51 स्कूलें ऐसी जहां एक भी छात्र नहीं और तैनात हैं 54 शिक्षक

संभागायुक्त ने की शिक्षा में गुणवत्ता की समीक्षा: कहा-परिणाम सुधारने शिक्षक बच्चों की कमियां जानें और उनसे सीधा संवाद स्थापित करें

By: Ramashanka Sharma

Published: 19 Jun 2019, 12:07 AM IST

सतना. प्रदेश में सर्वाधिक खराब परिणाम देने वाले जिलों में सतना का नाम भी शामिल है। रीवा संभाग में सबसे ज्यादा 15 फीसदी रिजल्ट यहीं गिरा है। जिले में 30 फीसदी से कम परिणाम देने वाले विद्यालयों की संख्या 60 रही। बोर्ड परिणाम में प्रदेश में जिले का 47वां स्थान रहा। इस स्थिति को देखते हुए संभागायुक्त रीवा डॉ अशोक कुमार भार्गव ने सतना पहुंच कर शिक्षकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा, जब खराब परिणाम की बात की जाती है तो शिक्षकों की ओर से समस्याओं का अंबार लगा दिया जाता है। सोचने वाली बात यह है कि जहां परिणाम अच्छे आए हैं वहां भी समस्याएं रही होंगी। कमी हमारी साधना में है, साधन में नहीं । कलेक्टर सतेंद्र सिंह ने कहा कि हम बेहतर संसाधन दे रहे हैं पर शिक्षक पढ़ाई लिखाई सुधारें। संयुक्त संचालक लोक शिक्षण अंजनी त्रिपाठी ने जिले की शैक्षणिक व्यवस्थाओं में सुधार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिये प्राचार्यों और प्रधानाचार्यों की समीक्षा बैठक सह प्रेरणा संवाद कार्यक्रम में संभागायुक्त भार्गव ने कहा कि शिक्षकों के पास ज्ञान की ताकत, क्षमता और दक्षता की कमी नहीं है लेकिन यह सब सुप्त अवस्था में पड़ा है। इन्हें जगाने की जरूरत है। ये खराब परिणाम हमारे होने के एहसास को चुनौती दे रहे हैं। शिक्षकों को मानसिकता बदलनी होगी। हमेशा समस्याओं का रोना रोना हमारी कार्यशैली पर प्रश्रचिन्ह खड़ा करता है। शिक्षक को सौंपे गये दायित्वों का निर्वहन न करना ही कमजोर परिणाम की वजह है। इसके साथ ही बच्चों को स्कूल में अच्छा माहौल देना होगा जिससे वह स्कूल आने से भागे नहीं बल्कि यहां आने को उत्साहित रहे। यह तभी संभव है जब शिक्षक और छात्र के पवित्र रिश्ते को निभाया जाएगा। अगर विद्यार्थियों के शिक्षा के मार्ग में कोई कमी आड़े आ रही है, तो शिक्षक उन कमियों को जानने, समझने और उन्हें दूर करने के लिये विद्यार्थियों से सीधा संवाद स्थापित करें, जो अभी नहीं दिख रहा है। जिस दिन यह होने लगेगा उस दिन से शिक्षा का स्तर बढऩे लगेगा। शिक्षक सामाजिक बदलाव का वाहक है। जो उपलब्ध संसाधन और उपकरण हैं वह शिक्षक के सहायक मात्र है असली चीज है शिक्षा। जिस दिन शिक्षक मन से शिक्षा देने में जुट जाएगा विद्यार्थियों की विद्यालय में संख्या तो बढ़ेगी ही परिणाम भी बेहतर आएगा। संभागायुक्त ने मार्मिक शब्दों में कहा कि बच्चे हमारे राष्ट्र की दौलत हैं, जिसको अच्छे शिक्षक अपने बच्चों की तरह ही संभालते एवं संवारते हैं। अच्छे शिक्षक ना सिर्फ विद्यार्थियों के ज्ञान को बढ़ाते है, बल्कि उनमें जिज्ञासा पैदा करते हैं और जिज्ञासा को शान्त भी करते हैं। शिक्षकों का आह्वान किया कि वह बेहतर परीक्षा परिणाम लाने के लिए अपने ज्ञान और अनुभव की ऊर्जा का बेहतर ढंग से इस्तेमाल करें। उनके प्रयासों से जिले में शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम के नये सवेरे का उदय होगा।

