मेडिकल कॉलेज के लिए 7 एकड़ जमीन नहीं दे पाया प्रशासन

मेडिकल कॉलेज के लिए 7 एकड़ जमीन नहीं दे पाया प्रशासन
Administration can not administer 7 acres for medical college

Ramashankar Sharma | Updated: 21 Jun 2019, 12:16:44 AM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

ये कैसी मनमानी: श्रेय सबने लिया पर जमीन दिलाने में साध ली चुप्पी
जमीन नहीं मिलने से प्रक्रिया थमी, प्रभावित हो सकती है निर्माण कार्य

सतना. सतना मेडिकल कॉलेज के लिए प्रशासनिक अनदेखी के कारण 7 एकड़ जमीन और नहीं मिल सकी है। कॉलेज निर्माण के लिए 45 एकड़ जमीन चाहिए पर जिला प्रशासन द्वारा जेल के पीछे डोंगरी बस्ती में अब तक 37.72 एकड़ ही आवंटित की गई है। जमीन नहीं मिलने से निर्माण प्रक्रिया थमी हुई है।
दरअसल, चैलेंज मोड पर सफल होने के बाद केंद्र सरकार ने सतना को 150 सीट का मेडिकल कॉलेज स्वीकृत कर दिया। इसके साथ ही शहर की होर्डिंगों में जनप्रतिनिधियों और नेताओं की बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स टंग गईं। सभी ने इसकी स्वीकृति का अपने-अपने स्तर पर श्रेय भी लिया। पर, किसी भी नेता या जनप्रतिनिधि को इस बात की फुर्सत नहीं मिली कि इसकी निर्माण प्रक्रिया को लेकर गंभीरता दिखाए। इससे बड़ा शर्मनाक वाक्या क्या होगा कि सतना मेडिकल कॉलेज की निर्माण प्रक्रिया अभी महज इसलिए रुकी हुई है क्योंकि उसे वांछित 7 एकड़ जमीन नहीं मिल सकी है। यह स्थिति तब है जब संबंधित निर्माण एजेंसी और चिकित्सा शिक्षा विभाग जिला प्रशासन को चार-चार बार पत्र लिख चुका है। कलेक्टर न्यायालय से मिली जानकारी के अनुसार इस संबंध में कई बार एसडीएम को लिखा जा चुका है। कुल मिलाकर मामला लाल फीताशाही में उलझ कर रह गया है। इसका असर यह है कि टाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग से मेडिकल कॉलेज के लिए अनापत्ति नहीं मिल पा रही है तो अग्रिम प्रक्रिया भी रुकी हुई है।

एकजुट हो गई थी जनता

केन्द्र सरकार ने जब मध्यप्रदेश के तीन जिलों को मेडिकल कॉलेज के लिए चिह्नित किया तो उसके बाद पूरे जिले की जनता सतना को मेडिकल कॉलेज दिलाने एकजुट हो गई थी। जनता की आवाज में राजनीतिक दल, नेता और जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी आवाज मिलाई। नतीजा, जिले को केन्द्र सरकार ने 100 बेड का मेडिकल कॉलेज स्वीकृत कर दिया। इसके बाद जब प्रक्रिया आगे बढ़ी तो जिले की स्थिति और अन्य कारणों को देखते हुए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सतना मेडिकल कॉलेज की क्षमता में वृद्धि करते हुए इसे 150 सीट की स्वीकृति जारी कर दी। बदली स्थिति में अब मेडिकल कॉलेज के लिए अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता पड़ी। इस पर पूर्व में ही जिला प्रशासन लिखित में यह कह चुका था कि अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता होने पर और जमीन तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी।
भूल गया वादा, लापरवाह हुए अधिकारी
जिले में आवश्यकताओं और जरूरतों को लेकर प्राथमिकता तय न करने का एक चलन सा प्रारंभ हो चुका है। कोई भी जिम्मेदार हो वह यहां की आवश्यकताओं को लेकर प्राथमिकता तय न कर अपने एजेंडे को प्राथमिकता में रखना चाहता है। मेडिकल कालेज के साथ भी यही हुआ। चुनाव के वक्त दिन रात मेडिकल कालेज की माला जपने वाले नेता चुनाव बाद इसकी सुध लेना भूल गए। अफसरों की कार्यसूची में भी मेडिकल कॉलेज हाशिये पर आ गया। नतीजा, जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक भवन में मेडिकल कॉलेज के लिए अतिरिक्त जमीन आवंटन के पत्र आकर रद्दी की टोकरी में जाते रहे।

