MP: इस जिले के किसान धरती से लेकर आसमान तक कर रहे धरना-प्रदर्शन, फिर भी नहीं होती सुनवाई, पढ़िए पूरा अनोखा विरोध

MP: इस जिले के किसान धरती से लेकर आसमान तक कर रहे धरना-प्रदर्शन, फिर भी नहीं होती सुनवाई, पढ़िए पूरा अनोखा विरोध

suresh mishra | Publish: Sep, 16 2018 04:25:14 PM (IST) | Updated: Sep, 16 2018 04:25:15 PM (IST) Satna, Madhya Pradesh, India

मध्यप्रदेश: इस जिले के किसान धरती से लेकर आसमान में कर रहे धरना-प्रदर्शन, फिर भी नहीं होती सुनवाई, पढ़िए पूरा अनोखा विरोध

सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिला अंतर्गत रामनगर क्षेत्र के किसानों ने पावर ग्रिड कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बताया गया कि मुआवजे की मांग को लेकर जिले के अलग-अलग जगहों पर एक दर्जन किसान टावर पर चढ़कर धरना-प्रदर्शन कर रहे है। पावर ग्रिड द्वारा की गई वादा-खिलाफी से नाराज किसान धरती से 100 फुट ऊंचाई पर चढ़े हुए है। किसानों की मांग है कि जब तक कंपनी या फिर जिला प्रशासन मुआवजा नहीं देती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ये विरोध प्रदर्शन गोरसरी पहाड़ के आसपास के कई गांवों में चल रहा है। जिन किसानों के खेत पर टावर लगे हुए और उनको मुआवजा नहीं मिला है। वह किसान उन्हीं टावर पर चढ़कर मुआवजा मांग रहे है। किसान नेताओं का स्थानीय प्रशासन पर पावर ग्रिड कंपनी के अधिकारियों के साथ मिली-भगत का आरोप है।

ये किसान टावर में चढ़े
मिली जानकारी के मुताबिक रविवार की सुबह से ही आक्रोशित किसानों ने टावर पर चढ़कर विरोध शुरू कर दिया है। टावर पर चढ़े किसानों में बट्टी लाल सिंह निवासी गोदिन, बाबू सिंह निवासी पटेहरा, हेतराम सिंह निवासी गोदिन, द्वारिका पटेल निवासी बटाइया, लोली यादव निवासी बटाइया, व्यूहर पटेल निवासी बटाइया, मोहन प्रजापति निवासी खारा, सुशील बागरी निवासी नन्हवारा और सबुना बाई निवासी नन्हवारा शामिल है।

इन गांवों से गुजरी है टावर लाइन
सतना जिले के जिन गांवों से होकर लाइन गुजरी है। उसमे मैहर तहसील के धनेरी खुर्द, धनेरी कला, रिवारा, गोराइया, झांझ, पटेहरा, जोवा, बरकुला, बरा, लटागांव, आजमाइन, सलैया, ककरा, पिपरा और रामनगर तहसील के बड़ा इटमा, खारा, बटाइया, टेगना, बाबूपुर, बड़वार, कर्रा, नवगांव, गोदहा, बिजौरा, मर्यादपुर आदि गांव से निकाली जा रही है।

चमराडोल लाइन का मुआवजा नहीं दिया
बता दें कि, 2015 में पॉवर ग्रिड कंपनी द्वारा सतना से चमराडोल 765 केव्ही लाइन निर्माण किया था। जिस पर तत्कालीन कलेक्टर संतोष मिश्रा द्वारा १२ लाख प्रति टॉवर, तीन हजार प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से सतना के जिले चार-पांच गांवों में मुआवजा दिया गया था। जबकि लगभग १० ग्रामों में आज दिनांक तक मुआवजे का भुकतान नहीं किया गया। किसान मजबूरी में दर-दर भटक रहा है। अधिकारी किसान की बातों को सुनने के लिए तैयार नहीं है।

प्रशासन ने लुटा किसानों का मुआवजा
विगत दिनों सतना, कटनी, सीधी, जबलपुर जिला से पॉवर ग्रिड कार्पोरेशन लिमिटेड कंपनी द्वारा विध्यांचल पुलिंग के निर्माण कार्य इसी कंपनी द्वारा किया जा रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि फसल नुकसान राशि देकर हम किसानों को डरा धमकाकर पुलिस-प्रशासन की सह पर जबरजस्ती कार्य किया जा रहा है। मुआवजे की मांग किए जाने पर उल्टा मुकदमों में फंसाया जा रहा है। अनेकों बार संबंधित जिला कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी को आवेदन दिए गए। लेकिन किसी भी प्रकार सुनवाई न करते हुए तानाशाही रवैया पूर्ण जबरजस्ती हमारे खेतों पर कार्य करवाया जा रहा है।

कहीं भी नहीं हुई सुनवाई
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ सतना इकाई के सुभाष पाण्डेय ने बताया कि हम सभी किसान लगातर दो वर्ष पूर्व से स्थानीय प्रशासन, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, राष्ट्रपति, ऊर्जा मंत्रालय को लाइन के मुआवजे के संबंध में ज्ञापन सौंपा था। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जबकि विद्युत अधिनियम 2003 के वर्क लाइसेंस रूल 2006 के 3,1,अ में किसान की अनुमति के बगैर खेत में जबरदस्ती कार्य नहीं किया जा सकता। अगर किसान मुआवजा से सहमत नहीं है तो कंपनी कलेक्टर से मुआवजे ठीक कराकर किसान की सहमति से कार्य किया जा सकता है।

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