चुनाव लड़ने से पहले दागी प्रत्याशी को अखबार में विज्ञापन देकर बताना होगा...हां मुझ पर ये अपराध

चुनाव लड़ने से पहले दागी प्रत्याशी को अखबार में विज्ञापन देकर बताना होगा...हां मुझ पर ये अपराध

Suresh Kumar Mishra | Publish: Oct, 13 2018 04:39:38 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 04:39:39 PM (IST) Satna, Madhya Pradesh, India

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालना में जारी किया परिपत्र

सतना। इस बार आपराधिक रेकार्ड वाला प्रत्याशी अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को छिपा नहीं सकेगा। प्रत्याशियों के लंबित आपराधिक रेकार्ड को लेकर चुनाव आयोग काफी गंभीर है। उसने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं और स्पष्ट कर दिए हैं कि प्रत्याशी को पर्चा दाखिल करने के बाद तीन बार अपने लंबित अपराधों का ब्यौरा अखबार सहित इलेक्ट्रानिक मीडिया में जारी करना पड़ेगा।

विधानसभा चुनावों में कोई प्रत्याशी अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों पर पर्दा नहीं डाल पाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए चुनाव आयोग ने इस संबंध में गाइडलाइन जारी कर दी है। प्रत्याशी को अपने खिलाफ दर्ज ऐसे मामलों की जानकारी तीन-तीन बार प्रदेश के बड़े अखबारों और न्यूज चैनलों में जारी करना होगी।

सर्वाधिक समझी जाने वाली भाषा में होगा लेख
भारत निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में 10 अक्टूबर को जारी आदेश में बताया है कि सभी प्रत्याशियों को नाम वापस लेने की अंतिम तारीख से लेकर मतदान की तारीख के बीच अलग-अलग दिनों में तीन बार प्रमुख अखबारों और समाचार चैनलों में विज्ञापन जारी कर अपने खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी सार्वजनिक करना होगी। साथ ही यह जानकारी स्थानीय सर्वाधिक समझी जाने वाली भाषा (सतना जिले में हिंदी) में होगी। इसके लिए प्रारूप भी जारी किया है।

पार्टी अपनी वेबसाइट में सार्वजनिक करेगी
आयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की रिट पिटीशन (सिविल) नं. 536/2011 के फैसले के अनुसार प्रत्याशी को बोल्ड लेटर में अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी पर्चे में देनी होगी। यदि कोई प्रत्याशी किसी पार्टी की टिकिट से लड़ रहा है तो उसे अपने आपराधिक लंबित मामलों की जानकारी पार्टी को देनी होगी। जिसे पार्टी अपनी वेबसाइट में सार्वजनिक करेगी। इसके साथ ही प्रत्याशी को ज्यादा प्रकाशित होने वाले अखबारों और इलेक्ट्रानिक मीडिया में लंबित अपराधों की जानकारी तय प्रारूप में प्रकाशित और प्रसारित करवानी होगी। यह जानकारी तीन बार प्रकाशित और प्रसारित करानी होगी। साथ ही प्रत्याशी को नामांकन फॉर्म में अपनी चल-अचल सम्पत्ति और शैक्षणिक योग्यता के बारे में भी बताना होगा। चुनाव आयोग ने इन बातों को ध्यान में रखते हुए नामांंकन पत्र के फॉर्म नंबर 26 में बदलाव कर दिए हैं।

हाइकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में गया था मामला
बताया गया है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने दिल्ली हाई कोर्ट से मांग की थी कि चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीखों का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन राजनीति का आपराधिकरण रोकने और पारदर्शिता लाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का पालन कैसे होगा, इस पर कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है। इसलिए तत्काल आदेश जारी कर हर प्रत्याशी के लिए अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को सार्वजनिक करने संबंधी निर्देशों का पालन अनिवार्य किया जाए। हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी थी।

प्रकाशन का देना होगा प्रमाण-पत्र
विधानसभा चुनाव के परिणामों में विजयी प्रत्याशियों को परिणाम जारी होने के 30 दिन के अंदर यह प्रमाण चुनाव आयोग के समक्ष पेश करना होगा कि उन्होंने किन-किन अखबारों और न्यूज चैनलों में अपने आपराधिक मामलों की जानकारी सार्वजनिक की थी।

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