चाहिए 45 दिया 38 एकड़

मेडिकल कॉलेज निर्माण के समन्वयक रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन बनाए गए हैं। उनके अनुसार जमीन आवंटन की प्रत्याशा में कंसल्टेंट एजेंसी ने 45 एकड़ की जमीन पर मेडिकल कालेज का निर्माण कार्य प्रस्तावित किया है। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा अभी तक 37.72 एकड़ ही जमीन आवंटित की गई है। इस आवंटित जमीन में भी यह गड़बड़झाला है कि इसके दो एकड़ का हिस्सा कन्या एवं बालक छात्रावास के लिए आवंटित था।
नहीं रुकवाया काम
जिले में आधिकारिक अराजकता का आलम यह है कि जब मेडिकल कालेज को यह जमीन आवंटित कर दी गई, उसके बाद यहां छात्रावास निर्माण की निर्माण एजेंसी को यह कार्य रोक देने के लिए भी लिखा गया पर यह काम भी तत्कालीन एजेंसी द्वारा नहीं रोका गया। जबकि चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा इस निर्माण को अपने अनुरूप करवाने की बात कही गई थी।

यह है मामला

शुरुआती दौर में तत्कालीन कलेक्टर ने मेडिकल कॉलेज के लिए 37.72 एकड़ जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित कर दी थी। आश्वस्त किया कि आवश्यकता और प्लान के अनुसार इससे लगी 7.50 एकड़ की जमीन का और आवंटन कर दिया जाएगा। इसमें से एक शासकीय जमीन वह थी, जिसे पौधरोपण के लिए आवंटित किया गया था। अब निर्माण एजेंसी आवंटित जमीन से लगी 4 एवं 3.5 एकड़ अतिरिक्त जमीन की मांग दिसंबर 2018 से कर रही है। लेकिन जिम्मेदारों के पास इतना वक्त नहीं है कि वे इस प्रक्रिया को पूरा कर सकें।
तहसीलदार के यहां अटकी फाइल
जानकारों का कहना है कि कलेक्टर न्यायालय से एसडीएम के यहां भेजा गया प्रकरण तहसीलदार के यहां अटका पड़ा है। बताया जा रहा कि यहां का मैदानी राजस्व अमला और अधिकारी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाले बैठे है। हालांकि तहसीलदार आरपी तिवारी से बात की गई तो उन्होंने अगले दिन संबंधित नस्ती भेजने की बात कही है।

चेंबर ने कलेक्टर को लिखा पत्र
मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि आवंटन के मामले में विलंब को देखते हुए विंध्य चेंबर ने आपत्ति जाहिर की है। चेंबर महामंत्री ऋषि अग्रवाल ने बताया कि चेंबर अध्यक्ष द्वारिका गुप्ता ने 7.50 एकड़ भूमि का आवंटन शीघ्र करने कलेक्टर से मांग की है। बताया कि केन्द्र सरकार ने मेडिकल कॉलेज खोले जाने की घोषणा के साथ ही 4 अक्टूबर 2018 को 550 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी कर दी है। लेकिन इसके बाद भी अभी तक आवश्यक भूमि का आवंटन न किया जाना खेदजनक है।

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ऐसा है मेडिकल कॉलेज
150 विस्तर की स्वीकृति

45 एकड़ जमीन चाहिए
37.72 एकड़ जमीन उपलब्ध

7 एकड़ जमीन और चाहिए

550 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी

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'' मामले को गंभीरता और तत्परता दिखाने की जरूरत है। यह केन्द्र और राज्य का विषय नहीं है। इसमें जो भी जमीन की उपलब्धता की आवश्यकता है उसे लेकर तत्काल देना चाहिए। मामले में सतना लौट कर शीघ्र पहल करूंगा। ''

- गणेश सिंह, सांसद

 

'' यह गंभीर मामला है। इतने महीनों बाद भी मेडिकल कालेज के लिए भू-आवंटन में विलंब होना नहीं चाहिए। इस मामले में कलेक्टर से तत्काल बात की जाएगी और कोशिश होगी कि शीघ्र अतिरिक्त जमीन आवंटित हो सके। ''

- सिद्धार्थ कुशवाहा, विधायक

'' इसमें किसी भी तरह की अनदेखी जैसी कोई बात नहीं है। जमीन आवंटन प्रक्रियाधीन है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी ''

- सतेन्द्र सिंह, कलेक्टर

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