असहयोग आंदाेलन के लिए देवबंद की महिलाओं ने गहने तक उतारकर दे दिए थे 'बापू' को

  • कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर ने किया थाा आग्रह
  • देवबंद में हुआ था उस समय बहुत बड़ा जलसा
  • महिलाओं ने अपने गहने तक कर दिए थे भेंट
  • भीड़ ने रुपयों से भरी थैली भेंट की थी बापू को

By: shivmani tyagi

Updated: 03 Oct 2020, 05:10 PM IST

सहारनपुर ( Deoband ) बात 1929 की है। उन दिनों असहयोग आंदोलन चल रहा था और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ( Mahtma Gandhi ) हरिद्वार गए थे। कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर के आग्रह पर वह इल्म की नगरी देवबंद आए जहां उन्हे सुनने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी थी। कस्तूरबा गांधी भी बापू ( bapoo ) के साथ थी। उस समय लाेगों ने बापू ( Bapu ) काे रुपयों से भरी थैली भेंट की थी और महिलाओं ने अपने गहने तक उतारकर कस्तूरबा गांधी काे दे दिए थे।

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महात्मा गांधी जयंती पर हम आपकाे बता रहे हैं कि, महात्मा गांधी का प्रभाव ऐसा था कि उस समय जब वह देवबंद पहुंचे तो जनता के पास जाे कुछ था बापू काे भेंट कर दिया। इस तरह नोटों की एक थैली भर गई। सिर्फ पुरूष ही नहीं महिलाओं तक ने अपने गहने उतारकर भेंट कर दिए और कहा था कि अपने आंदोलन पर डटे रहिए। देवबंद के लोगों ने असहयाेग आंदाेलन से जुड़ने का आश्वासन भी दिया था।

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यह बातें वर्ष 1929 की हैं। उन दिनों महात्मा गांधी हरिद्वार में थे। नरदेव शास्त्री भी उनके साथ थे। पंडित जगदीश चंद्र बताते हैं कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर उनसे मिलने के लिए हरिद्वार गए उनके साथ वह भी गए थे। हरिद्वार में नरदेव शास्त्री से उन्हाेंने मुलाकात की और बापू काे सहारनपुर बुलाया। इस तरह अगले दिन बाबू उनके साथ सहारनपुर आ गए।

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सहारनपुर पहुंचने पर कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर ने उनसे देवबंद आने का भी आग्रह किया लेकिन आचार्य कृपलानी ने इंकार कर दिया। उन्हाेंने कहा कि बापू के प्राेग्राम में काेई बदलाव नहीं हाे सकता लेकिन यह बातें बापू ने सुन ली और बापू ने हंसते हुए कहा कि वह कल यहां से 2:00 बजे की गाड़ी से देवबंद आएंगे।

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इस तरह वह ऐतिहासिक पल आया और 28 अक्टूबर 1929 को गांधीजी देवबंद पहुंचे। उनके देवबंद पहुंचने पर एक बहुत बड़ा जलसा आयोजित हुआ जिसमें हजारों की संख्या में लोग जुटे। उन सभी लोगों ने असहयोग आंदोलन में भागीदारी लेने का आश्वासन दिया और 1500 रुपए की नोटों से भरी थैली बापू को भेंट की गई।

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उस समय बापू और कस्तूरबा गांधी को सुनकर सभी इतने भाव विभोर हो गए की महिलाओं ने अपने गहने तक उतार कर कस्तूरबा गांधी को दे दिए थे। इस तरह देवबंद में कांग्रेस आंदोलन को काफी बल मिला था।

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