अपना बलिदान देकर भारत में नई परम्परा का सूत्रपात किया

अपना बलिदान देकर भारत में नई परम्परा का सूत्रपात किया
Emperor Dahir Sen celebrates the sacrifice day

Jyoti Gupta | Publish: Jun, 16 2019 09:49:12 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

सम्राट दाहिर सेन का बलिदान दिवस मनाया

 

सतना. पश्चिम रेगिस्तान से आने वाले मजहबी हमलावरों का वार सबसे पहले सिंध की वीरभूमि को झेलना पड़ता था। इसी सिंध के राजा थे दाहिरसेन। उन्होंने युद्ध भूमि में लड़ते हुए प्राण की आहुति दी। उनके बाद उनकी पत्नी, बहन एवं दोनों पुत्रियों ने भी अपना बलिदान देकर भारत में एक नई परंपरा का सूत्रपात किया। उक्त विचार भारतीय सिंधु सभा के अध्यक्ष विजय जग्यासी ने सिंधु नरेश सम्राट दाहिर सेन के बलिदान दिवस पर संस्था द्वारा अमर शहीद हेमू कलानी पार्क में आयोजित विचार गोष्ठी में कही।
महामंत्री अशोक चांदवानी ने बताया, कार्यक्रम की शुरुआत राजा दाहिरसेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। गोष्ठी में प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य गोपीचंद कापड़ी ने कहा कि राजा दाहिरसेन एक प्रजावत्सल राजा थे। गौरक्षक के रूप में उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैली थी। विनोद गेलानी ने कहा, हमें बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए। मौके पर डॉ. होतचंदानी, गोपीचंद कापड़ी, चंद मनवानी, ज्ञान खटवानी, जी डी जसवानी, बूलचंद दूसेजा, गुरमुख दास जसवानी, जितेंद साबनानी, आशीष मंघनानी, नारायण दास, गुलाबी आर्यन गेलानी मौजूद रहे।

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