स्कूल से दो किमी दूर अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण, तो कैसे हो पढाई

suresh mishra

Publish: Dec, 07 2017 02:27:03 (IST)

Satna, Madhya Pradesh, India
स्कूल से दो किमी दूर अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण, तो कैसे हो पढाई

गांव में विद्यालय के लिए दो किमी दूर पहाड़ी पर बनाई क्लास, सरपंच, सचिव, बीआरसी और उपयंत्री की मनमानी, जनसुनवाई में पहुंचा मामला

सतना. हरदासपुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के पढऩे के लिए बनाए गए कक्षाओं का उपयोग विगत पांच साल से नहीं हो रहा है। ये इसलिए नहीं है कि स्कूल में बच्चे या शिक्षक नहीं हैं। बल्कि, सरकारी व्यवस्था की वो मनमानी है, जो पढ़ाई व्यवस्था को ही चौपट कर के रख दी है। दरअसल, गांव में बने विद्यालय के लिए कक्षाओं का निर्माण दो किमी दूर पहाड़ी के ऊपर कराया गया। जिसके चलते एक समय में स्कूल से दो किमी दूर बनी कक्षाओं में पढ़ाई कराना ही चुनौती है। जिस कारण न तो बच्चों कक्षाओं का उपयोग पढने के लिए करते हैं, न ही कोई शिक्षक जाते हैं। अब निर्माणाधीन भवन मवेशी चराने जाने वालों के लिए शरणस्थल है। जो धूप व पानी से बचने के लिए कभी कभार उपयोग कर लेते हैं।

वहीं अब ये मामला जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुंच गया है। जिसके बाद जांच के आदेश जारी किए गए हैं। जिला मुख्यायल से महज 40 किमी दूर शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय हरदासपुर, मैहर स्थित है। बच्चों की संख्या बढऩे के चलते स्कूल प्रबंधन ने अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण की जरूरत समझी और प्रस्ताव भेजा। जिसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने स्वीकृत भी दे दी थी। लिहाजा काम शुरू हुआ, ग्राम पंचायत में भूमि चिह्नांकन से मनमानी का वो खेल शुरू हुआ। जो पूरी शिक्षा व्यवस्था प्रश्र चिह्न खड़ा कर दिया। सरपंच, सचिव, बीआरसी और उपयंत्री ने मनमानी करते हुए पुराने स्कूल से दो किमी दूर अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण करा दिया। जबकि स्कूल परिसर सहित आसपास भी जगह मौजूद थी।

4.70 लाख का खेल
हरदासपुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में जगह की कमी से बच्चों का अध्ययन करने में दिक्कत आ रही थी। प्रशासन द्वारा बच्चों को जगह मुहैया कराने वर्ष 2011-12 में 4.70 लाख रुपए की राशि अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए स्वीकृत की गयी। पांच साल बाद भी शौचालय का निर्माण अधूरा पड़ हुआ है। तात्कालीन सरपंच फूल सिंह, ग्राम पंचायत सचिव कमलेंद्र सिंह, बीआरसी अजय त्रिपाठी और उपयंत्री हीरालाल वर्मा के द्वारा मिलीभगत कर अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कराया गया था। जबकि विद्यालय परिसर और आसपास जगह भी मौजूद थी।

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