मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला: निगम इंजीनियरों ने किया 1000 करोड़ का भ्रष्टाचार !

मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला: निगम इंजीनियरों ने किया 1000 करोड़ का भ्रष्टाचार !
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Sukhendra Mishra | Updated: 12 Oct 2019, 01:11:48 AM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

मामला सतना नगर निगम का, एमआईसी ने पास किया लोकायुक्त से जांच कराने का प्रस्ताव

सतना. ठेकेदारों से मिलीभगत कर घटिया निर्माण कार्य कराने के लिए चर्चित नगर निगम इंजीनियरों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। चौपाटी घोटाला, विद्युत उपकरण खरीदी घोटाला, अमृत पार्क घोटाले के बाद अब निगम द्वारा बीते पांच साल में कराए गए 1000 हजार करोड़ के सौंदर्यीकरण एवं निर्माण कार्य भी भ्रष्टाचार की जद में आ गए हैं।

गुरुवार को आयोजित मेयर इन कॉउंसिल की बैठक में एमआईसी के आठ सदस्यों ने महापौर ममता पाण्डेय को निगम की योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की सूची सौंपते हुए उनमें भ्रष्टाचार होना बताया। सदस्यों ने एमआइसी में निगम की योजनाओं में हुए भ्रष्टाचार की जांच लोकायुक्त से कराने का प्रस्ताव रखा, जिसे महापौर ने स्वीकार कर लिया।
प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए सदस्यों ने कहा कि निगम के इंजीनियरों ने निर्माण कार्यों में जमकर भ्रष्टचार किया है। पन्नीलाल चौक का सौंदर्यीकरण हो या सिविल लाइन चौक का सेल्फी प्वॉइंट, विकास के नाम पर निगम इंजीनियरों ने ठेकेदारों से मिलीभगत कर जनता का पैसा जमकर उड़ाया है। घटिया निर्माण कार्यों से जनता में आक्रोश है और वह पार्षदों पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा रही है। इसलिए निगम की योजनाओं एवं निर्माण कार्यों में हुए भ्रष्टाचार की जांच लोकायुक्त से करानी चाहिए।
इन कार्यों के जांच की मांग

एमआइसी सदस्यों ने अमृत योजना, जलावर्धन योजना, सीवर लाइन, पीएम आवास, सीवर लाइन का अतिरिक्त डीपीआर, नवीन विद्युत पोल एवं पुरानी सिटिंग एवं सहायक सामग्री खरीदी, पीएचई पानी फिल्टर एवं कीटनाशक खरीदी, अमृत योजना पार्क निर्माण, आइएचएसडीपी योजना से भवन निर्माण, मस्टर श्रमिक भर्ती में गड़बड़ी, टेबल टेंडर में अनियमितता, सिविल लाइन-धवारी चौराहे पर फाउंटेन एवं सौंदर्यीकरण का कार्य, पन्नीलाल चौक का सौंदर्यीकरण एवं घड़ी खरीदी में अनियमितता, संबल योजना, बीपीएल कार्ड बनाने में भ्रष्टाचार, मानचित्र के विपरीत निर्माण कार्यों की जांच कराने की मांग की है।

इधर, घोटालों की आधा दर्जन फाइलें गायब
बीते पांच साल में नगर निगम में कई घोटाले सामने आए। जनप्रतिनिधि एवं पार्षदों ने एमआइसी एवं परिषद की बैठक में इन पर हो हल्ला भी किया। घोटाले की जांच लोकायुक्त एवं स्वतंत्र एजेंसियों से कराने कई प्रस्ताव पास किए। चौपाटी, विद्युत सामग्री एवं अमृत पार्क सहित आधा दर्जन घोटालों के जांच प्रस्ताव की फाइलंे शासन को भेजी गईं तो आज तक लौटकर वापस नहीं आईं। एमआईसी ने एक बार फिर निगम के निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए लोकायुक्त से जांच कराने का प्रस्ताव पास किया है।

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