Sharadiya Navratri : जानिए पूजा विधि और कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त

Highlights

  • Sharadiya Navratri में कलश स्थापन बेहत महत्वपूर्ण
  • शनिवार सुबह 09:14 से 10:40 तक रहेगा राहू काल

By: shivmani tyagi

Updated: 16 Oct 2020, 09:59 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क, सहारनपुर। शनिवार 17 अक्टूबर 2020 यानि शनिवार से शारदीय नवरात्र शुरू हाे रहे हैं। 9 दिनाें तक चलने वाले नवरात्र में हर दिन मां के अलग-अलग रूपों की अराधना की जाएगी। वर्ष में चार बार नवरात्र हाेते हैं। शनिवार से शुरू हाेने वाले नवरात्रों काे शारदीय नवरात्र कहा जाता है। आईए जानते हैं शारदीय नवरात्र में कैसे मां भगवती की पूजा करनी चाहिए।

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नवरात्र में भगवती मां के 9 रूप हैं। प्रथम नवरात्र काे वह शैलपुत्री हैं। दूसरे नवरात्र काे देवी ब्रह्मचारिणी हैं। तीसरे नवरात्र काे देवी चंद्रघंटा हैं। चौथे नवरात्र काे देवी कुष्मांडा हैं। पांचवे नवरात्र पर देवी स्कंदमाता हैं। छठे नवरात्र काे देवी कात्यायनी हैं। सातवे नवरात्र काे देवी कालरात्रि हैं। आठवे नवरात्र काे देवी महागौरी हैं और नौवें नवरात्र काे देवी सिद्धिदात्री हैं।

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इस तरह 9 दिनों में भगवती के 9 रूपों की पूजा हाेती है। शारदीय नवरात्र में मां भगवती की पूजा अर्चना करने से सुख -शांति एवं आनंद की प्राप्ति हाेती है। भगवती के नाम एवं रूप अलग अलग हैं लेकिन इनका संबंध वास्तव में भगवती माता पार्वती से है। माता पार्वती ही अलग अलग समय में अपने भक्तों के कल्याण के लिए अलग-अलग रूप धारण कर संसार में प्रकट होकर लीला करती हैं। ऐसा माना जाता है कि, श्री गणेश जी की माता पार्वती की पूजा करने से मनुष्य को समस्त मनोवांछित फल की प्राप्ति हो जाती है।

ऐसे करें पूजा अर्चना

सर्वप्रथम पूजा के लिए स्थान का चयन करें। वह स्थान पवित्र होना चाहिए। पूर्व दिशा पूजा के लिए शुभ मानी जाती है। भगवती की पूजा में उपयोग की जाने वाली सामग्री का संग्रह सावधानीपूर्वक करना चाहिए। शुभ स्थान, शुद्ध भाव से पवित्र वस्तुओं से विधिपूर्वक की गई पूजा फल प्रदान करती है। शास्त्रों के अनुसार भगवती की पूजा योग्य ब्राह्मण से करानी चाहिए लेकिन आप खुद भी पूजा कर सकते हैं। देवी भागवत में कहा गया है कि भगवती का आवाहन एवं विसर्जन प्रातः काल ही करना चाहिए। आचार्य पंडित राहित वशिष्ठ के अऩुसार भगवती के पूजा में कलश स्थापन, ज्योति स्थापन के लिए सुबह का समय उपयुक्त माना जाता है।

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पूजा की सामग्री अपने सम्मुख रखकर सबसे पहले अपने पूजा घर में पूरब और उत्तर के कोने में रेत या मिट्टी में जौं बोयें उसके ऊपर जल से भरा हुआ कलश रखें। कलश में एक सुपारी दो लोंग दो इलायची, दूर्वा ( घास) एक जायफल, एक पान का पत्ता, एक आम की टहनी, हल्दी रोली एवं गंगाजल डालें। आम के पत्ते कलश के ऊपर रखें। आम के पत्तों की संख्या 5,7,9 या 11 होनी चाहियें। एक पात्र में चावल भरकर कलश के ऊपर रखें। नारियल के ऊपर लाल चुनरी लपेटकर उसमें कुछ दक्षिणा रखें। नारियल कलश के ऊपर इस प्रकार रखें कि नुकीला भाग पूरब की ओर हो। भगवती की पूजा करने से पहले गणेश जी की पूजा, नवग्रह की पूजा, कलश की पूजा एवंं ज्योति की पूजा करनी आवश्यक है। इसके बाद ही जगदम्बा की पूजा की जाती है। एक पुष्प श्री गणेश जी को अर्पण कर गणेश जी को नमस्कार करें। एक पुष्प नवग्रह का ध्यान करते हुए अर्पण करें। चोकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर माँ भगवती की मूर्ति या फोटो इस प्रकार स्थापित करें कि भगवती का मुख पश्चिम की ओर हो। मां को एक चुनरी अर्पण करें । यदि संभव हो 9 दिन के लिए अखंड ज्योत रखें। घर में मां जगदंबा की ज्योति स्थापन करने के बाद घर को खाली नहीं छोड़ा जाता। घर में किसी ना किसी व्यक्ति का होना आवश्यक है। यदि ऐसा संभव नहीं है तो अखंड ज्योत न जलाकर केवल पूजा के समय भी जोत जलाई जा सकती है।

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अखंड ज्योत के लिए शुद्ध देसी घी, तिल का तेल, अथवा सरसों का तेल प्रयोग करना उचित रहता है। मां के सम्मुख दीपक जलाकर लाल पुष्प लेकर के भगवती दुर्गा का ध्यान करें। पुष्प माँ के चरणों में अर्पण करें। माँ को वस्त्र चढ़ाएं वस्त्र के रुप में लाल चुनरी चढ़ाना उपयुक्त है। मां को रोली से तिलक करें और अक्षत चढ़ाएं। एक लाल फूल भी मां को चढ़ाएं। मां को धूप दीप दिखाएं भगवती को मावे से बना भोग अर्पण करें। मां को दो लाल फल चढ़ाएं । पान अर्पण करें, पान के साथ दो लौंग दो इलायची और एक सुपारी भी चढ़ा सकते हैं। मां के चरणों में दक्षिणा अर्पण करें और लाल पुष्प लेकर के मां से प्रार्थना करें। प्रार्थना करते समय यह मंत्र बोले

या देवी सर्वभूतेषु
मातृरुपेण संस्थिता:।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः ।।

इन बातों का रखें ध्यान

मां भगवती की आराधना करते समय मन में सात्विक भाव रखना अत्यंत आवश्यक है । क्रोध को त्याग कर, काम आदि विकारों को अपने से दूर कर, संसार की समस्त स्त्रियों के प्रति आदर भाव रखें। दुर्गा सप्तशती में कहा गया है। भोजन में भी सात्विकता रखें। नवरात्र में यदि संभव हो फलाहारी भोजन करें। लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा आदि तामसिक वस्तुओं का सेवन ना करें।

शनिवार 17 अक्टूबर को कलश स्थापन करने का समय

प्रातः 7:52 से 9:10 तक

प्रातः 9:14 से 10: 40 तक राहु काल रहेगा

अतः इस बीच कलश स्थापन न करे।

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