुर विधि महाविद्यालय को फिलहाल भरतपुर ब्रज यूनिवर्सिटी ने मान्यता लेने के लिए हरी झण्डी दे दी है। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस पर मोहर लगाएगा। 

कॉलेज प्रशासन ने बताया कि इस संबंध में कई बार पत्र व्यवहार किया गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पिछले वर्ष भी विधि महाविद्यालय की प्राचार्य ने खुद दिल्ली जाकर मान्यता के कागजात लिए थे। अब भी स्थिति ऐसी ही बनती नजर आ रही है।

उम्मीद के सहारे विद्यार्थी

कानूनी पढ़ाई पढऩे के इच्छुक विद्यार्थी हर रोज कॉलेज पहुंच रहे हैं। हालांकि कॉलेज में प्रथम वर्ष की 60 सीटें हैं, लेकिन इससे कहीं अधिक विद्यार्थी प्रवेश पाने वालों की सूची में हैं। 

ज्यादातर को यही उम्मीद है कि उन्हें प्रवेश मिल जाएगा। इस उम्मीद के कारण विद्यार्थी प्रवेश पाने के लिए बाहर भी नहीं जा पा रहे, लेकिन कागजों में अटकी मान्यता उनके अरमानों पर पानी फेरती नजर आ रही है।

चुनाव से भी रहे वंचित

देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अपना लीडर चुनने का अधिकार सबको दिया है, लेकिन हाल ही में हुए कॉलेज चुनाव में मान्यता अटकने के कारण प्रवेश नहीं मिल पाने से विद्यार्थी मतदान से भी वंचित रह गए हैं। खास बात यह है कि कॉलेज में अभी डिग्री वितरण होना है। 

इसके लिए दीक्षांत समारोह आयोजित होगा, लेकिन प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल पाने के कारण यह दीक्षांत समारोह भी अभी टल रहा है। 

खास बात यह है कि भरतपुर विधि महाविद्यालय भी अभी मान्यता के इंतजार में है। ऐसे में वहां अभी तक कॉलेज चुनाव संपन्न नहीं हो सके हैं।

जग रही अपने घर की आस

उधारी की बिल्डिंग में चल रहे विधि महाविद्यालय को अब अपने घर में जाने की आस प्रबल हो उठी है। सरकार की ओर से प्रेरणा नगर के पास मिली भूमि पर बाउंड्रीवाल होकर निर्माण कार्य का शुभारंभ हो गया है। 

ऐसे में कॉलेज प्रशासन को उम्मीद जगी है कि जल्दी ही यह कॉलेज अपने भवन में संचालित हो सकेगा। अब तक यह महाविद्यालय राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की बिल्डिंग में संचालित हो रहा है।

अभी तक स्टाफ का टोटा

विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के वादे हर सरकार हर बार करती हैं, लेकिन बुनियादी तौर पर इन पर अमल बेहद कम हो पाता है। 

कानूनी पढ़ाई पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए 1 प्राचार्य सहित 4 व्याख्याताओं के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में यहां प्राचार्य डॉ. तलत फातिमा एवं एक मात्र व्याख्याता नीलू ही तैनात हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ाने में इन दोनों को खासा पसीना बहाना पड़ रहा है।

विधि महाविद्यालय धौलपुर की प्राचार्य डॉ. तलत फातिमा ने बताया कि हर वर्ष अब मान्यता के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। मान्यता नहीं मिलने के कारण अभी तक बच्चों को प्रवेश नहीं मिल सका है। हम लगातार उच्चाधिकारियों के संपर्क में हैं। मान्यता के लिए पुरजोर कोशिश में लगे हुए हैं।

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