कृषि बिल का विरोध: वेस्ट में फूटा किसानों का गुस्सा, जमकर प्रदर्शन, हाइवे रहे जाम

  • किसान आंदाेलन का असर वेस्ट में बंद रहे हाइवे
  • कृषि बिल के विराेध में किसानाें ने किया प्रदर्शन
  • सभी मुख्य हाइवे पर रहा किसानाें का कब्जा

By: shivmani tyagi

Updated: 25 Sep 2020, 07:31 PM IST

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क। कृषि बिल के विरोध में शुक्रवार को वेस्ट के किसानों ने आस्तीनें चढ़ा ली। गुस्साए किसानों ने हाइवे पर कब्जे कर लिए और ढोल नगाड़े बैठकर हाईवे पर ही बैठ गए। भारतीय किसान यूनियन के गढ़ मुजफ्फरनगर में 12 से अधिक स्थानों पर किसानों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली-हरिद्वार हाईवे, पानीपत-खटीमा हाईवे, मेरठ-करनाल हाईवे, मुजफ्फरनगर सहारनपुर हाईवे और मुजफ्फरनगर बुढ़ाना मार्ग पूरी तरह से मुजफ्फरनगर के किसानों के कब्जे में रहे। सहारनपुर में किसानों ने सहारनपुर दिल्ली हाईवे सहारनपुर अंबाला हाईवे और सहारनपुर देहरादून हाईवे को जाम करके प्रदर्शन किया और हाईवे पर ही ट्रैक्टर ट्रालियां लगा दी। यहां भारतीय किसान यूनियन के अलग-अलग संगठनों ने प्रदर्शन करते हुए हाईवे जाम कर दिए।

मेरठ में भी किसान सुबह से ही सड़कों पर उतर आए। गुस्साए किसानों ने अपने पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार दिल्ली हाईवे, हरिद्वार हाईवे, बागपत हाईवे और हरियाणा हाईवे जाम करते हुए किसानों ने जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान फोर्स भी तैनात रही। ट्रैक्टर ट्रॉली या हाईवे पर लगा दी और दरी बिछाकर हाईवे पर ही बैठ गए। इसी तरह से बिजनौर में गुस्साए किसानों ने 12 से अधिक स्थानों पर जाम लगाया और शामली में भी आठ जगहों पर प्रदर्शन करते हुए किसानों ने साफ कह दिया कि अगर सरकार इस बिल को वापस नहीं लेती तो उनका आंदोलन उग्र रूप लेगा। नोएडा में गुस्साए किसानों ने दिल्ली बॉर्डर और यूपी गेट को दो हिस्सों में बांट दिया और सारे रास्ते बंद कर दिए। इस दौरान यूपी और दिल्ली पुलिस ने आपसी कम्युनिकेशन के तहत रूट डायवर्ट करने की काफी कोशिशें की लेकिन लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। यहां भी किसानों ने हाइवे पर कब्जा कर लिया और जमकर प्रदर्शन किया।

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दरअसल किसान कृषि बिल का विराेध कर रहे हैं। किसानों ने 25 सितंबर को जाम का एलान किया था। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि अध्यादेश के विरोध में किसानों ने जगह-जगह जाम लगाते हुए प्रदर्शन कर धरना दिया और सरकार से अध्यादेश वापस लेने या फिर यह गारंटी देने की मांग की है कि कोई भी व्यापारी न्यूनतम मूल्य से से कम दाम पर किसानों की फसल की खरीद नहीं करेगा। अगर ऐसा होता है तो उस व्यापारी के खिलाफ अपराधिक मुकदमे दर्ज होने चाहिए। इन्ही मांगाें काे लेकर अपने पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार किसानों ने वेस्ट के सभी जिलों में जाेरदार प्रदर्शन किया। शुक्रवार काे किसानों का यह आंदोलन शांतिपूर्वक रहा लेकिन किसानाें ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह सिर्फ एक ट्रेलर था यदि बिल काे ठीक नहीं किया गया तो वह यह आंदाेलन अब उग्र रूप भी लेगा।

