चार पहिया वाहनों के बंपर गार्ड हादसों में साबित होते हैं और भी खतरनाक, यहां पढ़ें परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट

चार पहिया वाहनों के बंपर गार्ड हादसों में साबित होते हैं और भी खतरनाक, यहां पढ़ें परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट

suresh mishra | Publish: Mar, 14 2018 12:33:15 PM (IST) Satna, Madhya Pradesh, India

जिले के आला अधिकारियों के वाहनों में लगे हैं बंपर, नहीं खुलते एयर बैग, दो फिक्स प्वाइंटों पर तेज झटके से बन जाते हैं खतरनाक हालात

सतना। क्या आपको मालूम है कि अपने चार पहिया वाहन की सुरक्षा के नाम पर वाहन के आगे जो बंपर गार्ड आप लगा रहे हैं वह हादसे के वक्त आपके लिए ज्यादा खतरनाक साबित होंगे। हादसे से सुरक्षा करने की बजाय आपकी जान जोखिम में डाल सकते हैं। यही वजह है कि केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्रालय ने गत माह चेतावनी जाहिर करते हुए वाहनों में बंपर गार्ड का इस्तेमाल गैर कानूनी करार दे दिया है। लेकिन, इन आदेशों का पालन जिले में नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि जिले के आला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के वाहनों में भी ये गैरकानूनी बंपर गार्ड लगे हुए हैं।

व्यापक पैमाने पर हुई मौत

राष्ट्रीय स्तर पर सड़क दुर्घटनाओं से व्यापक पैमाने पर हुई मौत और घायलों की संख्या को देखते हुए जब इसकी पड़ताल की गई तो पाया गया कि वे उन वाहनों में ज्यादा मौतें और लोग घायल हुए हैं जिन वाहनों में आगे बंपर गार्ड लगे हुए हैं। तकनीकि स्तर पर सेफ्टी टेस्ट कराए जाने पर पाया गया कि वाहनों को कंपनियों द्वारा सेफ्टी मापदंडों के अनुरूप तैयार किया जाता है और उसी के आधार पर उसमें सुरक्षा फीचर लगाए जाते हैं। ताकि एक्सीडेंट आदि होने पर वाहन में बैठे लोगों को कम से कम नुकसान पहुंचे। इसमें एयर बैग सहित अन्य फीचर शामिल होते हैं।

दुर्घटनाओं के शोध के बाद लाइन जारी

एअर बैग को इस हिसाब से लगाया जाता है कि वाहन में किस तरह से कितना झटका लगेगा तो वह खुलेगा। लेकिन बंपर गार्ड लगा देने से वाहन के तय स्थल पर झटका नहीं लग पाता है और एअर बैग या तो नहीं खुलता या फिर समय पर नहीं खुलता जिससे वाहन में बैठे लोग घायल हो जाते हैं या फिर मौत भी हो जाती है। दुर्घटनाओं के शोध के बाद केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने सुरक्षा गाइड लाइन जारी की। इसके तहत शासन स्तर से गत माह एक आदेश जारी किया गया।

वाहन कानून 1988 की धारा 52 का उल्लंघन

जिसमें कहा गया कि ऐसे बंपर गार्ड का उपयोग मोटर वाहन कानून 1988 की धारा 52 का उल्लंघन माना जाएगा। और इसे लगाने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गये। लेकिन जिले में यह शासनादेश हवाहवाई ही साबित हुआ। हजारों की संख्या में चार पहिया वाहनों में बंपर गार्ड लगे हुए हैं, जिनमें जिले के आला अफसरान, जनप्रतिनिधि सहित अन्य लोग शामिल हैं।

इसलिए खतरनाक है बंपर
वाहन सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, वाहनों के आगे लगाए जाने वाले बंपर गार्ड न केवल दूसरे लोगों के लिए बल्कि भारी टक्कर की हालत में गाड़ी में बैठे लोगों के लिए भी घातक साबित होते हैं। ये बंपर गार्ड जिन दो प्वॉइंट पर लगाए जाते हैं, टक्कर के बाद सारा एक्सीडेंट का साफ फोर्स वहीं सिमट जाता है।

लोगों को ज्यादा नुकसान

इससे गाड़ी में बैठे लोगों को ज्यादा नुकसान पहुंचता है। यही नहीं इसके चलते कारों में आगे लगे एयरबैग के सेंसर भी सही ढंग से काम नहीं कर पाते। लिहाजा दुर्घटना की स्थिति में गाड़ी के एयरबैग नहीं खुलते। इसके अलावा छोटी-मोटी दुर्घटनाओं में भी गाड़ी के सामने आने वाले लोगों को इसके चलते चोट पहुंचने की आशंका बनी रहती है।

फैशन के चलते प्रचलन है आम
लोगों का कहना है कि ज्यादातर लोग फैशन के चलते बंपर गार्ड लगवाते हैं तो कुछ अपने वाहनों की सुरक्षा के हिसाब से इसे लगाना पसंद करते हैं। जबकि ये वाहन में बैठे लोगों की सुरक्षा के लिये ज्यादा नुकसानदायक होता है। लोगों की इस नासमझी का फायदा कार डेकोरेटरों द्वारा उठाया जा रहा है।

इनके वाहनों में लगा बंपर गार्ड
जिले की प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी का जिम्मा देखने वाले आला अधिकारी ही अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं। साथ ही इनके द्वारा शासकीय आदेशों की अवहेलना की जा रही है। नियमों के विपरीत एसपी राजेश हिंगणकर, एएसपी गुरुकरण सिंह, वन विभाग के अधिकारी सहित जिला प्रशासन के कई नुमाइंदों के वाहनों में बंपर लगे हुए हैं। देखा जाए तो ये सभी अधिकारी आरटीओ की कार्रवाई के दायरे में आ रहे हैं। लेकिन, इन पर कार्रवाई तो दूर परिवहन महकमा समझाइश देकर हटवाने की कोशिश तक नहीं कर सका है।

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