बड़े ही भाग्य से सुनने के लिए मिलती है भागवत कथा

वीरसावरकर वार्ड में भागवत कथा का आयोजन

By: anuj hazari

Published: 30 Dec 2018, 09:00 AM IST

बीना. वीरसावरकर वार्ड में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास पं. हरीश शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का वर्णन करते हुए कहा कि कृष्ण के पैदा होने के बाद कंस उनको मौत के घाट उतारने के लिए पूतना को भेजता है। पूतना वेष बदलकर भगवान श्रीकृष्ण को जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण उसको ही मार डालते हैं। उसके बाद कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इन्द्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन का कार्यक्रम करने की तैयारी करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण उनको इन्द्र का पूजन करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज की पूजन करने की बात कहते हैं और इन्द्र क्रोधित हो जाते हैं और अपने क्रोध से भारी वर्षा करते हैं। जिसको देखकर सभी ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा को देख भगवान श्रीकृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे नगरवासियों को पर्वत को नीचे खड़ा कर लेते हैं और इन्द्र एक सप्ताह के बाद बारिश को बंद कर देते हैं। इसके बाद सभी गोवर्धन की पूजन करते हैं। आज कथा में गोवर्धन भगवान को छप्पन भोग लगाए गए। कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन हैं। यह कथा बड़े भाग्य से सुनने को मिलती है। इसलिए जब भी समय मिले कथा में सुनाए गए प्रसंगों को सुनकर अपने जीवन में आत्मसात करें, इससे मन को शांति भी मिलेगी और कल्याण होगा। कलयुग में केवल कृष्ण का नाम ही आधार है जो भवसागर से पार लगाते हैं। उन्होंने कहा कि परिवर्तन इस संसार का नियम है यह संसार परिवर्तनशील है, जिस प्रकार एक वृक्ष से पुराने पत्ते गिरने पर नए पत्तों का जन्म होता है, इसी प्रकार मनुष्य अपना पुराना शरीर त्यागकर नया शरीर धारण करता है। कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

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