इंडियन बैंक का 'मित्र' उपभोक्ताओं के लाखों रुपये लेकर गायब हो गया

चित्रकूट ब्रांच में मचा हड़कम्प, जोनल ऑफिस की जांच टीम ने पकड़ा गड़बड़झाला

उपभोक्ता परेशान घूम रहे, अभी तक आरोपी पर एफआईआर दर्ज नहीं

By: Ramashanka Sharma

Published: 15 Sep 2021, 10:31 AM IST

सतना. इंडियन बैंक (पुराना इलाहाबाद बैंक) की चित्रकूट ब्रांच का बैंकिंग कॉरिस्पांडेंट (बैंक मित्र) राजेश यादव पिता हीरालाल यादव उपभोक्ताओं का लाखों रुपये लेकर गायब हो गया है। अपने बीसी प्वाइंट में आने वाले उपभोक्ताओं से वह राशि लेकर उन्हें रसीद तो दे देता था लेकिन यह राशि वह बैंक में जमा नहीं करवाता था। मामला अगस्त में तब खुला जब एक उपभोक्ता अपनी जमा रकम की जानकारी लेने बैंक पहुंचा और वहां रुपये जमा होने नहीं पाया गया। इसके बाद शिकायत होने पर बैंक के जोनल ऑफिस ने जांच में पाया कि बीसी ने गड़बड़ी की है। इधर फर्जीवाड़े की परतें खुलती देख बीसी अब लापता हो गया है। उपभोक्ता अब बैंक और बीसी के घर के चक्कर काट रहे हैं। अभी तक किसी भी उपभोक्ता की ओर से एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। प्राथमिक जांच में 30 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा होना सामने आ रहा है।

अगस्त में मामला सामने आने के बाद भी चुप्पी

जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार का नियम है कि रिमोट में ब्रांच नहीं खोली जा सकती हैं बल्कि वहां पर संबंधित बैंक अपने बीसी (बैंक कॉसिस्पॉडेंट) जिन्ह आम बोलचाल भाषा में बैंक मित्र कहा जाता है नियुक्त करते हैं। चित्रकूट में भी इंडियन बैंक ने अपना बीसी राजेश यादव पिता हीरालाल यादव निवासी नयागांव को नियुक्त किया था। इसने अपना सेवा केन्द्र चित्रकूट में पर्यटक चौराहे के पास खोल रखा था। यहां चित्रकूट सहित नयागांव, लोसरिहा सहित आस पास के लोग अपना पैसा जमा और निकासी करने आते थे। यह काम सामान्य तौर पर चल रहा था लेकिन अगस्त माह में एक उपभोक्ता सेवा केन्द्र न जाकर बैंक की शाखा में पैसा निकालने पहुंच गया। जहां से बताया गया कि उसके खाते में राशि नहीं है। जब उपभोक्ता ने उसे अपने पास सेवा केन्द्र में जमा की गई राशि की रसीद दिखाई तो पूरा मामला खुलने लगा।

जोनल ऑफिस की टीम ने की जांच

हालांकि यह पहला मामला था लिहाजा इस उपभोक्ता का शिकायती आवेदन लेकर बैंक मैनेजर ने अपने जोनल ऑफिस को भेज दी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जोनल ऑफिस की जांच टीम सतना से चित्रकूट पहुंची। टीम ने जांच में पाया कि सेवा केन्द्र के माध्यम से फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। लिहाजा इस सेवा केन्द्र का लेन देन लॉक करते हुए तय प्रक्रियागत जांच शुरू कर दी गई। साथ ही बीसी को अगस्त दूसरे सप्ताह में काम बंद करने के निर्देश दे दिये गए।

बीसी लगातार करता रहा काम

बैंक द्वारा बीसी को काम बंद करने के निर्देश के बाद भी वह लगातार सेवा केन्द्र संचालित करता रहा। इधर बैंक प्रबंधन ने भी लेनदेन रोक की कोई सूचना सार्वजनिक नहीं की। सार्वजनिक सूचना नहीं होन के कारण बीसी के यहां लगातार उपभोक्ता आते रहे और राशि जमा करते रहे। इधर बीसी प्वाइंट का कारोबार बंद होने के बाद भी राजेश द्वारा केन्द्र संचालन की जब जानकारी बैंक को मिली तो राजेश यादव की बीसी आईडी निरस्त करने के साथ ही बीसी प्वाइंट कैंसिल किये जाने का नोटिस सेवा केन्द्र में चस्पा किया।

