86 साल पहले तबाह हुए पुल का अब जाकर किया निर्माण, पीएम करेंगे उद्घाटन

(Bihar News ) सरकारी तंत्र (Government machinery ) के काम करने का तरीका भी अजब-गजब है। करीब 86 साल पहले तबाह हुए एक रेलवे पुल (Rail bridge constructed after 86 year ) अब जाकर बनाया गया है। कोसी नदी (Bridge on Kosi river ) पर बनाए इस पुल का 18 सितंबर को उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। इस पुल के निर्माण से 298 किमी की दूरी मात्र 22 किमी में सिमट जाएगी।

By: Yogendra Yogi

Published: 15 Sep 2020, 06:44 PM IST

समस्तीपुर(बिहार): (Bihar News ) सरकारी तंत्र (Government machinery ) के काम करने का तरीका भी अजब-गजब है। करीब 86 साल पहले तबाह हुए एक रेलवे पुल (Rail bridge constructed after 86 year ) अब जाकर बनाया गया है। कोसी नदी पर बनाए इस (Bridge on Kosi river ) पुल का 18 सितंबर को उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। इस पुल के निर्माण से 298 किमी की दूरी मात्र 22 किमी में सिमट जाएगी। कोसी महासेतु पुल पर 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ सकेगी। वहीं पुल के बाहर गति सीमा 100 किमी प्रति घंटे रखी गयी है।

1934 में भूकंप में टूटा था
बिहार में वर्ष 1934 में आए भूकंप के दौरान कोसी नदी पर बना रेल पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके साथ ही उत्तर और पूर्व बिहार के बीच का रेल संपर्क टूट गया था। बाद के दिनों में दोनों इलाकों के बीच रेल संपर्क कायम तो हुआ, लेकिन कोसी नदी पर पुल निर्माण का कार्य अटका ही रहा। इस कारण दरभंगा और मधुबनी को सीधे सुपौल व सहरसा से जोडऩे वाला मार्ग बंद था। वर्ष 2003 में 6 जून को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस दिशा में पहल की और कोसी नदी पर रेल पुल की नींव रखी गई। अब कहीं 16 साल बाद यह पुल बनकर तैयार हुआ है, जिस पर कुछ दिनों के बाद ट्रेनों का परिचालन शुरू होगा।

पुल की कुल लंबाई 1.88 किलोमीटर
निर्मली से सरायगढ़ तक का सफर वर्तमान में दरभंगा-समस्तीपुर-खगडय़िा-मानसी-सहरसा होते हुए 298 किलोमीटर का है। कोसी पुल को सरायगढ़ की ओर से रेलवे ट्रैक से जोड़ दिया गया है। 10 जनवरी को मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, निर्माण बृजेश कुमार ने पहली बार मोटर ट्रॉली से पुल का निरीक्षण भी किया। नए कोसी पुल की कुल लंबाई 1.88 किलोमीटर है और इसमें 45.7 मीटर लंबाई के ओपनवेब गर्डर वाले 39 स्पैन हैं। इस रेलखंड पर डेमू ट्रेन का परिचालन कर ट्रायल भी समस्तीपुर रेल मंडल की ओर से लिया गया था। 1.9 किमी लंबे नये कोसी महासेतु सहित 22 किमी लंबे निर्मली-सरायगढ़ रेलखंड का निर्माण 2003-04 में 323.41 करोड़ की लागत से स्वीकृत किया गया था।

1887 में मीटर गेज थी
परियोजना की अद्यतन अनुमानित लागत 516.02 करोड़ है। 23 जून, 2020 को इस नवनिर्मित रेल पुल पर पहली बार ट्रेन का सफलतापूर्वक परिचालन किया गया। वर्तमान पुल का निर्माण निर्मली एवं सरायगढ़ के बीच किया गया है। निर्मली जहां दरभंगा-सकरी-झंझारपुर मीटर गेज लाइन पर अवस्थित एक टर्मिनल स्टेशन था, वहीं सरायगढ़, सहरसा और फारबिसगंज मीटर गेज रेलखंड पर अवस्थित था। 1887 में बंगाल नॉर्थ-वेस्ट (North-West railway ) रेलवे ने निर्मली और सरायगढ़ (भपटियाही) के बीच एक मीटर गेज रेल लाइन का निर्माण किया था। उस समय कोसी नदी का बहाव इन दोनों स्टेशनों के मध्य नहीं था। उस समय कोसी की एक सहायक नदी तिलयुगा इन स्टेशनों के मध्य बहती थी। उसके ऊपर लगभग 250 फुट लंबा एक पुल था।

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