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सरकारी खरीदी से किसानों का मोह भंग, मंडिंयों में मिल रहे ज्यादा दाम, समर्थन में 2 किसानों ने बेचा 40 क्विंटल गेहूं

मंडिंयों में किसान को एमएसपी से ज्यादा गेहूं का भाव मिल रहा है। परेशानी नहीं होती है। मंडियों में 1800 से लेकर 2000 रुपए प्रति क्विंटल दाम मिलने से किसान सरकारी खरीदी से दूरी बनाए हुए हैं। जिलेभर में करीब 84 हजार किसान समर्थन में गेहूं बिक्री के लिए पंजीकृत हैं।

सतना

Published: April 06, 2022 02:31:31 am

सतना. सरकार की अति महत्वाकांक्षी समर्थन मूल्य योजना से किसानों का मोह भंग होता जा रहा है। यही कारण है कि किसान फसल विक्रय करने में दूरी बना रहे हैं। जिलेभर में 4 अप्रेल से शुरू हुई गेहूं खरीदी में सिर्फ 2 किसानों ने 40 क्विंटल उपज का विक्रय किया है। खरीदी एजेंसी नागरिक आपूर्ति निगम ने सतना में 45-50 लाख क्विंटल गेहूं की आवक का अनुमान लगाया है, लेकिन मंडिंयों में किसान को एमएसपी से ज्यादा गेहूं का भाव मिल रहा है। साथ ही किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है। मंडियों में 1800 रुपए से लेकर 2000 रुपए प्रति क्विंटल दाम मिलने से किसान सरकारी खरीदी से दूरी बनाए हुए हैं। बता दें कि जिलेभर में अलग अलग तहसीलों में करीब 84 हजार किसान समर्थन में गेहूं बिक्री के लिए पंजीकृत हैं।
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19 किसानों ने स्लॉट बुक कराया

74 एसएमएस में 2 ने की बिक्रीसोमवार को उपार्जन केन्द्रों में गेहूं की फसल बेचने के लिए पहले से ही 19 किसानों ने अपनी सुुविधानुसार स्लॉट बुक कराया था। 5 अप्रेल को 55 किसानों ने। इस तरह कुल 74 किसान गेहूं की फसल लेकर उपार्जन केन्द्र पहुंचने वाले थे लेकिन 2 किसान ने ही 80 हजार 600 रुपए कीमत का 40 क्विंटल अनाज का विक्रय किया।
तो क्या चना, मसूर जैसे बनेंगे हालात

बाजार में गेहूं के बढ़ते दामों को देखकर ऐसा लग रहा जैसे इस वर्ष गेहूं खरीदी भी पिछले वर्ष की चना, मसूर और सरसों जैसे होगी। क्योंकि पिछले वर्ष सरकार ने समर्थन में दलहन और तिलहन खरीदी के सारे इंतजाम तो किए लेकिन किसानों ने एक दाना उपज की बिक्री नहीं की थी।
खरीदी स्थल पर नहीं पहुंचीं समितियां

मंडियों में गेहूं की तेजी होने के कारण उपार्जन करने वाली समितियां फिलहाल केन्द्रों में खरीदी के लिए नहीं पहुंच रही हैं। उपार्जन स्थलों में खरीदी से जुड़े किसी प्रकार के इंतजाम नहीं है। सेवा सहकारी समितियां और महिला स्व सहायता समूह के संचालक गेहूं के रेट कम होने का इंतजार कर रहे हैं, हालांकि अभी किसानों की फसल भी नहीं कटी है।

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