सरकार का यू टर्न... लागू होने से पहले 24 घंटे में वापस लिया कोरोना योद्धा का आदेश

प्रदेश सरकार ने एक आदेश निकाल कर सरकारिता विभाग से जुडे़ कर्मचारियों को कोरोना योद्धा घोषित करने कहा। इससे पहले कि यह आदेश लागू होता 24 घंटे के पहले ही इसे वापस ले लिया गया। सफाई दी गई कि वित्त विभाग से परमिशन नहीं ली थी। इधर 77 कर्मचारियों की मौत के बाद हजारों सहकारिता कार्मिकों की उम्मीद पर पानी फिर गया है।

By: Ramashanka Sharma

Published: 05 May 2021, 09:07 AM IST

सतना. कोरोना की तेज संक्रमण वाली दूसरी लहर में चल रहे उपार्जन कार्य में सहकारिता विभाग, सहकारी बैंक एवं सहकारी समितियों के कर्मचारी फील्ड में लगातार सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से अब तक 77 कर्मचारियों की मौत कोरोना के कारण हो चुकी है। इसको देखते हुए सहकारिता विभाग मंत्रालय के अपर मुख्य सचिव अजीत केसरी ने इन कर्मचारियों को कोरोना योद्धा कल्याण योजना में सम्मिलित करने संबंधी आदेश जारी किये थे। 3 मई को जारी ये आदेश लागू हो पाते कि इससे पहले ही 4 मई को इसे निरस्त करने का आदेश जारी हो गया। हालांकि सतह पर आने से पहले ही यह प्रक्रिया सरकारी दस्तावेजों में गुपचुप कर ली गई लेकिन जैसे ही यह मामला अब सार्वजनिक होता जा रहा है उससे सरकार की किरकिरी भी होनी शुरू हो गई है।

यह जारी हुआ था आदेश

मिली जानकारी के अनुसार अपर मुख्य सचिव सहकारिता अजीत केसरी ने 3 मई को पत्र क्रमांक 454/657/2021/15-2 के तहत जारी पत्र में बताया था कि सहकारिता विभाग, सहकारी बैंक एवं प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के कर्मचारी उपार्जन कार्य में सीधे संलग्न हैं। ये सभी फील्ड में लगातार अपनी सेवाएं देकर उपार्जन के कार्य को पूर्ण कर रहे हैं। विभिन्न जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सहकारिता विभाग, सहकारी बैंक एवं सहकारी संस्थाओं के लगभग 77 कर्मचारियों का उनकी सेवाओं के दौरान कोविड-19 के कारण निधन हो चुका है। कलेक्टर को संबोधित इस पत्र में कहा गया है कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए इस तथ्य तथ्य को ध्यान में रखते हुए राजस्व विभाग के परिपत्र के प्रावधानों के तहत अपने जिले के सहकारिता विभाग, सहकारी बैंक एवं प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों व विपणन सहकारी समितियों के जो कर्मचारी उपार्जन एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के कार्य में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संलग्न हैं, उन्हें कोविड योद्धा के रूप में सम्मिलित करने पर विचार करें।

अगले दिन सुबह वापस ले लिया गया आदेश

3 मई को जारी अजीत केसरी का यह आदेश लागू हो पाता इससे पहले ही 4 मई की सुबह संयुक्त आयुक्त सहकारिता अरविन्द सिंह सेंगर ने इस आदेश को वापस लिये जाने संबंधी पत्र सभी कलेक्टरों को जारी कर दिया। स्पष्ट किया गया कि 3 मई के पत्र पर कोई कार्यवाही नहीं की जानी है।

यह सामने आई सफाई

सहकारिता विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सहकारिता आयुक्त ने राजस्व विभाग के आदेश को समझने में त्रुटि कर दी थी। चूंकि इस मामले में वित्त विभाग की सहमति अनिवार्य होती है क्योंकि कोरोना योद्धा के निधन पर 50 लाख रुपये की बड़ी राशि दिये जाने का प्रावधान है। ऐसे में वित्त विभाग से सहमति नहीं ली गई थी। लिहाजा इस आदेश को वापस लिया गया है। हालांकि यह भी बताया गया है कि इस मामले को सीएम के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।

यह है कोविड योद्धा कल्याण योजना

योजना में पात्र कर्मी के कल्याण के लिये उनके दावेदार को 50 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। संगरोध अवधि (क्वारेंटाइन पीरियड) के दौरान या कोविड योद्धाओं के उपचार के लिये किसी भी प्रकार का खर्च कर्मचारी या उसके दावेदार को भुगतान या देय नहीं होता। योजना में दी गई राशि पात्र कर्मी द्वारा व्यक्तिगत रूप से ली गई अन्य बीमा पॉलिसी अथवा शासन के कर्मी के लिये लागू बीमा योजना के तहत मिलने वाली राशियों के अतिरिक्त होगी।

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