Old Tales Madhya Pradesh: जब एक डाकू जंगल छोड़कर राजनीति में आ गया, फिर इस पार्टी से बना तीन बार विधायक

Old Tales Madhya Pradesh: जब एक डाकू जंगल छोड़कर राजनीति में आ गया, फिर इस पार्टी से बना तीन बार विधायक

Suresh Kumar Mishra | Publish: Oct, 13 2018 01:29:48 PM (IST) Satna, Madhya Pradesh, India

अतीत का झरोखा: दस्यु से कांग्रेस नेता बने प्रेम सिंह बरौंधा की कहानी

सतना। यह कहानी दस्यु प्रभावित विधानसभा क्षेत्र चित्रकूट के प्रेम सिंह बरौंधा की है। सीमावर्ती उत्तरप्रदेश में सक्रिय दस्यु गैंग के सदस्य प्रेम सिंह ने 1982-83 में मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष आत्मसमर्पण किया। कुछ समय जेल काटी और फिर राजनीति में सक्रिय हो गए।
पहली बार निर्दलीय चुनाव लड़ा, सम्मानजनक वोट हासिल किए, पर सफलता नहीं मिली।

बरौंधा ने दो साल बाद कांग्रेस की सदस्यता ली और 1998 में विधायक बने। प्रेम सिंह तो अर्जुन सिंह के भक्त थे। जब अर्जुन ने 1991 में सतना से लोकसभा चुनाव लडऩे की तैयारी की तो पूर्व कृषि मंडी अध्यक्ष ददन सिंह तिवारी की सलाह पर प्रेम को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई।

होटल पार्क का कमरा नंबर 14 अघोषित आवास
ददन का मानना था कि चित्रकूट के कांग्रेस नेता रामचंद्र वाजपेयी अर्जुन सिंह का साथ नहीं देंगे। ददन के प्रस्ताव के बाद 1991 के चुनाव में प्रेम ने अर्जुन के लिए प्रचार किया। लोकसभा चुनाव 1996 से पहले अर्जुन ने तिवारी कांग्रेस बनाई तो प्रेम उनके साथ हो लिए। हालांकि, उस बार पराजय हुई। प्रेम सिंह 1998, 2003 और 2013 में विधायक रहे। चित्रकूट से विधायक होने के बाद बरौंधा में उनका घर जरूर था, लेकिन सतना के होटल पार्क का कमरा नंबर 14 'प्रेम भैया' का अघोषित आवास था। सतना की राजनीति में वे इकलौते ऐसे नेता थे, जिनके पीछे बंदूकची साए की तरह साथ चलते थे।

कमरा किराए पर दिया तो शव मिला
1967, 77 और 1989 में चित्रकूट से विधायक रहे रामानंद सिंह 98 के बाद चित्रकूट में कायम हुए उनके वर्चस्व का कारण भय बताते रहे। उन्होंने 2003 में सांसद रहते हुए उमा भारती के प्रस्ताव पर प्रेम सिंह के खिलाफ बतौर भाजपा प्रत्याशी विधानसभा चुनाव लड़ा था, पर वे जमानत भी नहीं बचा पाए। चुनाव में प्रेम सिंह ने पिताजी को बरौंधा में चुनावी कार्यालय खोलने की चुनौती दी थी। एक कार्यकर्ता रमाकांत गर्ग ने उन्हें घर का कमरा दे दिया। इसके कुछ दिनों बाद 30 साल के रमाकांत का शव मझगवां और बरौंधा के बीच रास्ते में पड़ा मिला।

कैसे बागी बने थे प्रेम सिंह
फतेहगंज (उत्तर प्रदेश) के कोलौंहा गांव निवासी प्रेम सिंह पारिवारिक विवाद में अपने पट्टीदार को गोली मारकर बागी हो गए थे। उनका दस्यु समय लगभग 10 वर्ष तक चला। वे उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में छुट-पुट वारदात करते रहते थे। जब कभी पुलिस का पीछा होता तो बरौंधा में अपने रिश्तेदारों के यहां आश्रय ले लेते थे। राजनीति में जमने के बाद ट्रांसपोर्ट व्यवसाय भी किया।

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