scriptForest rights leases increased crop damage from wild animals | वनाधिकार पट्टों ने बढ़ाई जंगली जानवरों से फसल की नुकसानी | Patrika News

वनाधिकार पट्टों ने बढ़ाई जंगली जानवरों से फसल की नुकसानी

जानवरों की संख्या में इजाफा और जंगलों में बढ़ा मानवदखल

वनों के बाह्य क्षेत्र में भी बढ़ रहा खेती का रकवा भी बड़ा कारण

 

सतना

Published: December 22, 2021 09:47:28 am

सतना. एक दशक पहले तक वन्य प्राणियों द्वारा किसानों के फसल नुकसान के मामले काफी कम आते थे। लेकिन विगत कुछ सालों से जंगली जानवरों से किसानों के फसल क्षति के मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह वनाधिकार पट्टों की संख्या में तेजी से इजाफा होना है। इसके अलावा बाह्य वन क्षेत्र में खेती का रकवा भी बढ़ा है तो जंगल में विडाल वंश के जानवरों की तादाद बढ़ने से शाकाहारी जानवर वन क्षेत्र से बाहर निकल रहे हैं। वनों का घटता घनत्व भी एक वजह है।
वनाधिकार पट्टों ने बढ़ाई जंगली जानवरों से फसल की नुकसानी
इस तरह खेतों में वन्य प्राणी पहुंचकर फसल को पहुंचाते हैं नुकसान
वन्य प्राणी से फसल नुकसानी मुआवजा देता है राजस्व विभाग

शासन की तय व्यवस्था के अनुसार अगर जंगली जानवर वन्य क्षेत्र से बाहर आकर किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं तो उन्हें राहत राशि दिये जाने का प्रावधान है। यह राहत राशि वन विभाग के प्रतिवेदन के आधार पर राजस्व विभाग देता है। सतना में प्रमुख वन क्षेत्र वाली तहसीलें देखें तो मझगवां, मैहर, उचेहरा, रामनगर हैं। इसके तहत सबसे ज्यादा फसल हानि के प्रकरण मझगवां क्षेत्र में सामने आ रहे हैं। मझगवां क्षेत्र में सर्वाधिक 40 मामले सामने आए हैं तो सबसे कम मैहर में २ मामले दर्ज किये गये हैं। रामनगर में 25 मामले सामने आए हैं। हालांकि फसल नुकसान के मामले परसमनिया इलाके में भी होते है लेकिन उचेहरा तहसील में फसल नुकसानी के प्रकरण सामने न आना सवाल भी खड़े करता है।
फसल नुकसानी की यह है वजह

वन विभाग के अधिकारियों की माने तो वन्य प्राणियों की प्रवृत्ति के अनुसार सामान्य स्थितियों में वे पानी की तलाश में ही वन क्षेत्र के बाहर जाते हैं। लेकिन वन क्षेत्र के हिसाब से अब शाकाहारी वन्य प्राणियों नीलगाय, चीतल, सांभर की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। यही स्थिति जंगली शूकर की है। दूसरी ओर घने क्षेत्रों में बाघ की संख्या बढ़ने पर अन्य मांसाहारी जानवर तेंदुआ आदि बाह्य क्षेत्र में भगने लगे हैं। ऐसे में बाह्य क्षेत्र के शाकाहारी जानवर भोजन के लिये वन क्षेत्र से बाहर का रुख करते हैं। पहले वन क्षेत्र से लगी गैर वनभूमि में खेती कम होती थी। लेकिन अब लोग वन क्षेत्र से लगकर कर खेती करने लगे हैं। यही खेती शाकाहारी वन्य प्राणियों के लिये आसान भोजन होता है।
तेजी से बांटे जा रहे वनाधिकार पट्टे बड़ी वजह

वन महकमे के अनुसार सरकार की नीतियों और राजनीतिक लाभ के नजरिये से वनाधिकार पट्टों के जारी करने में तेजी आई है। हालांकि वन महकमा इसको लेकर सख्त रुख रखता है इसके बाद भी तमाम पट्टे जारी हो रहे हैं। विगत 5 सालों में वनाधिकार पट्टे तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में बीच जंगल में जब खेती होने लगी और वन्य प्राणियों के रहवास में दखल बढ़ा तो लोगों पर हमले और फसल नुकसानी के मामले बढ़ने लगे। जंगल में खेती होने से जंगली जानवर यहां स्वाभाविक रूप से नुकसान पहुंचाते हैं।
किसानों की अपनी परेशानी

किसान कहते हैं कि शासन के जो नियम हैं वही उनकी नुकसानी में सबसे ज्यादा बाधा है। दरअसल 25 फीसदी से कम नुकसानी पर राहत राशि नहीं मिलती है। वन विभाग ज्यादातर मामलों में नुकसान 25 फीसदी से कम ही बनाता है। जबकि नुकसान ज्यादा का होता है। राजस्व विभाग कहता है कि हमे जो प्रतिवेदन मिलता है उसी के अनुसार राहत राशि का वितरण किया जाता है। किसानों का कहना है कि जो राहत राशि मिलती है वह भी काफी कम होती है। वाास्तविक नुकसान उसका तीन गुना तक होता है।
2015 की राष्ट्रीय कार्यशाला के निर्णय जमीन पर उतरे नहीं

वन्य प्राणी संरक्षण और सुरक्षा के बीच फसलों को क्षति से बचाने की चुनौती को लेकर तत्कालीन वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने 2015 में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला बुलाई थी। जिसमें तय किया गया था कि वन विभाग वनों को जानवरों के खाने-पीने, शेल्टर के लिहाज से इतना संपन्न बनाए कि उन्हें जंगल के बाहर आने की आवश्यकता ही नहीं पड़े। चने की बोई फसलों का शूकर के झुण्ड द्वारा, गेहूं की खड़ी फसलों को नीलगाय-हिरण द्वारा उजाड़ना आम बात है। दीवार बनाना, फेंसिंग लगाना, फसल चक्र बदलाव, सोलर पॉवर फेंसिंग आदि उपायों की बात सामने आई। लेकिन इनका जमीनी क्रियान्वयन अपेक्षित नहीं हो पाने से फसल नुकसानी पर सही तरीके से रोक नहीं लग पाई।
फसल नुकसानी एक नजर में

तहसील- प्रकरण- राहत राशि

मझगवां - 40 - 339666 रुपये

मैहर - 02 - 14848 रुपये

रामनगर - 25 - 135839

कुल - 67 - 4,90,353

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