vitamin d deficiency symptoms : सर्दी के मौसम में विटामिन डी की कमी से चटक सकती हैं हड्डियां, जानें और क्या हैं खतरे

vitamin d deficiency symptoms : सर्दी के मौसम में विटामिन डी की कमी से चटक सकती हैं हड्डियां, जानें और क्या हैं खतरे

Reshu Jain | Publish: Dec, 07 2017 01:27:46 PM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

आजकल बहुत सारे लोग शरीर में विटामिन डी की कमी से ग्रसित हैं।

सागर. प्रदेशभर में मौसम का मिजाज गड़बड़ाया हुआ है। कभी बादल तो कभी कोहरा। नतीजतन सूरज की रोशनी धरती पर नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में विटामिन डी के मुख्य स्रोत धूप न मिलने से शरीर में विटामिन-डी की कमी हो सकती है। कई दिन तक धूप न निकलने की वजह से खतरा बढ़ जाता है। आजकल बहुत सारे लोग शरीर में विटामिन डी की कमी से ग्रसित हैं।

दिनचर्चा भी कुछ ऐसी कि धूप नहीं हो रही नसीब
डॉक्टरों का कहना है ज्यादातर महिलाओं को ये रोग देखने को मिल रहा है। 45 से अधिक उम्र की महिलाओं में विटामिन डी कमी पाई जा रही है। जानकारी के मुताबिक निजी क्लीनिक पर आने वालीं 10 में से पांच महिलाएं विटामिन डी का ही शिकार हैं। विशेषज्ञों के अनुसार विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत धूप है। लोग सुबह जल्दी ऑफिस चले जाते हैं। दिनभर ऑफिस के बंद माहौल में बीता, फिर शाम ढले लौटते हैं। हमारी दिनचर्या ऐसी हो गई है कि धूप में निकलने की जरूरत ही नहीं पड़ती। जबकि विटामिन डी शरीर व हड्डियों के विकास और स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

यह हैं फायदे विटामिन डी के
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष झा के अनुसार धूप सेंकने से शरीर को भरपूर मात्रा में विटामिन डी मिलता है। इसके साथ ही धूप सेंकने से जोड़ों का दर्द और सर्दी से होने वाले बदन दर्द से भी राहत मिलती है। दरअसल, धूप हमारे शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन पैदा होता है। इस हार्मोन के होने से अच्छी और सुकूनभरी नींद आती है। इससे मानसिक तनाव भी कम होता है। धूप से हमारे दिमाग में ताजगी और खुशी का रसायन भी तेज होता है। अवसाद जैसी बीमारियां ठीक होती हैं।

ये हैं पहचान के लक्षण
किसी काम में मन नहीं लगना। डिप्रेशन में रहना।
ज्यादा थकान महसूस होना। मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में दर्द, पीठ दर्द होना।
बिना कोई मेहनत के ज्यादा पसीना आना। शरीर का तापमान 98.6 डिग्री के आसपास होना।
अक्सर बीमार रहना। वायरस और बैक्टीरियल रोग जल्द ठीक न होना। ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल हाई रहना। हाई ब्लड प्रेशर से हार्ट की बीमारी, हार्ट अटैक का खतरा।
चोट, सर्जरी, इन्फेक्शन की वजह से होने वाले घाव ठीक होने में समय लगना।

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