World Asthma Day : प्रदूषण और धूल की चपेट में आकर हो सकते हैं अस्थमा का शिकार

सावधानी ही है बीमारी से बचाव का उपाय

By: आकाश तिवारी

Published: 07 May 2019, 01:26 PM IST

सागर. जिले में अस्थमा के रोगी बड़ी संख्या में है। हालांकि इसका कोई सर्वे नहीं होने से यह बता पाना मुश्किल है कि कितने लोग इस रोग से पीडि़त हैं। बीएमसी में दो साल में 20 फीसदी दमे के मरीज बढ़ गए हैं। जानकार इसके पीछे शहर में बढ़ते वाहनों से निकलने वाले धुएं और सड़कों में उड़ रही धूल को जिम्मेदार बता रहे हैंं। जिले में बढ़ रहे वाहनों के कारण हो रहे प्रदूषण से लोगों के स्वास्थ पर गहरा असर पड़ रहा है। लोगों की दिनचर्या में भी परिवर्तन इसी कारण हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक ग्रीन सिटी के लिए वायु प्रदूषण का निर्धारित मापदंड 30 प्रतिशत है। जबकि शहर में अभी की स्थिति में वायु प्रदूषण डेढ़ गुना तक ज्यादा हो गया है। ऐसे में वाहनों से निकलने वाला धुंआ जिले के वातावरण में कार्बन मोनोआक्साइड और अन्य जहरीली गैसों को छोड़ रहा है।
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सालों से नहीं हुई जांच
शहर में प्रत्येक महीने वाहनों से प्रदूषण जांच की जानी चाहिए लेकिन खानापूर्ति के नाम पर जांच अभियान चलाया जाता है। नियमों के मुताबिक शहरी क्षेत्रो में स्टैंडर्ड 3 के आधार पर वाहनों से प्रदूषण होना चाहिए। शहरी क्षेत्र में यह जिम्मा यातायात पुलिस का है लेकिन एक साल में गिनती के वाहनों में प्रदूषण की जांच की है।

सांसों में घुल रहा जहरीला धुआं

शहरों में दौड़ रहे वाहनों से निकलने वाले धुएं से जिले में अस्थमा और दमा के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसका कारण भी वाहनों से निकलने वाला धुआं जो सीधे सांसों में जाता है अस्थमा और दमा जैसे रोगों को जन्म देता है। जिले में चार से पांच प्रतिशत लोग अस्थमा और दमा के मरीज हैं जिनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, इन रोगियों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही है।

इसलिए मनाते हैं
प्रति वर्ष मई के पहले मंगलवार को पूरे विश्व में अस्थमा दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1998 में की गई थी। इस दिन अस्थमा के रोगियों को अस्थमा नियंत्रित रखने के लिए प्रोत्साहित करने वाली गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।

ये है अस्थमा रोग की मुख्य वजह
बीएमसी के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एसके पिप्पल ने बताया कि हमारे शरीर में सांस नली का व्यास 2 से 3 सेंटीमीटर होता है। यह दो ब्रोंकाई में विभाजित होता है, जो दोनों फेफड़ों में जाकर फिर से विभाजित हो जाता है। इसमें सबसे छोटी नली का व्यास कुछ मिलीमीटर तक ही होता है। इसमें मांसपेशियां होती हैं, जो सिकुड़ती व फैलती रहती हैं। यदि ये मांसपेशियां सिकुड़ जाएं तो मरीज को सांस लेने में अत्यंत परेशानी होती है।

ऐसे बच सकते हैं इस बीमारी से
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. पिप्पल ने बताया कि अस्थमा का इलाज डॉक्टर से कराएं। इलाज के साथ ही इसके बढऩे के कारणों से बचें, तो ही फायदा हो सकता है। दमे का परीक्षण, फेफड़ों की जांच एवं एलर्जी के कारकों का पता लगाकर किया जाता है। रोगी को एलर्जी से मुक्त करने का उपचार किया जाता है। इससे भी दमा में आराम मिलता है। धूम्रपान न करें, कोई कर रहा हो, तो उससे दूर रहें, ठंड से एवं ठंडे पेय लेने से बचें।

वाहनो से निकलने वाला धुंआ नुकसान दायक होता है। यह सीधे फेफडो में प्रवेश करता है। जिसके कारण ही अस्थमा जैसी बीमारियां फैल रही है। जिले में लगातार अस्थमा के मरीज बढ़ रहे है।
डॉ. मनीष जैन, असिस्टेंट प्रोफेसर, बीएमसी

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आकाश तिवारी Desk
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