अब पड़ेगी प्रदूषण की असली मार, पराली के बाद जलने वाली है एक साथ इतने क्विंटल लकड़ी

अब पड़ेगी प्रदूषण की असली मार। पराली के बाद जलने वाली है एक साथ क्विंटलों लकड़ी।

By: Ashutosh Pathak

Updated: 10 Nov 2017, 06:56 PM IST

सहारनपुर। दिल्ली- एनसीआर में भले ही प्रदूषण से थोड़ी राहत मिली हो, लेकिन इसका विकारल रूप अब सहारनपुर में मंडरा सकता है। दरअसल, यहां गागलहेड़ी कस्बे में हिंडन किनारे महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस महायज्ञ में 100 हवन कुंडों में 50 क्विंटल से अधिक लकड़ी जलेगी और इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी के जलने से उठने वाला धुंआ कोहरे के साथ मिलकर वातावरण को प्रदूषित कर सकता है। लेकिन, सवाल ये है कि बगैर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के इतना बड़ा आयोजन हो रहा है और प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान तक नहीं दिया।

 

alert 50 quintel wood to burn after Parali

9 दिन तक चलेगा हवन

हिंडन किनारे यह महायज्ञ 9 दिनों तक चलेगा और इस दौरान कई क्विंट सामग्री की आहुति की जाएगी। इतनी सामग्री की आहुति के लिए करीब 50 क्विंटल लकड़ी इस्तेमाल होने की उम्मीद जताई जा रही है। इतनी लकड़ी से निकलने वाला धुंआ कोहरे के कारण आसमान में नहीं फैल पाएगा और कोहरे के साथ मिलकर यह स्मॉग यानि दिल्ली-एनसीआर जैसे हालात यहां पैदा कर सकता है।

 

क्या कहते हैं पर्यावरण विद

पर्यावरण विद डॉक्टर एसके उपाध्याय मानते हैं कि जिस तरह का अभी माहौल है, ऐसे में इतने बड़े हवन का आयोजन वातावरण के लिए ठीक नहीं है। उनका कहना है कि दिवाली पर पटाखों पर रोक सिर्फ इसलिए लगाई गई थी कि धुंआ ना हो, हवन में ही धुंआ निकलता है। हवन के दौरान जब लकड़ी जलती है तो लकड़ी के जलने से जो धुंआ निकलता है वह वातावरण में फैलता है। वर्तमान में जो वातावरण के हालात हैं, यदि ऐसे में धुंआ उठता है तो वह वातावरण में नहीं फैलेगा और कोहरे में मिलकर वातावरण में सस्पेंडिड पर्टिकूलेट मैटर की मात्रा को बढ़ा देगा। इसलिए, इतने बड़े हवन यज्ञ का किसी भी तरह से उचित नहीं है।

 

 

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क्या कहते हैं प्रदूषण नियत्रण बोर्ड के अधिकारी

क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी विवेक रॉय मानते हैं कि वर्तमान हालात में इस स्तर का आयोजन वातावरण में धुएं की मात्रा को बढ़ा देगा और इससे काफी दिक्कतें आएंगी। उनका यह भी कहना है कि इस तरह के आयोजन से पहले क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेनी चाहिए। लेकिन, हमारे पास इस तरका कोई मामला सामने नहीं आया है।


इतनी सामग्री लगने जा रही है इस महायज्ञ में

इस कार्यक्रम को हरि कॉलेज ऑफ इंस्टीट्यूशन के प्रबंधन की ओर से कराया जा रहा है। आयोजकों से मिली जानकारी के मुताबिक, 9 दिन तक चलने वाले इस महायज्ञ के लिए 100 हवन कुंड बनाए गए हैं। महायज्ञ में करीब 150 क्विंटल तिल, 100 टिन देशी घी, एक क्विंटल मेवा और सुगंधित पदार्थ का उपयोग किया जाएगा।

Ashutosh Pathak
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