scriptTigress has given birth to cubs in Nauradehi sanctuary | टाइगर स्टेट में दो नए मेहमान, दो शावकों के साथ नजर आई बाघिन | Patrika News

टाइगर स्टेट में दो नए मेहमान, दो शावकों के साथ नजर आई बाघिन

नौरादेही में तीसरी पीढ़ी के दो शावकों ने लिया जन्म, माफिया और शिकारियों से सुरक्षा करना चुनौती

सागर

Published: April 30, 2022 07:29:52 pm

सागर. टाइगर स्टेट एमपी में एक और खुशखबरी सामने आई है प्रदेश के नौरादेही अभयारण्य में दो शावकों का जन्म हुआ है। नौरादेही में यह तीसरी पीढ़ी के शावक हैं। छह माह बाद एक बार फिर एक बाघिन दो शावकों के साथ देखी गई है। शावक दो माह से अधिक के हो चुके हैं और पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

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नौरादेही अभयारण्य में बाघों का कुनबा बढ़ता जा रहा है। नौरादेही में शावकों की यह तीसरी पीढ़ी है। इसी के साथ यहां के बाघों की संख्या बढ़कर दस तक पहुंचने का अनुमान है। एक साल से यहां एक प्रवासी बाघ भी देखा जा रहा है जो शायद कहीं और से विस्थापित होकर नौरादेही पहुंचा है।

बताया गया है कि हाल ही में वन विभाग के गश्ती दल ने बाघिन एन 112 को दो शावकों के साथ देखा गया था। जिसकी अब तस्वीरें भी सामने आई हैं। शावक मां की सुरक्षा में खेलते हुए दिखे थे। एन 112 वर्ष 2018 में बाघ पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के तहत बांधवगढ़ नेशनल पार्क से लाई गई बाघिन की संतान है। राधा के साथ ही किशन नाम का बाघ यहां लाकर छोड़ा गया था। इन्हीं की संतान बाघिन ने अब दो शावकों को जन्म दिया है।

बाघिन राधा ने दिए चार शावक
नौरादेही की रानी के नाम से मशहूर बाघिन राधा अब तक चार शावकों को जन्म दे चुकी है। यहां आने के बाद पहली बार 2019 में नरमादा दो शावकों को जन्म दिया था। वहीं नवंबर 2022 में भी दो शावक जन्मेे थे और अब छह माह बाद उसकी बेटी एन 112 मां बनी है। नौरादेही अभयारण्य, पन्ना टाइगर रिजर्व तथा रातापानी अभयारण्य के मध्य कोरिडोर निर्मित करता है, इस कारण किसी अन्य संरक्षित क्षेत्र से बाघ यहां आतेजाते रहते हैं। डीएफओ सुधांसु यादव ने बताया कि चार वर्षों में नौरादेही अभयाराण्य में बाघों का कुनवा लगातार बढ़ रहा है और अब यहां वर्तमान में इनकी संया 10 हो चुकी है।

नौरादेही अभयारण्य की सीमाएं तीन जिलों सागर, नरसिंहपुर व दमोह मिलने से इसे प्रदेश का सबसे बड़ा अभयारण्य बनाती है। यह 1197 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैले 6 रेंज, 98 वीटों में विभक्त है। अभयारण्य प्रबंधन बाघों के रहवास, विकास, वन तथा संरक्षण का कार्य कर रहा है। इसके बावजूद जंगल में वन माफिया और शिकारियों से वन्य प्राणियों की सुरक्षा करना एवं वन संपदा बचाना चुनौती बनी हुई है। एसडीओ सेवाराम मलिक ने बताया कि अभयारण्य में निगरानी बढ़ा दी गई है, शावकों की उचित निगरानी के लिए विशेष ट्रेकिंग दल गठित किया गया है।

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