अंधेरा घिरते ही लावारिस हो जाता है शहर, 'बाज' दिखता है न ही जवान

अंधेरा घिरते ही लावारिस हो जाता है शहर, 'बाज' दिखता है न ही जवान

Sanjay Sharma | Publish: Feb, 15 2018 03:43:12 PM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

रात में ट्रैफिक पाइंट खत्म होने के बाद थानों का बल हो जाता है सुस्त

सागर. शहर का बेहाल ट्रैफिक रात ८ बजे के बाद और भी बेलगाम हो जाता है। इनदिनों वैवाहिक-धार्मिक आयोजनों के कारण सड़कों पर शाम होते ही दबाव बढ़ जाता है लेकिन ट्रैफिक पाइंट न होने से व्यवस्था की सुध लेने कोई नहीं आता। बारात निकलने के दौरान सड़कों पर जहां-तहां जाम लगा रहता है और वाहनों में फंसे लोग मजबूर हो जाते हैं। ५ लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में रात ८ बजे के बाद टै्रफिक व्यवस्था संभालने के लिए एक दर्जन भी पुलिसकर्मी नहीं हैं, जो प्वाइंट पर तैनात रहते हों। रात में थानों की बाज स्क्वॉड भी ट्रैफिक जाम की स्थिति से पल्ला झाड़ लेती है।

थाने बेपरवाह, ट्रैफिक अमला कमजोर
मोतीनगर, कैंट कोतवाली, गोपालगंज, सिविललाइन और उपनगर मकरोनिया में पदमाकर सहित कुल ६ पुलिस थाने और एक ट्रैफिक थाना है। टै्रफिक थाना दिन भर शहर सहित प्रवेश मार्गों तक वाहनों का आवागमन नियंत्रित करता है। लेकिन ट्रैफिक में ४० फीसदी कमी बल की कमी है। इसमें से भी १० से १५ जवान वीवीआईपी ड्यूटी में शहर के बाहर आते-जाते रहते हैं। वहीं टै्रफिक इंतजाम को लेकर शहरी थाने का पुलिस बल बेपरवाह रहता है।

सूने चौराहों पर नहीं किसी का ध्यान
शादी-समारोहों या त्योहारों के समय रात में सड़कों पर वाहनों के अलावा पैदल चलने वालों का दबाव एकदम बढ़ जाता है। इनदिनों शहर में वैवाहिक आयोजनों की धूम है। हर गली-मोहल्ले में बारात निकलने का दौर चल रहा है जिससे शाम ७ बजे के बाद सड़क पर भीड़ बढ़ जाती है। भीड़ और वाहनों का दबाव झेलती सड़कों पर बारातों के समय जाम लगता है लेकिन सूने चौराहों और सड़कों पर व्यवस्था को संभालने टै्रफिक पुलिस तैनात ही नहीं रहती।

शिकायत के बाद लगाएंगे प्वाइंट
रात में सूनी सड़क और चौराहों पर बारात व अन्य आयोजनों के कारण भीड़ या जाम को संभालने थानों से पुलिसकर्मी या बाज स्क्वॉड भेजा जाता है। सामान्य स्थिति में रात में ट्रैफिक पाइंट नहीं लगाते लेकिन शिकायत को देखते हुए बकोली चौराहे से मेडिकल कॉलेज के बीच पाइंट लगाना तय करेंगे।
-अखिलेश राय, टीआई ट्रैफिक सागर

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