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शामली में कृषि विधेयक के विरोध में भारतीय किसान यूनियन समेत विभिन्न किसान संगठनो ने जाम लगा दिया। जिले में कुल आठ स्थानों पर जाम लगाया गया। हालांकि एंबुलेंस, प्रशासन, पुलिस और अन्य जरूरी सेवा के वाहनों को किसानो ने नहीं रोका। यहां किसानाें ने गुरुद्वारा तिराहा, थानाभवन, झिझाना, मेरठ-करनाल हाइवे और कैराना में जाम किए रखा। किसानाें ने साफ शब्दों में कह दिया कि, सरकार को किसानों की कोई चिता नहीं है। तीनों विधेयक लाने में इतनी जल्दबाजी आखिर क्यों की गई ? सांसदों की आवाज भी दबाई गई। सरकार के खिलाफ किसान आक्रोशित और लामबंद हैं।

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नोएडा में गुस्साए किसानों ने दिल्ली बॉर्डर और यूपी गेट को दो हिस्सों में बांट दिया और सारे रास्ते बंद कर दिए। इस दौरान यूपी और दिल्ली पुलिस ने आपसी कम्युनिकेशन के तहत रूट डायवर्ट करने की काफी कोशिशें की लेकिन लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। यहां भी किसानों ने हाइवे पर कब्जा कर लिया और जमकर प्रदर्शन किया। किसानाें ने साफ कह दिया कि अब उनका यह आंदाेलन रुकने वाला नहीं है।

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नाेएडा और गाजियाबाद में किसानाें ने यूपी गेट पर जुटकर रास्ते बंद कर दिए। इस तरह किसानाें का जाम एक सफल रहा। किसानाें का यह आंदाेलन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ लेकिन किसानों ने कह दिया कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई ताे फिर आंदाेलन काे उग्र रूप दिया जाएगा। गाजियाबाद में किसानाें ने दिल्ली हाइवे पर कब्जा कर लिया। ट्रैक्टर ट्राली लेकर किसान हाइवे और मुख्य रास्तों पर बैठ गए।

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सहारनपुर में सुबह से ही किसानों ने हाइवे पर कब्जा कर लिया। नागल में किसानाें ने दिल्ली-हरिद्वार हाइवे पर ट्रैक्टर लगा दिए। इसकेे अलावा बेहट, रामपुर मनिहारान, देवबंद, गंगाेह आदि में भी किसानों ने जमकर प्रदर्शन किया। इस दाैरान किसान ढोल नगाड़ों के साथ पहुंचे थे। बीच हाइवे ट्रैक्टर-ट्रालियां लगाकर किसानाें ने ढोल बजवा दिए और सरकार काे बहरी बताते हुए अपनी आवाज इस तरह सरकार के कानाें तक पहुंचाने की बात कही।

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भाकियू के गढ़ मुजफ्फरनगर में विराेध कर रहे किसानों ने दिल्ली हरिद्वार हाईवे पर तीन जगह और पानीपत खटीमा हाईवे पर दो जगह कब्जा कर लिया। ढोल नगाड़े बजाते हुए किसान हाइवे पर ही बैठ गए ।दोपहर बाद तक किसानों का प्रदर्शन चलता रहा और इस दौरान हाइवे पर जाम रहा जिससे आने जाने वालों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।

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बिजनाैर में गुस्साए किसानों के आधा दर्जन से ज्यादा संगठनों ने 20 से अधिक स्थानों पर रास्ता जाम किया। सरकार विरोधी नारे लगाए किसानों ने दिल्ली पौड़ी नेशनल हाईवे पर भी कई स्थानों पर जाम लगाया। इस जाम के चलते नेशनल हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी लंबी लाइनें लग गई।

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मेरठ में किसानाें ने किसानों के इस विरोध को विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला। भारतीय किसान यूनियन, अखिल भारतीय किसान संघ, किसान व मजदूरों के संगठन के साथ विपक्षी नेता भी जाम प्रदर्शन में शामिल हुए। किसानाें ने मुजफ्फरनगर, बिजनौर, हापुड, बुलंदशहर, सहारनपुर काे जाने वाले सभी रास्तों पर जाम लगाया। हाइवे पर किसानों ने सरकार की नीतियों का तानाशाही पूर्ण नीति बताते हुए जमकर पराली जलाकर विरोध जताते हुए सरकार विरोधी नारेबाजी की।

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बागपत में किसानाें ने जमकर हंगामा किया। हुक्का लेकर किसान हाइवे पर बैठ गए और साफ कह दिया कि किसी भी कीमत पर किसानाें का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं हाेगा। किसानाें ने यहां ढोल नगाड़ों के साथ मनाेरंजन के साथ प्रदर्शन किया।

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