केंद्र सरकार की नई कृषि नीति पर किसानों ने जताया गुस्सा

-बोले किसान, ये पूंजीवादी व्यवस्था स्वीकार नहीं

By: Ajay Chaturvedi

Published: 22 Sep 2020, 05:07 PM IST

सतना. संसद से मंजूर केंद्र सरकार की नई कृषि नीति पर किसानों ने गुस्सा जताया है। उन्होंने कहा है कि इससे देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ किसान मारे जाएंगे। केंद्र सरकार ने किसानों के साथ छल किया है। यह नीति अगर लागू हुई तो अन्नदाताओं की परेशानी बढ़ेगी, जिन्होंने वर्षों से देश की अर्थव्यवस्था को संभाले रखा है। कांट्रैक्ट फार्मिंग में कोई भी विवाद होने पर उसका फैसला सुलह बोर्ड में होगा, जिसका सबसे पावरफुल अधिकारी एसडीएम को बनाया गया है। इसकी अपील सिर्फ डीएम यानी कलेक्टर के यहां होगी। इस नई नीति ने किसानों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

ये बातें स्थानीय कृषि उपज मंडी उचेहरा में आयोजित किसान यूनियन की मासिक बैठक में किसानों ने उठाई। इस मौके पर किसान यूनियन के अध्यक्ष ठाकुर प्रसाद ने कहा कि इस कानून से किसान अपने ही खेत में सिर्फ मजदूर बनकर रह जाएगा। पहले ही प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी उनके उत्पाद को खराब बताकर रिजेक्ट कर देते हैं। अब तो उन्हें पूरा हक मिल जाएगा। इस नई नीति से व्यापारियों को डर है कि जब बड़े मार्केट लीडर उपज खेतों से ही खरीद लेंगे तो आढ़तियों को कौन पूछेगा।

बैठक में प्रमुख रूप से केडी सिंह, रामसजीवन लोधी, रामविश्वास, कमलेंद्र सिंह, मोहनलाल, बालेंद्र, संतोष सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। अध्यक्षता ठाकुर प्रसाद ने की।

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