सरकारी स्कूलों के बच्चों की आंखें कमजोर

सरकारी स्कूलों के बच्चों की आंखें कमजोर
Children's eyes weak in government schools

Vikrant Kumar Dubey | Publish: Jun, 15 2019 05:44:26 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

चौंकाने वाला खुलासा: राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत 632 विद्यालय के छात्रों की जांची गई आंख

सतना. सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की आंखें कमजोर हो रही हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत कराई गई जांच में हुआ है। जिले के 632 सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे 1 लाख 6 हजार 528 बच्चों के नेत्रों की जांच की गई। इनमें से 7737 बच्चोंं की आंखों में नेत्र रोग विभाग के अमले ने कमजोरी पाई। कमजोर आंख वाले सभी बच्चों को चश्मा वितरण का दावा किया जा रहा है। सीएमएचओ डॉ विजय कुमार आरख ने बताया कि जिले के सरकारी विद्यालयों में राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत अप्रेल 2018 से मार्च 2019 तक अभियान चलाया गया। जिले के 632 विद्यालयों के सात हजार से अधिक बच्चों की दृश्यता कमजोर मिली।


मोबाइल-टीवी से बढ़ रही समस्या

नेत्र रोग विशेष:ह्लद्व:ा डॉ. अरुण त्रिवेदी ने बताया कि जिले में बड़ी संख्या में बच्चों में दृष्टिदोष पाए जाने की मुख्य वजह मोबाइल, टीवी, कम्प्यूटर का अत्याधिक :ष्शश्च4ह्म्द्बद्दद्धह्ल:पयोग है। लोगों की बदलती जीवन शैली के कारण खेलकूद के तौर-तरीकों में भी बदलाव आ गया है। बच्चे ज्यादा समय मोबाइल, कम्प्यूटर, टीवी, लैपटॉप में बिता रहे हैं। इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों पर नजर रखें। मोबाइल, कम्प्यूटर, टीवी, लैपटॉप के :ष्शश्च4ह्म्द्बद्दद्धह्ल:पयोग का समय निर्धारित करें। एक बार दृष्टिदोष सामने आने पर चिकित्सक से परामर्श लेते रहें। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही खतरनाक हो सकती है।

नेत्र परीक्षण के बाद बांटे चश्मा और दवाइयां
नेत्र रोग विभाग ने बच्चों की आंखों की कमजोरी को गंभीरता से लिया है। दृष्टिदोष पाए गए सात हजार से अधिक बच्चों को चश्मे का नंबर दिया गया है। सभी बच्चों को नि:शुल्क चश्मा और दवाइयां भी दी गई हैं। जिन बच्चों में दृष्टिदोष पाया गया है :ष्शश्च4ह्म्द्बद्दद्धह्ल:नके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है। हर छह माह में बच्चों के नेत्रों का परीक्षण किया जा रहा है। अभिभावकों को भी निर्धारित समय पर बच्चों की आंखों की जांच कराने परामर्श दिया गया है।


मैहर और अमरपाटन डेंजर जोन में

मैहर और अमरपाटन विकासखंड में सबसे ज्यादा 800 से अधिक बच्चों की आंखें कमजोर पाई गई हैं। दूसरे नंबर पर :ष्शश्च4ह्म्द्बद्दद्धह्ल:चेहरा रामनगर क्षेत्र में भी बच्चों में दृष्टिदोष मिला। नेत्र रोग विभाग की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। रिपोर्ट बता रही कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों की जीवन शैली तेजी से बदल रही है। इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।


आंखों की कमजोरी की वजह
- आंखों की मांसपेशियों में कमजोरी आना

- टीवी, वीडियो गेम, मोबाइल गेम में घंटों बिताना
- खान-पान में पर्याप्त पोषक तत्वों की कमी

- आंखों में संक्रमण के कारण
- सिरदर्द व अन्य बीमारियों के कारणएेसे कर सकतें है


बचाव के तरीके

- ध्यान रखें कि बच्चे टीवी, वीडियो गेम, मोबाइल गेम घंटों तो नहीं खेलते
- बच्चों के खान-पान में विशेष ध्यान दें, पर्याप्त पोषक और संतुलित आहार दें

- बीमारी का पता चलते ही विशेष:ह्लद्व:ा चिकित्सक से परामर्श लें
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां, ड्राप और चश्मा न पहनें

 

बच्चों की दिनचर्या का विशेष ख्याल रखें
नेत्र रोग विशेष:ह्लद्व:ा डॉ. अरुण त्रिवेदी ने बताया बच्चों की दिनचर्या का विशेष ख्याल रखें। टीवी, वीडियो, मोबाइल गेम से दूर रखें। फास्ट फूड की बजाय पोषक तत्वों से भरपूर भोजन खिलाएं।

हकीकत
विकासखंड विद्यार्थी

सोहावल 778
अमरपाटन 822

चेहरा 840
नागौद 828

रामपुर बाघेलान 828
मैहर 889

अमदरा 397
रामनगर 793

मझगवां 779
कोठी 783

कुल 7737

(नोट: ब्लॉकवार दृष्टिदोष पीडि़त बच्चों की संख्या)

 

नेत्र परीक्षण किए गए सरकारी स्कूल की संख्या- 632
कुल बच्चों का नेत्र परीक्षण-106528

कुल बच्चों में मिला दृष्टिदोष-7737
चश्मा और दवा वितरित बच्चों की संख्या- 7737

 

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