लालू यादव की पार्टी को तगड़ा झटका, नाराज कद्दावर राजपूत नेता रघुवंश प्रसाद का इस्तीफा

(Bihar News ) राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद (Raghuvansh Prasad resign ) सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली एम्स में भर्ती रघुवंश प्रसाद सिंह ने (Big blow to RJD ) आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को संबोधित करते हुए लिखा है कि जननायक कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद 32 वर्षों तक आपके पीछे-पीछे खड़ा रहा, लेकिन अब नहीं। पार्टी नेता, कार्यकर्ता और आमजनों ने बड़ा स्नेह दिया। मुझे क्षमा करें।

By: Yogendra Yogi

Published: 10 Sep 2020, 05:49 PM IST

समस्तीपुर(प्रियरंजन भारती)बिहार: (Bihar News ) राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद (Raghuvansh Prasad resign ) सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली एम्स में भर्ती रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपना इस्तीफा एक सामान्य पन्ने पर (Big blow to RJD ) लिखकर भेजा है। इसमें उन्होंने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को संबोधित करते हुए लिखा है कि जननायक कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद 32 वर्षों तक आपके पीछे-पीछे खड़ा रहा, लेकिन अब नहीं। पार्टी नेता, कार्यकर्ता और आमजनों ने बड़ा स्नेह दिया। मुझे क्षमा करें।

रामा सिंह की एंट्री की खबरों से नाराज थे
बता दें कि रघुवंश प्रसाद सिंह राजद में रामा सिंह की एंट्री की खबरों को लेकर नाराज चल (Raghuvansh was annoyed with Rama Singh) रहे थे और उन्होंने इसका पुरजोर विरोध भी किया था। यही कारण है कि रामा सिंह को अभी तक राजद में जगह नहीं मिल सकी है। रघुवंश प्रसाद सिंह ने फोन पर बातचीत में कहा था कि हमने एक बार जो फैसला कर लिया तो उससे पीछे नहीं हट सकते हैं। हमने न तो कभी अपने सिद्धांतों से समझौता किया है और न ही आगे करेंगे।

दिल्ली एम्स में भर्ती हैं प्रसाद
रघुवंश प्रसाद सिंह ने बताया कि तेजस्वी यादव ने एम्स में आकर मेरे स्वास्थ्य का हालचाल जाना जो मुझे अच्छा लगा, लेकिन हमने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से पहले ही इस्तीफा दे दिया है और उसे हरगिज़ वापस नहीं लेंगे। बता दें कि पिछले दिनों खबर आई थी कि रघुवंश प्रसाद सिंह की तबीयत दोबारा बिगड़ गई है। नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें एम्स (दिल्ली) के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। फिलहाल वह एम्स के आईसीयू में भर्ती हैं। वे पिछले एक माह से दिल्ली में ही हैं। जानकारी के अनुसार उन्हें श्वास लेने में परेशानी हो रही थी। साथ ही, बार-बार खांसी की शिकायत थी।

सभी पदों से दे दिया था इस्तीफा
रघुवंश प्रसाद ने लिखा है कि वो राजद में 32 साल तक रहें। इस दौरान उन्हें पार्टी में बहुत प्यार मिला लेकिन अब साथ देना संभव नहीं है। रघुवंश प्रसाद काफी वक्त से पार्टी से नाराज चल रहे थे और इसी सिलसिले में रघुवंश प्रसाद ने अपने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा पहले ही दे दिया था। उल्लेखनीय है कि लोजपा के पूर्व सांसद रामा सिंह के राजद में शामिल होने की सूचना के बाद रघुवंश सिंह ने पिछले महीने पार्टी में सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। तब वह कोरोना से संक्रमित थे और पटना के एम्स में इलाज करा रहे थे। उन्होंने अस्पताल से ही पत्र के जरिए राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद को अपना इस्तीफा भेज दिया था।

तेज प्रताप ने रघुवंश को बताया एक लोटा पानी
कुछ दिन पहले ही राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े पुत्र विधायक तेज प्रताप यादव ने रघुवंश प्रसाद सिंह के बारे में पूछे जाने पर कहा था कि समुद्र से एक लोटा पानी निकल जाये तो क्या फर्क पड़ेगा। तेज प्रताप ने आगे कहा कि राजद में उनकी औकात एक लोटा पानी की तरह है। अगर समुद्र से एक लोटा पानी निकल ही जाएगा तो क्या फर्क पड़ेगा। लेकिन, लगे हाथ तेजप्रताप ने यह भी कहा कि रघुवंश बाबू अभिभावक हैं। उन्हें मना लिया जाएगा।

