ट्रिपल तलाक मुद्दाः दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम बोले हमारे मजहबी मामलों में हस्तक्षेप ना करे कोर्ट और संसद

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दारूल उलूम के मोहतमिम ने साफ किया अपना नजरिया, बोले इस मुद्दे पर हम मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ

By: Iftekhar

Published: 22 Aug 2017, 10:41 PM IST

 सहारनपुर. ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दारूल उलूम देवबंद ने अपना रुख साफ कर दिया है। दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती अबुल कासिम नौमानवी ने कहा है कि ट्रिपल तलाक हमारा मजहबी मामला है। इसमें संसद और न्यायालय को दखल अंदाजी नहीं करनी चाहिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में हम मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का फैसला आने के बाद ही वह इस मामले में कोई टिप्पणी करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल तलाक पर आए फैसले के बाद पूरे देश में ट्रिपल तलाक को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। एक ओर जहां पीड़ित महिलाएं इस फैसले का स्वागत कर रही हैं। वहीं, देवबंद की महिलाओं ने कहा है कि हम देवबंदी उलेमाओं के साथ हैं और ट्रिपल तलाक पूरी तरह से खत्म नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इस्लामिक शिक्षा का केंद्र देवबंद दारुल उलूम का क्या रुख है। यह जानने के लिए जब दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है। उसे पूरी तरह से पढ़ने और समझने की जरूरत है। अभी तक सुनी सुनाई बातें सामने आ रही हैं, पूरे फैसले को पढ़ने के बाद ही ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है। इसका पता चल पाएगा। इसके बाद ही कोई राय दी जा सकती है।

ये बोले नौमानी
पहली बात तो यह है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पहले तफ्सील से देख लें, अभी क्या पूरा फैसला है इसका पता नहीं चला है। यह अलग बात है कि, हम अपने पुराने बयान पर स्थिर हैं कि तीन तलाक शरियत का मसला है। इसमें अदालत या पार्लियामेंट को दखल नहीं देना चाहिए। अब जो फैसला आया है, उसमें हमें क्या करना है। इसके लिए हम मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं। इस मसले पर हमारी वही राय रहेगी जो मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की होगी। उन्होंने साफ कह दिया कि उससे अलग हम कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। इस मसले पर हम मुस्लिम पर्सनल लॉ के साथ हैं।

ये भी दी राय
दारुल उलूम के मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने एक सवाल के जवाब में कहा,यानि शुरु में तो जो एक जज का निर्णय आया तो उससे लगा था कि अदालत ने इस मामले में दखल नहीं दिया है, लेकिन दूसरे जज का फैसला आया तो भी हस्तक्षेप हल्का था, लेकिन जब तीन जजों का फैसला एक साथ आया तो ऐसा लगा कि हमारा जो रुख था फैलला उसके खिलाफ है। दरअसल, अभी फैसले की बातें टुकड़ों में आ रही है। पहले हम पूरा फैसला देख लें उसके बाद ही कोई टिप्पणी करेंगे।

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