उद्यानिकी विभाग में ही फलदार वृक्षों का हो रहा यह हश्र, जिम्मेदारों को चिंता ही नहीं

उद्यानिकी विभाग में ही फलदार वृक्षों का हो रहा यह हश्र, जिम्मेदारों को चिंता ही नहीं
Tree cutting in horticulture department

Hamid Khan | Publish: Feb, 18 2018 04:15:38 PM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

फलदार वृक्षों की कटाई बिना अनुमति लिये की जा रही है।

राहतगढ़. शासकीय सब्जी, बीज उत्पादन एवं फलोद्यान प्रक्षेत्र झिला में सहायक संचालकों की मनमानी से दर्जनों फलदार वृक्षों की कटाई की जा रही है।
फलदार वृक्षों की कटाई बिना अनुमति लिये की जा रही है। सहायक संचालक यशकुमार सिंह ने बताय कि उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग अधिकारी के मौखिक आदेश पर फलदार वृक्षों को काटा गया है। उद्याानिकी विभाग के सहायक संचालकों को अनुुमति न लेना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर रही है। उद्यानिकी में पौधा रोपण के लिए तैयार पौधशाला भी अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। जहां ग्रीन मेट कटी-फटी नजर आ रही हैं जिसमें रोपे गए पौधे सूख रहे हैं। वहीं आलू की फसल में कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं, जबकि उसकी निंदाई समय पर न होने से पैदावार में अंतर आएगा। उद्याानिकी विभाग के जिम्मेदार अफसरों द्वारा यहां का निरीक्षण न किए जाने कर्मचारियों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। विगत दिवस एसडीएम गौरव बैनल ने उद्याानिकी विभाग का दौरा किया। परन्तु उनकी अव्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं गया।

यह है उद्यानिकी विभाग
दरअसल, मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र और उत्पादन में वृद्वि करने के साथ-साथ ही संतुलित आहार उपलब्ध कराने के लिए 12 फरवरी, 1982 को राज्य शासन, कृषि विभाग के अधीन उद्यानिकी व फार्म फारेस्ट्री संचालनालय की स्थापना की गई। मध्यप्रदेश शासन द्वारा उद्यानिकी के क्षेत्र में प्रदेश को अग्रणी बनाने की दिशा में एवं कृषि पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये उद्यानिकी व प्रक्षेत्र वानिकी और मध्यप्रदेश कृषि उद्योग विकास निगम को मिलाकर, कृषि विभाग से पृथक कर, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग का गठन किया गया, जिसकी अधिसूचना दिनांक 22 दिसम्बर 2005 को जारी की गई थी।

इसका उद्देश्य
उद्यानिकी के क्षेत्र में विस्तार के लिए योजनाओं को आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप तीब्रगामी, समयानुकूल, रूचिकर, आकर्षक और बृहद कृषक समूह के साथ ही गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले खेतिहर एवं भूमिहीन मजदूरों के लिए उपयोगी बनाने की महती आवश्यकता है, इसके तहत इसे सुधारा जा रहा है।

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