स्कूल बंद, किताबों में कमीशन का धंधा शुरू

निजी स्कूल संचालकों की मनमानी अभिभावकों पर पड़ रही भारी

By: Sukhendra Mishra

Published: 12 May 2020, 11:43 PM IST

सतना. कोरोना वायरस एवं लाकडाउन में आर्थिक तंगी से गुजर रहे परिवारों को राहत देते हुए राज्य सरकार ने इस साल निजी स्कू  लों की फीस वृद्धि पर रोक लगा दी है। लाकडाउन के कारण स्कूल बंद हैं। लेकिन आनलाइन पढ़ाई के नाम पर निजी स्कूलों में किताबों का धंधा शुरू हो गया है। निजी स्कूल संचालक अभिभावक के मोबाइल में मैसेज भेज उन पर किताब खरीदने का दबाव बना रहे हैं।
किताब खरीदना तो ठीक अभिभावक की समस्या यह है कि हर निजी स्कू  ल संचालक ने अपनी स्टेशनी दूकान फिक्स कर रही है। उस विद्यालय की किताबे सिर्फ एक पुस्तक दुकान पर ही मिलती है। फिक्स दुकान से अभिभावक महंगी किताब खरीद कर लुटने को मजबूर है।
50 फीसदी कमीशन का खेल
शहर की हर बड़ी निजी स्कूल अलग-अलग लेखकों की पुस्तक सिर्फ इसलिए चलाते है कि उन्हें विक्रेता से मोटा कमीशन मिल सके। अविभावकों का कहना है कि इस साल भी पुस्तकों के दाम 20 फीसदी तक बढ़ा दिए गए हैं। उनकी मजबूरी यह है कि दूसरी दुकानों में बुक न मिलने के कारण वह फिक्स दुकान से महंगी किताब खरीने को मजबूर हैं।

अक्टूबर में शुरू होता है फिक्सिंग का खेल
शहर के नामी निजी विद्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया की निजी स्कू  ल फीस से अधिक कमीशन किताब विक्रेता एवं प्रकाशक से सांठगांठ कर कमाते हैं। कमीशन फिक्सिंग का खेल सितंबर अक्टूबर में शुरू होता है। प्रकाशन स्कू  ल में आकर छात्र संखा के हिसाब से किताबों का सिलेवस तय करते है और उनकी छपाई का कार्य शुरु कर देते हैं। कमीशन के लिए निजी विद्यालय केजी से लेकर 12 वीं तक निजी प्रकाशकों की कितावे चलाकर 40 से 50 फीसदी कमीशन काटते हैं।
हर साल बदल देते हैं बुक
सीबीएसई कोर्स संचालित करने वाले निजी विद्यालय बड़े पुस्तक विक्रेताओं से मिलकर अविभावों को जमकर लूटते हैं। इतना ही नहीं दूसरे साल इन कितावों का उपयोग न हो पाए। इसलिए चालबाजी करते हुए स्कूल संचालक हर साल सेट की दो तीन किताबे बदल देते हैं। वहीं विक्रेता अविभावकों को पूरा सेट बेचते हैं। अलग से कितना न मिलने के कारण घर में पूरानी किताव उपलब्ध होने के बाद भी अविभावक 4 से 5 हजार रूपए का किताबों का सेट खरीदने को मजबूर हैं।

Sukhendra Mishra Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned