प्रियांश-श्रेयांश हत्या कांड: 6 गवाहों ने तीनों आरोपियों को पहचाना, जुटाए जा रहे पुख्ता सबूत, ताकि..

प्रियांश-श्रेयांश हत्याकांड: 6 गवाहों ने तीनों आरोपियों को पहचाना, जुटाए जा रहे पुख्ता सबूत, ताकि..

By: suresh mishra

Published: 10 Mar 2019, 01:46 PM IST

सतना। चित्रकूट के बहुचर्चित प्रियांश-श्रेयांश अपहरण और हत्याकांड के तीन आरोपियों की शनिवार दोपहर पहचान परेड कराई गई। कार्यपालिक मजिस्टे्रट, तहसीलदार रघुराजनगर के सामने छह गवाहों ने तीन मुख्य आरोपियों को पहचाना। एक अन्य गवाह से भी शीघ्र ही आरोपियों की पहचान कराई जाएगी। सूत्रों ने बताया कि प्रियांश-श्रेयांश की अपहरण के बाद हत्या करने वाले आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं। ताकि कोई भी अरोपी बचे न और सजा दिलाई जा सके।

छह गवाहों से पहचान कराई

इसी कवायद के तहत सेंट्रल जेल में तीन आरोपियों पदम शुक्ला पिता रामकरण शुक्ला (25) निवासी रघुवीर मंदिर के पास जानकीकुंड थाना नयागांव, आलोक उर्फ लकी तोमर पिता सत्येंद्र सिंह उर्फ मुन्ना (19) निवासी तेंदुरा थाना भिसंडा जिला बांदा उत्तर प्रदेश, राजू द्विवेदी पिता राकेश द्विवेदी (23) निवासी भभुआ थाना मरका जिला बांदा उत्तर प्रदेश की शनिवार दोपहर कार्यपालिक मजिस्टे्रट के सामने छह गवाहों से पहचान कराई गई।

बारातियों से मोबाइल लेकर इंटरनेट कॉलिंग की

सभी छह गवाहों ने तीनों आरोपियों को पहचाना। आरोपियों ने पहली बार पहले गवाह से मोबाइल मांगकर प्रियांश-श्रेयांश के परिजनों से बात की थी। परेड के दौरान पहले गवाह ने आरोपियों की पहचान की। इसके बाद एक बारात निकलने के दौरान आरोपियों द्वारा चार बारातियों से मोबाइल लेकर इंटरनेट कॉलिंग की गई थी। जिन बारातियों का मोबाइल लिया गया था सभी एक ही समुदाय के थे। इन चार बारातियों ने भी आरोपियों की पहचान की। अर्तरा का मकान आरोपियों ने झूठ बोलकर किराए पर लिया था। मकान मालिक ने भी सभी आरोपियों को परेड के दौरान पहचाना।

इसलिए कराई गई पहचान परेड
बताया गया, जटिल एवं संदिग्ध अपराधों में दिए अपराधियों की विधिक प्रक्रिया से जेल के भीतर गवाहों द्वारा कार्यपालिक दंडाधिकारी की उपस्थिति में पहचान कराई जाती है। इसमें तीन से अधिक उसी कद, काठी, आयु और कपड़े में व्यक्तियों को एक साथ खड़ा कर वास्तविक अपराधी का पहचान कराना होता है। इस प्रक्रिया के तहत यदि अपराधी की पहचान हो जाती है तो इस बात के पुख्ता सबूत प्राप्त होते हैं कि घटना दिनांक को इसी व्यक्ति द्वारा घटना कारित की गई है। इसका उल्लेख भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 9 में भी किया गया है। अब यही साक्षी कोर्ट में कथन दर्ज कराएंगे।

फोटो लेने वाले ने मना किया
सूत्रों की माने तो पहचान परेड के लिए सात गवाहों को बुलाया जाना था। लेकिन, जिस राहगीर ने आरोपियों को अपना मोबाइल देने के बाद आशंका होने पर उनकी बाइक की फोटो ली थी, उसने आरोपियों को अंधेरा होने के कारण पहचान करने से इंकार कर दिया। इसके बाद उसे बुलाया ही नहीं गया।

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