COVID-19: प्रवासी मजूदों की उपेक्षा कहीं जानलेवा न बन जाय

-पत्रिका की पड़ताल में हुआ खुलासा
-क्वारंटीन सेंटर्स बदहाल
-मजदूरों को भेजा जा रहा सीधे घर

By: Ajay Chaturvedi

Published: 10 May 2020, 02:38 PM IST

सतना. लंबी लड़ाई लड़ने के बाद किसी तरह अपने गांव-घर पहुंच रहे प्रवासी मजदूरों का कोई पुरसाहाल नहीं। जिले में न उनके ठहरने का समुचित इंतजाम है न खानो-पीने का। अव्वल तो यह कि एक बार इन क्वारंटीन सेंटर्स में मजदूरों को दाखिल कराने के बाद सरकारी अमला उन्हें भूल चुका है। ऐेसे में यहां न शारीरिक दूरी का खयाल रखा जा रहा न ही साफ-सफाई का। इस हाल में कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ने का अंदेशा पैदा हो गया है।

बात सतना की हो रही है, जहां सूरत-मुंबई जैसे संवेदनशील जिलों से आने वाले ज्यादातर प्रवासी मजदूरों को सीधे उनके घरों को भेज दिया जा रहा। पूछने पर जिम्मेदार जवाब देते हैं कि उन्हें घर पर ही क्वारंटीन रहना है। प्रशासन की ओर से जो क्वारंटीन सेंटर बनाए भी गए हैं उनका हाल बहुत बुरा है। न वहां साफ-सफाई है न बिजली। महज हाथ धोने को एक साबुन की टिकिया और सोने को एक गद्दा उपलब्ध करा दिया गया है। इन मजदूरों के खाने-पीने का इंतजाम खुद ही करना होता है। लिहाजा घर वाले खाना पहुंचा रहे हैं। हाल ये है कि संवेदनशील इलाकों से आने वाले इन प्रवासी मजदूरों के संपर्क में वो लोग रोजाना आ रहे हैं। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया है।

कहा तो गया था कि प्रवासी मजदूरों को गांव के स्कूलों व सामूदायिक भवनों में रखा जाएगा लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। प्रशासन ने जो क्वारंटीन सेंटर बनाए हैं बुनियादी सुविधाएं नदारद है। अफसर एक बार मजदूरों को पहुंचा कर गए तो फिर झांकने तक नहीं आते। ऐसे में यहां रखे गए लोग मजे में घूम--फिर रहे हैं। इसके चलते ग्रामीणों में दहशत है। इसका खुलासा पत्रिका की पड़ताल में हुआ।

अब अगर शहरी सीमा से लगे माधवगढ़ हायर सेकेंडरी स्कूल में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर की चर्चा करें तो वहां सूरत से आए लोग हैं। उनमें से राजेंद्र व धर्मराज ने पत्रिका को बताया कि मुंबई से मैहर तक ट्रेन में साढे चार-साढे चार हजार दे कर पहुंचे हैं। वहां से पैदल जिला अस्पताल पहुंचे। नितिन व पुष्पेंद्र कोरी सूरत से ट्रक से चार-चार हजार रुपये किराया दे कर पहुंचे हैं। इन सभी ने बताया कि स्कूल में पेयजल का इंतजाम तो है पर भोजन घर से ही मंगाना पड़ता है। पंखा व बल्ब तो है पर चालू हालत में नहीं है। उन्हों कहा कि चपरासी ने बताया कि बिजली का कनेक्शन कटा है। ऐसे में जैसे-तैसे टहल कर दिन काट रहे हैं।

Ajay Chaturvedi
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