स्वीट्स होम की शोभा बढ़ा रहे हाइटेक एक्वेरियम

स्वीट्स होम की शोभा बढ़ा रहे हाइटेक एक्वेरियम
Hightech Aquarium, Celebrating the Sweet Home

Jyoti Gupta | Publish: Dec, 11 2018 09:35:59 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

घर की खूबसूरती बढ़ाने और इंटीरियर को सजाने लिए सिटीराइट्स घर में रख रहे एक्वेरियम

सतना. मछलियों का आशियाना यानी एक्वेरियम। इसमें रंग बिरंगी मछलियां देखने वालों की आंखों को सुकून तो देती ही है साथ ही साथ मान्यता अनुसार वास्तुदोष को भी समाप्त करती है। कहा जाता है कि इसमें घर में सुख समृद्धि आती है इन सब कारणों से आम लोगों में एक्वेरियम की दीवानगी बढ़ती जा रही है। लोग अपने घरों में इंटीरियर से मैच करते फि श एक्वेरियम लगा रहे हैं । लोगों के दीवानगी को देखते हुए एक्वेरियम को भी हाईटेक बनाया जा रहा है । अब न मछली को चारा खिलाने की टेंशन होगी और न ही टेंपरेचर मेंटेन रखने की । शहर में एक्वेरियम बनाने वालों का कहना है कि पहले लोग बने बनाए एक्वेरियम ले जाते थे, उनकी कोई विशेष च्वाइस नहीं होती थी, लेकिन अब इन्हें ऑन डिमांड बनाया जा रहा है । वही तकनीक के साथ इस दौर में एक्वेरियम भी इससे अछूता नहीं रह गया है। बाजार में उपलब्ध तरह की लाइट्स और सिस्टम से इसे हाईटेक बनाया जा रहा है।

एक्रेलिक फाइबर ग्लास की मांग
दुकानदारों के अनुसार पहले ट्रेडिशनल ग्लास वाले एक्यूरियम बनते थे, अब लोग एक्रेलिक फाइबर ग्लास वाला एक्वेरियम पसंद कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि इन एक्वेरियम का मोल्डेड और मजबूत होना । पहले वाले एक्यूरियम की तुलना में यह काफी मजबूत और टिकाऊ होते हैं । इससे शिफ्ट करने में टूटने का डर नहीं होता । इस तरह एक्रेलक ग्लास एरिया में नीचे खाली जगह का भी इस्तेमाल किया जा सकता है । इसमें छोटे- छोटे कैबिनेट भी बने होते हैं ।

लगवा रहे ओरिजनल प्लांट्स

दुकान संचालकों के अनुसार हाल के दिनों में एक्वेरियम बाजार में एक और ट्रेंड देखने को मिल रहा है । अब लोग आर्टिफि शियल प्लांट नहीं बल्कि ओरिजिनल प्लांट की डिमांड कर रहे हैं। इस ओरिजिनल प्लांट को अमेजोनियम कहा जाता है । इसे एक्वेरियत के निचले हिस्से में लगाया जाता है। इसकी जड़ में जावा स्वाइल होता है । यह पानी में नहीं फैलता है इस वजह से एक्यूरियम गंदा नहीं होता । विशेषज्ञों के अनुसार इस प्लांट की खासियत यह होती है कि आवश्यकता पडऩे पर मछलियां इसे फू ड के रूप में भी खा सकती हैं यह हानिकारक नहीं होता। यह प्लांट प्रकाश संश्लेषण की थ्योरी पर काम करता है । यानी एक्वेरियम में जो लाइट लगी होती है उसी से यह प्लांट बढ़ता है । पानी में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को बराबर रखने के लिए अलग से सिलेंडर लगाया जाता है।
बैकग्राउंड में थ्रीडी वर्क
तकनीक बेस्ड एक्सवेरियम बनाने वाले दुकानदारों का कहना है कि इनकी इतनी बढ़ गई है कि बैकग्राउंड में भी काम होने लगा है । लोग लाल, नीला और हरे रंग के बैकग्राउंड को काफी पसंद कर रहे हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि बैकग्राउंड में इस्तेमाल होने वाले सभी वाटररजिस्टेंस है । इनमें लेजर ट्री, लेजर लाइट फिश मैन भी शामिल है इसकी मदद से अपने हिसाब से डिजिटल बनाया जा सकता है ।

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