lockdown में कम हो गई दूध की खपत, रोज डंप हो रहा डेढ़ लाख लीटर

दुग्ध डेयरी संचालकों की आफत, पशु आहार भी महंगा

 

By: Pushpendra pandey

Published: 30 Mar 2020, 01:33 AM IST

सतना. लॉकडाउन की सबसे अधिक मार दुग्ध उत्पादक किसान एवं डेयरी संचालकों पर पड़ रही है। एक सप्ताह पूर्व तक जिले में प्रति दिन 3.50 लाख लीटर दूध की खपत होती थी। अब लाकडाउन के चलते दुग्ध उत्पाद की बिक्री बंद होने से डेयरियों में प्रतिदिन डेढ़ लाख लीटर दूध डंप हो रहा। खरीदार न मिलने से डेयरी संचालक परेशान हैं।

डेयरी संचालकों पर मार
पशु आहार के दाम बढऩे व दुग्ध की खपत कम होने से परेशान डेयरी संचालकों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर दूध नहीं बिक रहा तो उधर पशु पालना भी मुश्किल हो गया है। डेयरी संचालकों का कहना है कि इस समय सिर्फ घरों में दूध की आपूर्ति हो रही है। होटल बंद होने से शहर में ७० फीसदी दूध की खपत कम हो गई है। एेेसे में डयेरी संचालकों के समझ में यह नहीं आ रहा कि वह इस बचे हुए दूध का क्या करें?


गांव से दूध नहीं उठा रहे दूधिया
शहर के सभी होटल, ढाबा बंद होने से गांव से दूध लाने वाले दूधियों का दूध से लागत निकालना मुश्किल हो गया है। इससे बचने दूधियों ने गांव से दूध उठाना बंद कर दिया है। इसकी मार पशु पालन करने वाले किसानों पर पड़ रही। दूध की बिक्री न होने से वह दही बनाने को मजबूर हैं। वहीं पशु आहार के दाम उछलने से उनके लिए पशु पालना मुश्किल हो गया है।


पशु आहार के मूल्य नियंत्रित करे प्रशासन
डेयरी संचालकों का कहना है कि आपातकाल में वे होटल खुलवाने की मांग नहीं कर सकते लेकिन इस संकट की घड़ी में डेयरी संचालकों को बचाने के लिए प्रशासन को रोज बढ़ रहे पशु आहार के मूल्य नियंत्रित करना चाहिए। पशु आहार उत्पादन बंद होने से भूसा एवं चोकर के दाम ५०० रुपए प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं। मांग की गई कि प्रशासन पशुआहार उत्पादन इकाइयों को चालू करने की अनुमति दे और मूल्य वृद्धि पर रोक लगाए।


मूल्य नियंत्रित करना होगा
विजय साहू दुग्ध डेयरी संचालक लालता चौक ने बताया कि लाकडाउन के कारण ७० फीसदी दूध की खपत कम हो गई है। इससे डेयरी संचालक परेशान हंै। बचे हुए दूध को फाड़ कर कुछ व्यापारी पनीर निकाल रहे हैं। यदि प्रशासन को डेयरियों को बंद होने से बचाना है तो पशु आहार के मूल्य को नियंत्रित करना होगा।

ऐसी है सतना की हकीकत
- दूध की आपूर्ति 3.40 लाख लीटर
- घरों में खपत 2 लाख लीटर
- डेयरी एवं होटल में खपत 1.40 लाख लीटर
- वर्तमान घरों में खपत 1.90 लाख लीटर
- वर्तमान में होटल में खपत 00 लीटर
- दूध बच रहा 1.50 लाख लीटर

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Pushpendra pandey Desk
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