बिहार बोर्ड रिजल्टः फिर सवालों के घेरे में आया आर्ट्स टॉपर

बिहार बोर्ड को सुधारने की बड़ी कवायद के बावजूद क्या इस बार भी सूबे में इंटर टॉपर घोटाला हुआ?...

समस्तीपुर। बिहार बोर्ड को सुधारने की बड़ी कवायद के बावजूद क्या इस बार भी सूबे में इंटर टॉपर घोटाला हुआ? यह सवाल आर्ट्स टॉपर गणेश कुमार की असलियत से उठ खड़ा हुआ है। दो दिनों बाद वह मीडिया से रूबरू हुआ तो गत वर्ष की टॉपर रूबी राय की ही तरह अटपटे जवाब देकर सवालों को गहरा कर गया। शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी उसका बचाव करते मिले। कहा कि उससे सवाल करने वलो क्या विशेषज्ञ हैं।

जगदीप नारायण उच्च माध्यमिक विद्यालय, चकहबीब, ताजपुर, समस्तीपुर से परीक्ष्ज्ञा देने वाले गणेश कुमार को यह नहीं पता कि संगीत के कौन-कौन से घराने हैं। उसने संगीत विषय से परीक्षा दी जबकि विद्यालय में म्यूजिक का कोई सामान तक नहीं। उसे प्रैक्टिकल में ७० में से ६५ और ३० अंकों की थ्योरी में 18 अंक मिले। हिन्दी में १०० में से ९२ अंक मिले हैं। गणेश मीडिया के समक्ष एक गीत भी नहीं गा पाया। उसे यह भी नहीं पता कि राग भैरवी क्या होती है और मैथिली संगीत में पद्म विभूषण पुरस्कार पाने वाली कौन गायिका हैं।

विद्यालय का पता नहीं
गणेश ने जिस स्कूल से फॉर्म भरा उसके बारे में शिक्षा पदाधिकारी को भी नहीं मालूम। प्रधानाध्यापक रामानंद सिंह को नहीं पता कि सूबे के राज्यपाल कौन हैं। अजीत तरह के 6 कमरों वाले फटेहाल इस स्कूल में कोई प्रशिक्षित शिक्षक तक नहीं है। शिक्षक अभिषेक सिंह को यह भी नहीं पता कि उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी हैं या हामिद करजई?

फिर भी इस स्कूल के गणेश ने आर्ट्स में टॉप करते हुए 500 में 413 अंक हासिल किए। उसने मीडिया से कहा भी कि समयाभाव के कारण वह पूरी तरह पढ़ नहीं पाया। उसे फर्स्ट आने की उम्मीद थी पर टॉप करने की नहीं।

कई तरह के संदेह
गणेश कुमार झारखंड के गिरिडीह के सरीया का रहने वाला है। वहां से वह समस्तीपुर के साधनहीन स्कूल में क्यों पढऩे आया यह संदेह पैदा करता है। उसकी उम्र भी सामान्य से अधिक है। उसने अपनी उम्र २४ साल बताई। विद्यालय परित्याग प्रमाण-पत्र में जन्म तिथि २ जून १९९३ अंकित है।

वह समस्तीपुर में किराए पर अकेला रहते हुए 22 कि.मी दूर साधनहीन स्कूल मेंपढऩे क्या आया यह भी संदेह पैदा करने वाला है। वर्ष २०१५ में उसने जिले के शिवाजी नगर प्रखंड स्थित संजय गांधी उच्च विद्यालय से ३३० अक लेकर उसने मैट्रिक पास किया। अब टॉपर होकर भी एक अदद नौकरी की इच्छा रखता है। उसे लेकर मीडिया में शिक्षामंत्री की बौखलाहट भी कई संदेह पैदा करती है।
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Shribabu Gupta
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