World population day : सागर जिले और शहर की आबादी पर कैसे हो नियंत्रण, जब सामने हों ऐसे आंकड़े

World population day : सागर जिले और शहर की आबादी पर कैसे हो नियंत्रण, जब सामने हों ऐसे आंकड़े

Samved Jain | Updated: 11 Jul 2019, 01:32:33 PM (IST) Sagar, Sagar, Madhya Pradesh, India

विश्व जनसंख्या दिवस 2019 : वर्ष 2031 तक 6 लाख के पार होगी सागर शहर की आबादी




सागर. आज विश्व जनसंख्या दिवस है। 2019 में सागर की जनसंख्या में 2018 से 10 प्रतिशत तक वृद्धि होना बताई गई है। जबकि पिछले पांच सालों में यह आंकड़ा 20 प्रतिशत तक हो जाता है। जनगणना 2011 के अुनसार सागर की जनसंख्या 23 लाख 78 हजार 295 थी। जबकि 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर अब 30 लाख के उस पार पहुंच गया है। जबकि सागर शहर की जनसंख्या 4 लाख पार हो चली है। हालांकि, अधिकारिक आंकड़े जनसंख्या द्वारा अब तक जारी नहीं किए गए हैं। आज जनसंख्या दिवस के मौके पर हम यह बात इसीलिए कर रहे हैं, क्योंकि जनसंख्या नियंत्रण ही हमारा मुख्य उद्देश्य है।

 

आज से 15-20 वर्ष पीछे जाएं तो हमारे शहर में कायापलट वाला ऐसा कोई विकास कार्य नहीं हुआ, जिस पर हम गर्व कर सकें। गलियां-सड़कें संकरी। सड़कों पर टहलते मवेशी। कटरा का दमघोंटू ट्रैफिक। पेयजल की समस्या। और हां, हमारी झील जिसे एक टूरिस्ट स्पॉट के रूप में डवलप किया जा सकता है, उसके हाल किसी से छिपे नहीं हैं। दरअसल, साल-दर-साल जनसंख्या तो बढ़ रही है, लेकिन उस रफ्तार से साधन-सुविधाएं नहीं। यदि विकास कार्यों की ऐसी ही कछुआ चाल रही तो इसका खामियाजा नई पीढ़ी को भुगतना होगा।

 

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या 23 लाख 78 हजार 295 थी। सागर शहर और ग्रामीण की जनसंख्या लगभग 2 लाख 74 हजार थी। एक अनुमान के अनुसार 2031 तक जनसंख्या 6 लाख के पार पहुंच जाएगी। जाहिर है कि इसी के साथ पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, रोजगार जैसी बुनियादों सुविधाओं की मांग भी बढ़ेगी।


पेयजल में शहर में पेयजल संकट लगातार ही बढ़ता जा रहा है। अभी एक दिन के अंतराल से पेयजल उपलब्ध हो रहा है। मास्टर प्लान के मुताबिक वर्तमान में 49 एमएलडी पेयजल की जरूरत होती है। वर्ष 2031 में यह जरूरत बढ़कर 59.2 एमएलडी होगी और 2048 में 70 एमएलडी हो जाएगी। सड़क में शहर की संकरी गलियों में दोपहिया और चार पहिया वाहन दौड़ रहे हैं। शोरूम संचालकों की मानें तो हर माह दो से तीन हजार नए वाहन सड़क पर आ रहे हैं। एक दशक पहले 60 हजार वाहन दौड़ते थे, जो अब बढ़कर दो लाख से ज्यादा हो गए हैं। पांच साल बाद यह संख्या बढ़कर तीन लाख पर पहुंच जाएगी।


एक दशक पहले जिला अस्पताल में एक बीमारी का एक ही स्पेशलिस्ट था। डॉक्टरों की संख्या लगभग 25थी, जो अब 50 के पास पहुंची है। यहां आइसीयू, एनआरसी वार्ड बढ़ा है। बीएमसी में मरीजों का इलाज 2009 से शुरू हो गया। यहां 750 पलंग का अस्पताल है। उन्होंने बताया कि बढ़ती जनसंख्या के अनुसार शहर में भी दिल्ली की तर्ज पर मोहल्ला क्लीनिक खोलने होंगे। जिन्हें सेक्टर के अनुसार बांटना होगा। जहां सामान्य बीमारियों का इलाज हो सके।


हर बच्चा स्कूल पहुंचे, इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन सुविधाओं की कमी से सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं। मध्याह्न भोजन, यूनिफॉर्म और साइकिल वितरण जैसी योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। जिले में 2300 प्राइमरी स्कूल संचालित हैं। इनमें आने वाले वर्षों में 230 स्कूल बंद होने जाएंगे। आबादी के मुताबिक स्कूलों को भी निजी की तरह सुविधाएं जुटानी होंगी।

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