हाजी इकबाल इस्लाम छोड़ें, हवन में आहुति देकर मजहब से हुए बेदखल: मुफ्ती

हवन में आहुति पर उठा विवाद, देवबंद उलेमाआें ने बसपा के पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल को कलमा पढ़ने आैर ताैबा करने की दी सख्त हिदायत।

By: pallavi kumari

Published: 24 Oct 2017, 10:40 AM IST

सहारनपुर/देवबंद. आयुर्वेद दिवस के पर पर ग्लोकल यूनिवर्सिटी में पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल के हवन में आहुति देने की वायरल हुई फाेटाे पर देवबंदी उलेमाओं ने उन्हें तौबा करने की हिदायत दी है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा है कि वह कलमा ना पढ़ें, क्योंकि इस्लाम में ये साफ कहा गया है कि अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं की जा सकती, इसलिए उन्हें तौबा करना चाहिए।

आपको बतादें कि वाराणसी में मर्यादा पुरुषाेत्तम श्री राम की आरती में मुस्लिम महिलाआें के शामिल हाेने के बाद अब नया मामला बसपा के पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल का सामने आ रहा है। हाजी इकबाल का एक फाेटाे वायरल हुआ है। जिसमें वह हवन करते हुए दिख रहे हैं। हाजी इक़बाल का हवन में आहुति देते हुए फोटो वायरल होने के बाद उलेमा-ए-कराम ने दो टूक कहा है कि इस्लाम मजहब दूसरे मजहब के पेशवाओं की इबादत करने की मनाही है और जो लोग किसी दबाव में या अपनी खुशी से कर रहे हैं वह स्वंय इस्लाम मजहब से खारिज हैं।

देवबंदी उलेमाओं ने कहा कि इस्लाम का कानून पूरी दुनिया में औरत हो या मर्द सबके लिए समान है और जो लोग अल्लाह के सिवा किसी दूसरे मजहब की इबादत करते हैं वह मजहब से खारिज हैं। उलेमाओं ने कहा कि अगर हाजी इकबाल ने ऐसा किया है तो उन्हें तौबा कर अपने गुनाह की माफी मांगनी होगी और पुन इस्लाम में शरीक होने के लिए कलमा पढ़ना होगा।

गैर शरियत काम किया हाजी इकबाल ने
मुफ्ती मौलाना शरीफ ने यह भी कहा है कि बसपा के पूर्व एमएलसी हाजी इक़बाल गैर शरीयत काम किया है। इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी अन्य की पूजा या आरती करना मनाही है। ऐसे में हाजी इकबाल स्वतः ही इस्लाम से खारिज हो जाते हैं। इससे पहले देवबन्दी मुफ़्ती ने वाराणसी की महिलाओं के इस्लाम से खारिज होने की बात कही थी अब हाजी इक़बाल का फोटो वायरल पर मुफ़्ती ने कहा है कि पुरुष हो या महिला दोनों पर यह बात एक ही तरह से लागू होती है।

हाजी इकबाल का कहना

हालांकि इस मामले में हाजी इकबाल का कहना है कि भारत सरकार का सर्कुलर आया था कि जितने भी आयुर्वेदिक कॉलेज हैं, उनमें धनतेरस दिन आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाया जाएगा और हवन भी कराया जाए। इसीके अनुपालन में वह यज्ञ में शामिल हुए थे। साथ फैकल्टी को उपहार भी दिए थे।

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