स्वच्छता अभियान का और एक कदम, तोड़ देगा मलेरिया का दम, ये कायम हुई मिसाल

विश्व मलेरिया दिवस आज

By: manish Dubesy

Published: 25 Apr 2018, 01:26 PM IST

सागर. जागरुकता बढऩे से मलेरिया के मरीजों की संख्या में भारी कमी आई है। इसे स्वच्छता अभियान का असर ही कहेंगे कि बीते चार साल में मलेरिया के मरीजों की संख्या १८६७ से घटकर ४६२ पर आ गई है। वहीं सरकारी रिकॉर्ड पर गौर करें तो २०१३ के बाद से जिले में एक मलेरिया से एक भी मौत नहीं हुई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग भी केवल सरकारी अस्पतालों से मिले आंकड़ों के आधार पर ही यह दावा कर रहा है। आज विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर हम आपको जिले की पूरी स्थिति से रूबरू करा रहे हैं।

६ प्रकार का मलेरिया
प्लामोडियस नामक प्रोटोजोवा परजीवी के कारण मलेरिया होता है। मलेरिया वैसे तो छह प्रकार का होता है, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में यह ४ प्रकार का पाया जाता है। इसमें प्लामोडियस बाइलैक्स, प्लामोडियस फेल्सी पैरम, प्लामोडियस ओवैली, प्लामोडियस मैलेरी शामिल है।
सागर जिले में
प्लामोडियस बाइलैक्स, प्लामोडियस फेल्सी पैरम मलेरिया के ज्यादा मरीज मिलते हैं। प्लामोडियस बाइलैक्स मलेरिया का इलाज तीन दिन में होता है, वहीं, प्लामोडियस फेल्सी पैरम मलेरिया का ट्रीटमेंट १४ दिनों तक चलता है।
अब स्लाइड नहीं किट जांच
पहले मलेरिया की जांच स्लाइड से होती थी। स्लाइड में संदिग्ध मरीज के खून का नमूना लैब में टेस्ट के लिए भेजा जाता है, जिसकी रिपोर्ट २-३ दिन में आती थी और इस बीच मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ जाती थी, लेकिन पिछले वर्षो में विभाग ने इसकी जांच के लिए एक रैपिड डायग्नोटिक किट का इस्तेमाल शुरू किया है। इससे १० मिनट में पता चल जाता है कि मरीज को मलेरिया है या नहीं।
ज्यादा मरीज मालथौन-बीना क्षेत्र में
खुरई, आगासौद, मालथौन और बीना शहरी क्षेत्र सबसे ज्यादा मलेरिया का प्रकोप है। जबकि सबसे कम शाहपुर, बण्डा, शाहगढ़ क्षेत्र में मलेरिया के मरीज पाए पाए जाते हैं।
ये होते हैं लक्षण
तेज बुखार, पसीना, ठंड और कंपकंपी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, जी मचलना, उल्टी, दस्त होना मलेरिया के लक्षण हैं।

मलेरिया के मरीजों में पिछले कुछ सालों में कमी आई है, इसका कारण गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और लोगों की जागरुकता है। साफ-सफाई का भी इसमें बड़ा योगदान कहा जा सकता है।
शाजिया तबस्सुम, मलेरिया अधिकारी

 

अब छवि सुधारने के लिए सोशल मीडिया का सहारा
सागर. स्वास्थ्य संस्थानों की छवि सुधारने के लिए विभाग अब सोशल मीडिया का सहारा लेगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल प्रबंधन को सराहनीय कार्य सोशल मीडिया में अपलोड करने के निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि अधिकारी ट्विटर हैंडल बनाकर प्रदेश स्तर के विभागों को भी फॉलो करें। फेसबुक और ट्विटर पर विभाग की सकारात्मक छवि बनाएं। विभाग ने अधिकारियों को वाट्सएप ग्रुप बनाकर अस्पताल या कॉलेज में हो रहे सराहनीय कार्यों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने लिए भी कहा है। इसके लिए अधिकारियों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
जिला चिकित्सालय में कई वाट्सएप ग्रुप चल रहे हैं, जिनमें अस्पताल की उपब्धियां और सराहनीय कार्य को शेयर किया जा रहा है। जल्द और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी जिला अस्पताल सक्रिय होगा।
इंद्रराज सिंह, सीएमएचओ
मेडिकल कॉजेल की वेबसाइट और फेसबुक अकाउंट पहले से अपडेट हो रहा है। वहीं अन्य प्लेटफार्म पर भी जल्द अपडेट किया जाएगा।
जीएस पटेल, डीन बीएमसी

manish Dubesy Desk
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