नोटिस चस्पा होने के बाद उपभोक्ताओं को लगी खबर

जब सेवा केन्द्र में नोटिस चस्पा हो गई उसके बाद लोगों को अपने साथ हुई धोखाधड़ी की जानकारी हुई। इसके बाद लोग उससे और बैंक से अपने पैसे मांगने लगे। लेकिन मामला लाल फीताशाही और एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने पर उलझ कर रह गया। अभी तक न तो उपभोक्ताओं को पैसे मिले न ही आरोपी पर एफआईआर दर्ज हो सकी है।

बीसी पहुंचा बैंक, बाप की भूमिका संदिग्ध

इधर खुद को फर्जीवाड़े में घिरा पाने के बाद बीसी अगस्त अंतिम सप्ताह में बैंक मैनेजर के पास पहुंचा और उन्हें कहा कि मैं सबका पूरा हिसाब कर दूंगा। बैंक मैनेजर ने इस पर सहमति जताई। लेकिन दूसरे दिन से बीसी राजेश यादव गायब हो गया। उसके पिता हीरालाल यादव जो मध्यांचल बैंक से जुड़े बताए जा रहे हैं उन्होंने बेटे के गायब होने की बात कहते हुए उपभोक्ताओं को बैंक में संपर्क करने कहा। इसके बाद से अब उपभोक्ता बैंक और बीसी के घर के चक्कर काट रहे हैं।

बैंक ठेके पर देता है काम

बीसी के मामले में बताया गया है कि बैंक अपनी ओर से कोई बीसी नियुक्त नहीं करता है, बल्कि इसके लिये किसी कंपनी को ठेका देता है। इंडियन बैंक ने यहां इंटिग्रा कंपनी को बीसी का ठेका दिया है। यह कंपनी अपने स्तर पर बीसी की नियुक्ति करती है। लिहाजा अब बैंक ने इस मामले में कंपनी को इस मामले की जानकारी देते हुए उपभोक्ता हितों के निराकरण की बात कही है। साथ ही ब्रांच मैनेजर ने जोनल आफिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति चाही है। हालांकि अभी तक अनुमति नहीं मिल सकी है।

इनके पैसे हड़प गया बीसी

जानकारी के अनुसार नयागांव निवासी छोटू सोनकर के 20 हजार, छोटू के भाई के 32 हजार और भतीजे का 2.40 लाख रुपये हड़प गया है। लोसरिहा निवासी राजराम के 25 हजार और चित्रकूट नयागांव निवासी रामअवतार करवरिया के 10 लाख रुपये भी बैंक में जमा नहीं किये गए। जबकि इन सभी उपभोक्ताओं को बकायदे रसीद दी गई है।

'' हमने जोनल ऑफिस को जानकारी दे दी है। जो भी अग्रिम कार्यवाही होगी वहीं से होगी। अभी तक लगभग ३० आवेदन बीसी द्वारा फर्जीवाड़ा किये जाने के आ चुके हैं। लगभग 20 लाख रुपये की गड़बड़ी की शिकायत है। जांच की जा रही है। जो भी देनदारी निकलेगी वह इंटिग्रा कंपनी से वसूली जाएगी।''

- प्रभात रंजन, बैंक मैनेजर

'' गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई है। उपभोक्ताओं के साथ थाने गए थे। वहां पूरी जानकारी दी गई है। थाने ने शिकायत ले ली है। अभी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। मामला उच्च स्तर का है। इस मामले में ज्यादा कुछ हम नहीं बता सकते हैं।''

- पुष्पेन्द्र सिंह, बीसी क्वार्डिनेटर इंटिग्रा

'' पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है। मैंने खुद चित्रकूट जाकर पीड़ित उपभोक्ताओं से बात की है। बैंक प्रबंधन से जानकारी ली जा रही है। ''

- धर्मवीर सिंह, पुलिस अधीक्षक

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