इस शिवलिंग पर 314 वर्ष पहले औरंगजेब ने किया था हमला, इसके बाद निकले थे ये पंचतत्व

इस शिवलिंग पर 314 वर्ष पहले औरंगजेब ने किया था हमला, इसके बाद निकले थे ये पंचतत्व
Birsinghpur Gaveenath shrine-3

Suresh Kumar Mishra | Updated: 25 Jul 2017, 05:27:00 PM (IST) Satna, Madhya Pradesh, India

मधुमक्खियों से घबरा गई थी सेना, प्रदेशभर में आस्था का केन्द्र गैवीनाथ का शिव मंदिर, औरंगजेब ने तोड़ी थी मूर्ति।


सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिला स्थित बिरसिंहपुर में गैवीनाथ धाम का इतिहास बड़ा ही निराला है। बुजुर्ग कहते है कि, 314 वर्ष पहले मुगल शासक औरंगजेब ने देवपुर नगरी में हमला किया था। आसपास के क्षेत्रों में आस्था का केन्द्र बने गैवीनाथ धाम में शिवलिंग तोडऩे का प्रयास किया।

हालांकि उस दौरान औरंगजेब की विराट सेना ने जैस ही शिवलिंग पर वार किया तो मधुमक्खियों के विरोध का सामना करना पड़ा था।  बाद में औरंगजेब सहित उसकी सेना को जान बचाकर भागना पड़ा।

Birsinghpur Gaveenath shrine-2

जानकारों की मानें तो गैवीनाथ मंदिर को लेकर ऐतिहासिक व धार्मिक तथ्य भी है। बताया जाता है, मुगल शासक औरंगजेब सन् 1704 में देवपुर नगरी पहुंचा था। उस दौरान वो पूरे भारत वर्ष में मंदिरों को तोड़ रहा था। इसी तारतम्य में गैवीनाथ के शिवलिंग तोडने का प्रयास किया।

शिवलिंग के ऊपर 5 टांकिया (लोहे की छेनी-हथौड़े से वार) लगवाई थी। पहली टांकी से दूध, दूसरी टांकी से शहद, तीसरी टांकी से खून, चौथी टांकी से गंगाजल, पांचवी टांकी से भंवर (मधुमक्खी) निकली। जिसके बाद औरंगजेब भाग खड़ा हुआ। तब से खंडित शिवलिंग की पूजा होते आ रही है।

खंडित मूर्ति फिर भी पूजा
पुराणों की मानें तो हिन्दू धर्म में खंडित प्रतिमा की पूजा करना वर्जित है। फिर भी गैवीनाथ धाम में खंडित प्रतिमा को स्थान दिया गया है। बल्कि भक्त बड़ी सिद्धत से बाबा भोलनाथ की पूजा भी करते है। कहा जाता है कि देश की पहली ऐसी गैवीनाथ की मूर्ति है जहां खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है।

Birsinghpur Gaveenath shrine-1

आज भी चोंट के निशान मौजूद
औरंगजेब द्वारा जिस गैवीनाथ की मूर्ति पर लोहे की छेनी और हथौड़े से वार किया गया था। वहां आज भी चोंटे के निशान दिखाई देते है। फिर भी देश के कोने-कोने से बाबा के दर्शन के लिए भक्त आस्था के साथ पहुंचते है। खासतौर पर शिवरात्रि और सावन मास में लाखों की संख्या में भक्त शिवलिंग के दर्शन करने पहुंचते है।

लंबाई का पार नहीं
बिरसिंहपुर में स्थापित बाबा भोले नाथ के शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि शिवलिंग की लंबाई का कोई पार नहीं है। एक बार तो विदेशी वैज्ञानिकों ने भी परीक्षण करने का प्रयास किया था लेकिन जिस गहराई तक मूर्ति थी उसका पता उनकों भी नहीं लग सका।

कभी नहीं सूखता तालाब का पानी
मंदिर से सटे तालाब के बारे में कहा जाता है कि यहां का पानी हमेशा भरा रहता है और इसकी धार उज्जैन के क्षिप्रा नदी से जुडी है। इस तालाब का पानी भगवान भोलेनाथ की कृपा से कभी नहीं सूखता। यहां स्नान करने से सारे पाप दूर हो जाते है।
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