लालू ने रोकी रामा की एंट्री
राजद प्रमुख लालू प्रसाद के मना करने पर रामा सिंह की राजद में इंट्री रोक दी गई। राजद ने इस बार रामा सिंह को पार्टी में शामिल करने की कोई घोषणा नहीं कि थी, लेकिन रामा सिंह ने खुद ही एलान किया था कि वह 29 अगस्त को राजद में शामिल हो जाएंगे। उसके बाद रघुवंश सिंह ने अपनी नाराजगी जता दी थी। नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने दिल्ली के अस्पताल में मिलने के बहाने उनको मनाने का भी प्रयास किया।

रामा से हारने से खफा थे रघुवंश
रामा किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह बिहार के बाहुबली नेता के तौर पर जाने जाते हैं। 90 के दशक में रामा सिंह का एक नाम तेजी से उभरा था। हाजीपुर से सटे वैशाली के महनार इलाके में उनकी तूती बोलती थी। रामा सिंह पांच बार विधायक रहे हैं और 2014 के मोदी लहर में राम विलास पासवान की एलजेपी से वैशाली से सांसद रह चुके हैं। रामा सिंह ने आरजेडी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह को हराया था। इसी हार के बाद रघुवंश प्रसाद रामा सिंह का नाम तक नहीं सुनना चाहते हैं।

रामा ने कसा था रघुवंश पर तंज
रामा सिंह ने कहा था कि पार्टी किसी की जागीर नहीं होती है और पार्टी से ऊपर कोई नहीं होता है। हमने कुछ दिन पहले आरजेडी में शामिल होने की अर्जी लगाई थी जिसके बाद मुझे इसकी अनुमति मिल गई। कौन मेरे आने का विरोध करता है इसको लेकर मुझे कुछ ज्यादा नहीं कहना है। रघुवंश प्रसाद सिंह पर तंज कसते हुए रामा सिंह ने कहा कि 1990 से जब भी रघुवंश प्रसाद सिंह उनके खिलाफ चुनाव लड़े हैं, उसमें उनकी हार हुई है।

वोट बैंक की गणित में भारी रामा
रवैशाली जिले में रामा सिंह की गिनती बड़े नेताओं में की जाती रही है और सवर्णों के बीच उनका बड़ा वोट बैंक है। एक दौर में राजपूत समुदाय बिहार में आरजेडी का मूलवोट बैंक हुआ करता था, लेकिन अब धीरे-धीरे इस समुदाय पर बीजेपी की पकड़ मजबूत हुई है। यही वजह है कि तेजस्वी यादव ने रामा सिंह के जरिए राजपूत समीकरण को मजबूत करने के लिए दांव खेलने की रणनीति बनाई हैं।

रघुवंश पर नहीं लगे भ्रष्टाचार-गुंडागर्दी के आरोप
रघुवंश प्रसाद आरजेडी के उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जिन्होंने पार्टी को बुलंदी पर पहुंचाने में अहम भूमिका अदा की है। रघुवंश आरजेडी के उन गिने-चुने नेताओं में से एक हैं जिन पर कभी भी भ्रष्टाचार या गुंडागर्दी के आरोप नहीं लगे। लालू प्रसाद यादव के जेल जाने के बाद पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की कमी हो गई है। रघुवंश प्रसाद ही वह चेहरा माने जाते हैं जो पार्टी के उम्रदराज कार्यकर्ताओं को पार्टी के साथ जोड़े रखने में अहम भूमिका अदा करते रहे हैं।

वैचारिक मजबूती पर वोट बैंक पर पकड़ ढीली
दिलचस्प बात यह है कि रघुवंश प्रसाद सिंह भी राजपूत समुदाय से आते हैं, लेकिन खांटी समाजवादी नेता होने के चलते उनकी दूसरे राजपूतों नेताओं की तरह सियासी पकड़ नहीं है। रघुवंश प्रसाद वैचारिक तौर पर आरजेडी के मजबूत नेता हैं, लेकिन सामाजिक तौर पर अब फिट नहीं बैठ रहे हैं। वहीं, रामा सिंह भले ही वैचारिक तौर पर आरजेडी के लिए खरे न उतरे, लेकिन राजनीतिक तौर पर ट्रंप कार्ड के तौर पर देखा जा रहा है। इसीलिए रामा सिंह की एंट्री को आरजेडी ने हरी झंडी मिली थी।

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