फिल्टर प्लांट की धुलाई में बर्बाद हो रहा 50,00,000 लीटर पानी

फिल्टर प्लांट की धुलाई में बर्बाद हो रहा 50,00,000 लीटर पानी
50,00,000 liters of water being wasted in the washing of the filter plant

Sukhendra Mishra | Updated: 17 Jun 2019, 08:02:00 AM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

इतने पानी में हर दिन बुझ सकती है एक गांव की प्यास

 

सतना. बाणसागर से पानी खरीदकर शहर की प्यास बुझा रहा नगर निगम प्रशासन फिल्टर प्लांट की धुलाई के नाम पर हर दिन डेढ़ लाख लीटर पानी नाले में बहा रहा है। शहर को प्रतिदिन 35 एमएलडी पानी की आपूर्ति कर रहे निगम के पास जल शुद्धीकरण की कोई नई तकनीक न होने से हर माह लगभग 50 लाख लीटर पानी फिल्टरों की धुलाई में बर्बाद हो जाता है। नाले में बहाई जा रही पानी की यह वह मात्रा है, जिससे प्रति दिन किसी एक गांव की प्यास बुझाई जा सकती है। प्रदेश की बात करें तो भीषण गर्मी के बीच जहां लोग बूंद-बूंद जलसंकट से जूझ रहे हैं, वहीं प्रदेश के 51 जिला मुख्यालयों पर स्थित वाटर फिल्टर प्लांटों में प्रतिदिन डेढ़ करोड़ लीटर (15 एमएलडी) पानी बर्बाद हो रहा है। यह पानी की वह मात्रा है जिसे सहेजा जाए तो प्रतिदिन किसी एक शहर की प्यास बुझ सकती है।
पानी सहेजने में रुचि नहीं

शहर से लेकर गांव तक व्याप्त जलसंकट से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी की है। जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन, वाटर फिल्टर प्लांटों में प्रतिदिन बेकार बहाए जा रहे लाखों लीटर पानी की बर्बादी रोकने एक दशक बीतने के बाद भी प्रदेश सरकार द्वारा कोई पहल नहीं की गई। पीएचई से जुड़े जानकारों का कहना है कि फिल्टर प्लांट की वॉशिंग अनिवार्य है। इसे रोका नहीं जा सकता पर प्रशासन चाहे तो फिल्टर प्लांटों में पानी की बर्बादी रोकने रिसाइकल प्लांट लगाया जा सकता है। इससे धुलाई से निकले गंदे पानी को रिसाइकल कर फिर इसका उपयोग रा वाटर या सप्लाई में किया जा सकता है।
हर दिन होती है धुलाई
जलकार्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोलगवां स्थित वाटर फिल्टर प्लांट से प्रतिदिन 35 एमएलडी पानी की सप्लाई शहर को की जा रही है। एनीकट से आने वाले रॉ वाटर को फिल्टर करने पुराने जलशोधन गृह में तीन तथा जलावर्धन योजना के तहत बनाए गए नए फिल्टर प्लांट में 6 फिल्टर लगे हैं। इनमें से प्रतिदिन चार फिल्टरों की धुलाई की जाती है। फिल्टर प्लांट में जमा मिट्टी एवं गंदगी को साफ करने प्रतिदिन लगभग डेढ़ लाख लीटर पानी का उपयोग किया जाता है। फिल्टर की धुलाई से निकले गंदे पानी को बिना रिसाइकल किए किसी अन्य कार्य में उपयोग करना संभव नहीं है, इसलिए इसे नाले द्वारा नारायण तालाब में बहा दिया जाता है।
पानी बहाना मजबूरी

जलकार्य विभाग के प्रभारी आरपी सिंह का कहना है कि एनीकट से आने वाले पानी का एक हिस्सा प्रतिदिन फिल्टरों की धुलाई में बहा दिया जाता है। फिल्टरों की वाशिंग में हर दिन लगभग डेढ़ लाख लीटर पानी का उपयोग किया जाता है। फिल्टर की धुलाई से निकले पानी का उपयोग बिना रिसाइकल के संभव नहीं। निगम के पास जलशोधन की कोई नई तकनीक न होने के कारण पानी की बर्बादी रोकना संभव नहींं। यह समस्या सिर्फ सतना में नहीं है। प्रदेश के सभी शहर में जलशोधन का कार्य एक ही पद्धति से किया जाता है।

फैक्ट फाइल
शहर की जनसंख्या 3 लाख

शहर में वाटर फिल्टर प्लांट 01
प्रतिदिन जलापूर्ति 35 एमएमलडी

प्लांट धुलाई में पानी का उपयोग 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन
महीने में धुलाई में बहाया जाने वाला पानी 50 लाख लीटर

 

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