गणतंत्र के गौरव: ASI ने दी ईमानदारी की मिसाल, छोटे से शहर में कर दिया बड़ा काम, यहां पढ़े पूरी खबर

धन-दौलत ऐसी चीज है जिसके मिलते ही अच्छे-अच्छों की नजर फिसल जाती है। वो भी जब पड़ी हुई मिले तो लोग ईश्वर की यही मर्जी समझकर रख लेते है।

By: suresh mishra

Published: 26 Jan 2018, 10:00 AM IST

सतना। धन-दौलत ऐसी चीज है जिसके मिलते ही अच्छे-अच्छों की नजर फिसल जाती है। वो भी जब पड़ी हुई मिले तो लोग ईश्वर की यही मर्जी समझकर रख लेते है। लेकिन अपने समाज में आज भी कई ऐसे लोग है जो पैसे से ज्यादा फर्ज को समझते है। एक ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है। आरपीएफ के एएसआई सुनील सिंह बघेल ने।

टीआई मानसिंह यादव से कई ईमानदारी की किस्से सुने और अपने जीवन में भी उतार लिया। कहावतों में भी कहा गया गया है कि, इंसान कहता है कि पैसा आए तो मैं कुछ करके दिखाऊं। और पैसा कहता है कि तू कुछ करके दिखा तो मैं आऊं। हालांकि धन हमारे जीवन की सबसे उपयोगी चीज हैं। जिसके माध्यम से हम अपनी सारी जरूरत की चीजों को खरीद सकतें है, लेकिन फर्ज से बढ़कर कोई धन नहीं होता है।

ये है मामला
1 सितंबर 2017 को टीआई मानसिंह यादव ने सतना आरपीएफ थाने का चार्ज लिया। इसके बाद अपने कार्य करने के तरीके और अनुभव साथियों में शेयर किए। कहा कि हमारे किए अपनी डयूटी और फर्ज से बढ़कर कुछ नहीं है। आप सभी लोग ऐसा कार्य करें कि आपकी ईमानदारी की मिसाल बन जाएं। 9 नवंबर 2017 की रात्रि का समय था कि एएसआई सुनील सिंह बघेल की नजरें एक संदिग्ध बैग पर पड़ी, जिसेे देखते ही वह भाप गए कि हो न हो ये बैग किसी से छूट गया है।

क्योंकि बैग के आसपास कोई नहीं था। बैग खोलकर देखा तो उनके होश उड़ गए। बैग में सोना-चांदी सहित लाखों रुपए का सामान था। कुछ समय के लिए एएसआई के पैर डग मगा गए। क्योंकि उस समय बैग के पास वे अकेले थे। फिर पुलिसिया फर्ज याद आया और थाने पहुंचकर टीआई को पूरे मामले की जानकारी दी। टीआई ने एएसआई की ईमानदारी देखते हुए उनकी प्रशंसा कर बैग के मालिक की खोजबीन शुरू की।

बैग में खोजबीन करते समय कुछ दस्ताबेज हाथ लगे तो पीडि़त को अवगत कराया गया। पीडि़त परिवार थाने पहुंचकर पुलिस की ईमानदारी देखी तो उनकी आंखें भर आई। बैग की मालिकिन के आंसुओं की धार ही नहीं बंद हो रही थी। बोली, हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी इसी बैग पर थी। जो सही सलामत मिल गया। बोली, समाज में ज्यादातर लोग पुलिस के रवैये से दूरियां बनाते है। पर वास्तविकता में पुलिस के अंदर बड़ा इमान होता है। ये पैसे से ज्यादा फर्ज को महत्व देते है।

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suresh mishra IMAGE CREDIT: patrika

साल की सबसे बड़ी सफलता
साल की सबसे बड़ी सफलता आरपीएफ को उस समय हाथ लगी जब 8 नवंबर 2017 को दो दर्जन कार्टनों में भरा गांजा ट्रेन में लोड़ होने जा रहा था। उसी समय गस्त कर रहे टीआई मान सिंह, एसआई डीके पटेल और हेड कांस्टेबल आरके मिश्रा की नजर पार्सल घर की ओर पड़ी। जहां तस्करों द्वारा तीन लाख से उपर का गांजा जब्त किया गया। इसी तरह 14 जनवरी को पानी लेने के लिए उतरी महिला ट्रेन रवाना होते ही रेल में चढ़ते समय गिरने ही वाली थी। जिसको लपक कर पकड़ लिया गया। फिर परिजनों से बिछड़ महिला के घर वालों से संपर्क किया गया। जिसको विधिवत घर तक पहुंचाया गया।

विदेशी सांपों के साथ सपेरों को पकड़ा
ट्रेन में यात्रियों को सांप दिखाकर डरा-धमकाकर जबरन वसूली करने वाले एक दर्जन सपेरों को विदेशी सांपों के साथ पकड़ा गया। इसमें 5 काले सांप और 5 दो मुंह वाले सांप वन विभाग को सुपुर्द किए गए। जबकि 35 बिछड़े बच्चों को परिजनों से मिलाया गया। वहीं एक सैकड़ा अनाधिकृत वेंडरों पर शिकंजा कसते हुए। उन पर कार्रवाई की। इसी तरह ट्रेन में और रेलवे स्टेशन परिसर में शराबखोरी करने वाले एक सैकड़ा लोगों पर कार्रवाई की।

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