Cabinet Expansion: MP भाजपा का कांग्रेसीकरण, शिवराज पर भारी सिंधिया

-इस मंत्रिमंडल विस्तार में भी शिवराज अपनों को नही दिला पाए सत्ता सुख
-विंध्य क्षेत्र के भाजपाइयो में नाखुशी ज्यादा

By: Ajay Chaturvedi

Published: 02 Jul 2020, 03:14 PM IST

सतना. मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार का एक और मंत्रिमंडल विस्तार हो गया। इस मंत्रिमंडल विस्तार ने एक चीज तो साफ कर दी है कि अब मध्य प्रदेश भाजपा में बागी कांग्रेसियों का दबदबा बढ़ने लगा है। वहीं पुराने भाजपाई धीरे-धीरे हाशिये पर ले जाए जाने लगे हैं। कहने को शिवराज सिंह मुख्यमंत्री जरूर हैं लेकिन उनकी वो हनक नहीं रही जो पिछले कार्यकाल में रही। इससे शिवराज समर्थकों में काफी निराशा है। खास तौर पर विंध्य क्षेत्र के भाजपा नेता इस मंत्रिमंडल विस्तार से खुश तो नहीं ही कहे जा सकते।

बता दें कि काफी जद्दोजहद के बाद गुरुवार को शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया। इसमें 28 नए मंत्री शामिल किए गए हैं जिसमें 14 तो बागी कांग्रेसी हैं। उसमें भी 10 तो ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे से हैं। चार अन्य भी कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थामने वाले हैं। वहीं कई दिग्गज पूर्व मंत्रियों जिन्हें शिवराज का खास माना जाता रहा है उन्हें एक बार फिर से निराशा हाथ लगी है।

यहां बता दें कि इस मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद काफी दिनों से चल रही थी। इसके लिए मुख्यमंत्री चौहान खुद दो दिनों तक दिल्ली में रहे। इस दौरान भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ढा, पूर्व अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व प्रधानमंत्री से मुलाकात की। उसके बाद ये 28 नाम फाइनल हुए। यहां यह भी बता दें कि यह कयास तो पहले से ही लगाए जा रहे थे कि शिवराज अपने समर्थकों को मनचाहे ढंग से सत्ता का सुख नहीं दिला पाएंगे। कारण भी साफ है कि शिवराज को गद्दी मिली है तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के चलते। ऐसे में उनके समर्थकों को समायोजित करना भाजपा नेतृत्व के लिए प्राथमिकता भी थी और वक्त की नजाकत भी।

वक्त की नजाकत इसलिए कि अभी हाल ही में मध्य प्रदेश में 24 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होना है। इस उपचुनाव को लेकर भाजपा कहीं ज्यादा ही चिंतित है। बीजेपी नेतृत्व की पूरी कोशिश होगी कि इन 24 में कम से कम 50 फीसदी से ऊपर की सीटें तो उसकी झोली में जाएं ही ताकि उनकी सरकार निर्विवाद और निष्कंटक रूप से पांच साल चल सके। भाजपा नेतृत्व मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ की कूटनीति से भलीभांति वाकिफ हैं। वो उन्हें कोई ऐसा मौका नहीं देना चाहेंगे जिससे वह फिर से इतने ताकतवर हो जाएं कि सत्ता परिवर्तन करने की स्थिति में आ जाएं। ऐसे में भाजपा नेतृत्व एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रहा था। अब जब कि पिछले दिनों जिस तरह से मीडिया में खबरें आईं कि भाजपा के 600 से ज्यादा कार्यकर्ता और रसूखदार नेताओं ने पार्टी बदल कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। एक नेता जिनकी मध्य प्रदेश की सियासत में अच्छी खासी पैठ है को कांग्रेस ने टिकट तक न्योत दिया। ऐसे में भाजपा नेतृत्व का चिंतित होना स्वाभाविक भी है।

यहां यह भी बता दें कि जिस तरह से कुछ दिनों पहले शिवराज सिंह चौहान का वीडीयो वायरल हुआ जिसमें प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की रणनीति का खुलासा करते उन्हें दिखाया गया है। उसके बाद से ही यह कयास लगने लगे थे कि मंत्रिमंडल का विस्तार जब भी होगा शिवराज खेमे को निराशा ही हाथ लगनी है। वही हुआ। कहने के लिए भाजपा के रणनीतिकार बीती देर रात तक मान मनौव्वल में जुटे रहे। प्रदेश प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे ने पार्टी के सीनियर विधायकों से एक-एक कर खुद वार्ता की। फोन पर बात कर मनाने और समझाने की कोशिश की। अंततः भाजपा सीनियर विधायकों को घर बैठाने में सफल रही जिससे मंत्रिमंडल में नए चेहरों और खासतौर से सिंधिया समर्थकों को मौका दिया जा सका।

विंध्य क्षेत्र में मायूसी

अब विंध्य क्षेत्र जिसे भाजपा का गढ़ भी माना जाता है की चर्चा के बिना मौजूदा सियासी कहानी अधूरी रह जाएगी। यहां यह बता दें कि प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर शुरुआत से ही चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। गत 21 अप्रैल को गठित मंत्रिमंडल काफी छोटा रहा जिसके चलते कम लोगों को ही जगह मिल सकी। इससे विंध्य के किसी भी नेता को मंत्री बनने का मौका नहीं मिल पाया। यहां तक कि शिवराज चौहान की पूर्व सरकार में खनिज मंत्री रहे रीवा के रांजेंद्र शुक्ल, नागेंद्र सिंह नागौद, सीधी से केदारनाथ शुक्ला, धौहनी से कुंवर सिंह टेकाम, सिंगरौली से रामलल्लू वैश्य, चुरहट के शरदेंदु तिवारी, गिरीश गौतम ये कुछ ऐसे नाम है जिन्हें ले कर इस बार बड़ी-बड़ी बातें की जा रही थीं। माना जा रहा था कि इनमें से कइयों को मंत्री बनने का मौका मिलेगा। लेकिन निराशा ही हाथ लगी।

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आसां नहीं डगर पनघट की

राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर फिलहाल प्रदेश प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे वरिष्ठों को मनाने में सफल जरूर रहे हैं। लेकिन यह स्थिति हमेशा कायम रहेगी ऐसा भी नहीं है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी चुप लगा कर बैठने वाली नहीं। अब वो करीने से भाजपाई सिंधिया की तलाश में जुट जाएंगे या जुट गए हैं जो मध्य प्रदेश की सियासत में एक बारगी फिर से गर्मी ला सके। हालांकि इसके लिए इंतजार करना होगा विधानसभा उपचुनाव तक।

शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल के नए मंत्री

गोपाल भार्गव
विजय शाह
जगदीश देवड़ा
बिसाहूलाल सिंह
यशोधराज सिंधिया
भूपेंद्र सिंह
एदलसिंह कंषाना
बृजेंद्र प्रताप सिंह
विश्वास सारंग
इमरती देवी
डा प्रभुराम चौधरी
महेंद्र सिंह सिसोदिया
प्रद्युमन सिंह तोमर
प्रेम सिंह बघेल
प्रेम सिंह पटेल
ओमप्रकाश सकलेचा
उषा ठाकुर
अरविंद्र सिंह भदौरिया
मोहन यादव भदौरिया
हरदीप सिंह डंग
राजवर्धन सिंह शपथ
भरत सिंह
इंदर सिंह परमार
राम खिलावन पटेल
राम किशोर कांवरे
बृजेंद्र सिंह यादव
गिर्राज डंडौतिया
सुरेश धाकड़
ओपीएस भदौरिया

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