शिक्षक को आत्ममंथन की जरूरत

कलेक्टर डॉ. सतेंद्र सिंह ने प्राचार्यों से कहा कि हम स्कूलों में आधारभूत संरचनाएं स्थापित कर शैक्षणिक वातावरण सुधार रहे हैं। अन्य मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब शिक्षकों को आत्ममंथन करने की जरूरत है कि वह कैसे अथक मेहनत कर विद्यार्थियों के अच्छे परीक्षा परिणाम सामने लाएं।
बिना विद्यार्थियों के विद्यालय
समीक्षा बैठक में कई चौंकाने वाली जानकारियां भी सामने आईं जो जिले की शैक्षणिक व्यवस्था की पोल खोलती दिखी। जिले में 51 प्राथमिक शालाएं ऐसी हैं जहां एक भी बच्चे का एडमिशन नहीं है और यहां 54 शिक्षक तैनात हैं। 6 माध्यमिक शालाएं ऐसी है जिसमें विद्यार्थियों की संख्या शून्य है पर यहां 14 शिक्षक तैनात है। इसी तरह 1 से 5 की संख्या में एडमिशन वाले 62 प्राथमिक विद्यालयों में 102 शिक्षक तथा 5 माध्यमिक शालाओं में 13 शिक्षक तैनात है। 6 से 10 नामांकन वाली 127 प्राथमिक शालाओं में 214 शिक्षक तथा 11 माध्यमिक शालाओं में 21 शिक्षक तैनात है। ऐसे में सवाल यह खड़ा हुआ है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि इन विद्यालयों में लोग बच्चों का एडमिशन नहीं कराना चाह रहे हैं। दूसरा सवाल यह है कि प्रशासन इन शिक्षकों को इस सत्र में कहा एडजस्ट करेगा, जिससे इनकी उपयोगिता साबित हो सके। इसी तरह से 11 से 20 एडमिशन वाले 444 प्राथमिक विद्यालय हैं।

ऐसा रहा सतना का रिजल्ट

संयुक्त संचालक रीवा अंजनी त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष कक्षा दसवीं का प्रदेश का रिजल्ट 61.3 फीसदी रहा। रीवा संभाग का औसत रिजल्ट 49.54 फीसदी रहा और सतना का इससे भी नीचे 45.61 फीसदी। गत वर्ष के परिणामों की तुलना करें तो प्रदेश का रिजल्ट 5 फीसदी कम हुआ, रीवा संभाग का 8 फीसदी कम हुआ और सतना जिले का 15 फीसदी कम हुआ। गत वर्ष सतना में 30 फीसदी से कम परिणाम वाले विद्यालयों की संख्या 15 थी जो इस वर्ष चार गुना बढ़ कर 60 पहुंच गई। गत वर्ष 100 फीसदी रिजल्ट देने वाले विद्यालयों की संख्या 3 थी लेकिन इस साल एक भी नहीं है। 90 फीसदी से उपर परिणाम देने वाले विद्यालयों की संख्या 15 थी जो इस वर्ष महज 2 रही। यह बता रहा कि संकट की स्थिति आ गई है। अब अगर कार्य नहीं करेंगे तो कल्याण नहीं होगा। कलेक्टर अपनी ओर से भवनों की व्यवस्था दुरुस्त करवा दिए हैं लेकिन परिणाम भवन से ज्यादा शिक्षण से सुधरता है जो शिक्षकों की जिम्मेदारी है। देखने में आ रहा कि लैब की खानापूर्ति होती है, विद्यार्थियों को प्रेक्टिकल का ज्ञान नहीं है। यह सब सुधारना होगा।
तीन प्राचार्यों का सम्मान
संभागायुक्त ने जिले में बेहतर परीक्षा परिणाम लाने वाले तीन प्राचार्यों को शाल एवं श्रीफ ल से सम्मानित किया। इस दौरान कहा कि जब ये सम्मानित प्राचार्य कम संसाधनों के बावजूद अच्छे परीक्षा परिणाम ला सकते हैं, तो अन्य स्कूलों के प्राचार्य इस तरह के परीक्षा परिणाम क्यों नहीं ला सकते? इस बार चाहूंगा कि हर प्राचार्य सम्मानित होने की स्थिति में रहे।

Ramashanka Sharma Reporting
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