कृषि मंत्री के पहुंचते ही 500 से 700 रुपए अधिक रेट में बिका उड़द, फिर जस के तस हुए हालात

suresh mishra

Publish: Nov, 15 2017 02:48:36 PM (IST) | Updated: Nov, 15 2017 05:26:59 PM (IST)

Satna, Madhya Pradesh, India
कृषि मंत्री के पहुंचते ही 500 से 700 रुपए अधिक रेट में बिका उड़द, फिर जस के तस हुए हालात

औपचारिक रहा कृषि मंत्री का मंडी निरीक्षण, किसानों को जबाव दिए बगैर दुम-दबाकर भागे मंत्री जी, भावांतर योजना की समीक्षा करने पहुंचे थे कृषि उपज मंडी

सतना। प्रदेश के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन का सतना कृषि उपज मंडी का दौरा औपचारिक रहा। मंत्री जी को देखते ही व्यापारियों ने दो-तीन किसानों की फसलों का 500 से लेकर 700 रुपए तक अच्छा रेट बढ़ाकर खरीदारी की। फिर इसके बाद उसी तरह मंडी में अव्यवस्था का आलम फैल गया।

किसान फसलों के रेट को लेकर मंत्री के सामने गिड़गिड़ाते रहे। फिर भी उनकी बातों को नजर अंजाज करते हुए मंत्री जी आगे बढ़ गए। निरीक्षण से पहले ही मंडी प्रशासन ने व्यापारियों से मिलकर अच्छी फसलों की तरफ ही मंत्री का ध्यान घुमाकर। तय चबूतरे में ही सोयाबीन, उड़द, तिली आदि की अच्छे दाम देकर खरीदारी की।

7 बजे रेवांचल एक्सप्रेस से सतना पहुंचे

बता दें कि, किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री गौरीशकर बिसेन बुधवार की सुबह 7 बजे रेवांचल एक्सप्रेस से सतना पहुंचे। सर्किट हाउस में अल्प विश्राम के बाद 10.30 बजे कृषि उपज मंडी का निरीक्षण किया। मंडी की बदहाली का भी जायजा लिया। हालांकि कृषि मंत्री किसानों से रूबरू हुए बगैर ही निकल गए।

भावातंर भुगतान योजना की समीक्षा

कार्यालय में बैठककर ही भावातंर भुगतान योजना की समीक्षा कर ली। इसके बाद कृषि मंत्री 11.15 बजे से कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में भावांतर योजना एवं फल-सब्जी मंडी को नवीन प्रांगण में स्थानांतरित किए जाने के संबंध में आयुक्तननि एवं विभागीय अधिकारियों की बैठक लिए।

बिना जवाब दिए ही मंत्री जी हुए रवाना
मंडी निरीक्षण करते समय कुछ किसानों ने व्यापारियों के रवैये की शिकायत मंत्रीजी से की। शिकायत में बताया कि पिछले वर्ष उड़द का रेट 12 हजार से लेकर 15 हजार रुपए तक था। लेकिन इस वर्ष व्यापारी सिर्फ 2 हजार रुपए तक ही खरीद रहे है। इससे जहां किसानों को घाटा हो रहा है वहीं खेती की लागत भी नहीं निकल रही है। फिर भी मंत्री जी बिना कुछ बोले आगे बढ़ गए। निरीक्षण में पूरे समय मंडी के जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। अंत तक मंडी की बदहाली मंत्री के सामने नहीं आने दी।

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