सफाई में हर साल एक करोड़ साफ, फिर भी रैंकिंग में फिसड्डी सतना रेलवे स्टेशन

सफाई में हर साल एक करोड़ साफ, फिर भी रैंकिंग में फिसड्डी सतना रेलवे स्टेशन
swachhata abhiyan satna railway Station

Pushpendra Pandey | Updated: 09 Oct 2019, 06:26:08 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

रेलवे स्टेशन का ऐसा है स्वच्छता अभियान

सतना. गांधी जयंती पर जारी रेलवे स्टेशनों की स्वच्छता रैंकिंग में 356वीं रैंक पाने वाले सतना रेलवे स्टेशन की स्वच्छता अभियान की हकीकत बहुत ही गंदी है। यहां स्टेशन की साफ-सफाई में सालाना एक करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। इसके बाद भी स्टेशन परिसर में चारों ओर गंदगी का ढेर लगा रहता है। स्टेशन की साफ-सफाई व्यवस्था निजी हाथों में है। रेल प्रशासन ठेका कंपनी को हर माह 9.4 लाख रुपए देता है। यानी रेलवे स्टेशन की साफ-सफाई में सालाना एक करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा रहे हैं।


70 कर्मी, स्वचलित मशीनें फिर गंदगी
रेलवे स्टेशन की साफ-सफाई के लिए ठेका कंपनी द्वारा कागजों में 70 सफाईकर्मी सहित मैनेजर और सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। स्टेशन की साफ-सफाई स्वचलित मशीनों से करने का दावा किया जा रहा। लेकिन, हकीकत ठीक उलट है। गुरुवार दोपहर सामने आया कि ठेका कंपनी स्वचलित मशीनों का उपयोग ही नहीं कर रही है। इन्हें चार्जिंग के नाम पर कमरे में कैद रखा जाता है। तीन से चार कर्मियों को झाड़ू-पोंछा पकड़ाकर साफ-सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही थी।


मिलीभगत के चलते पिछड़े हम
स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत के तहत रेलवे स्टेशन के पिछडऩे का बड़ा कारण स्थानीय जिम्मेदारों की ठेका कपंनी से मिलीभगत है। साफ-सफाई में की जा रही मनमानी की जानकारी स्थानीय प्रबंधन के जिम्मेदारों को है पर मिलीभगत के चलते सभी मौन साधे रहे। नतीजा स्टेशन को रैंकिंग में सम्मानजनक स्थान प्राप्त नहीं हो पाया।

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